दिन विशेष विमर्श : आस्था देव की प्रेरक रचना “कल करे सो आज कर”
दिन विशेष विमर्श : आस्था देव की प्रेरक रचना “कल करे सो आज कर” यह रचना एक ऐसी स्त्री की मनःस्थिति का जीवंत दस्तावेज है जो घर, बच्चे, नौकरी, स्टेटस…
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दिन विशेष विमर्श : आस्था देव की प्रेरक रचना “कल करे सो आज कर” यह रचना एक ऐसी स्त्री की मनःस्थिति का जीवंत दस्तावेज है जो घर, बच्चे, नौकरी, स्टेटस…
एक नाटक के पीछे का नाटक -आस्था देव दिन के इस समय जब न सुबह है, न शाम , न दोपहर! घड़ी ने 10:30 बजाये हैं। बावजूद इसके कि मैं…
कल करै सो आज कर -आस्था देव अक्सर कुछ दमदार लिखने के लिए, प्रेरणा तलाशनी पड़ती है पर आजकल जिंदगी की रेलमपेल में प्रेरणा का ऐसा अकाल पड़ा रहता है,…
आस्था देव बिहार के बेतिया में जन्मी आस्था देव, पिछले 5 सालों से लंदन में हिंदी लेखन में सक्रिय हैं। वातायन संस्था में मुख्य सचिव के तौर पर कई साहित्यिक…