दिन विशेष कविता : रिमझिम रिमझिम गिरत पानी – चन्द्रभूषण यदु
रिमझिम रिमझिम गिरत पानी
बोती जमाती किसान किसानी
सबके जिंनगी के इही कहानी
का परजा अब का राजा रानी
रिमझिम रिमझिम गिरत पानी —-
सूरलगहा लगही परहा पानी
मानसून करही अब निगरानी
झुमर झुमर नाचै बरखा रानी
सबों के फायदा न होय हानि
रिमझिम रिमझिम गिरत पानी —–
हांसत जावय दूनों मरद परानी
गावे ददरिया मीठ गुरतुर बानी
कमरा ना खुमरी छत्ता तानी
खेत खार संग करय मितानी
रिमझिम रिमझिम गिरत पानी —–
खार बावत बर बरोबर पानी
ओरीछा धार धरे खपरा छानी
मानसून चढ़े भरपूर जवानी
झड़ी झक्कर टपटत हे पानी
रिमझिम रिमझिम गिरत पानी —–
