दिन विशेष अनुवाद में हंगेरियन कविता ” Ősz ” : Balázs Béla का ‘इंदुकांत आंगरिस’ द्वारा हिन्दी में अनुवाद
7 अक्टूबर 1956 को दिल्ली में जन्मे इंदुकांत आंगरिस हिंदी, अंग्रेजी हंगेरियन, ग्रीक, चेख,लिथुआनिया आदि भाषाओं के ज्ञाता हैं। विभिन्न विधाओं में उनके छह कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त साझा संग्रह और ई-बुक्स में भी इंदुकांत आंगरिस की बहुत सी रचनाएं प्रकाशित हुई है ।
उनका अनुवाद कार्य भी उल्लेखनीय है, इसमें हंगेरियन कहानियों का हिंदी अनुवाद, अरबी कविताओं का अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद, लिथुआनिया लोक कथाओं का हिंदी में अनुवाद आदि प्रमुख हैं। वे कई साहित्यिक संस्थाओं के साथ-साथ और कई पत्रिकाओं के संपादन से भी जुड़े हुए हैं।
“पतझड़” : इंदुकांत आंगरिस
पतझड़ है,
ठंड है,
सीले कोहरे में भीगी हुई हैं
पेड़ो से गिरे हुए पत्तों की लाशें.
धुंध में चलने वाले खो जाते हैं
और
ठण्ड में सिकुड़ते लोग
जुड़ जाते हैं।
ख़्याल रहें,
हम दोनों
कोहरे में चल रहे थे।
कौन जानता है
हमारी मुलाक़ात कैसी होगी?
और जो
तुम्हें सिर्फ
ठण्ड की वजह से लगाते हैं गले
वो लोग
सूरज की
पहली किरण को
भुगतान करें।
मूल रचना – ” Ősz ” : Balázs Béla
Ősz van, hideg van nyirkos ködben áznak
Holttestei a hullott leveleknek.
A ködbenjárók eltévednek
És összebújnak akik fáznak.
Vigyázzunk, mi ketten ködben jártunk.
Ki tudja mi a találkozásunk?
És akik azért ölelnek mert fáznak
Megfizetnek az első napsugárnak.

