वर्षा ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर”
वर्षा ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर” अम्मा, ज़रा देख तो ऊपरचले आ रहे हैं बादल ।गरज़ रहे हैं, बरस रहे हैं,दीख रहा है जल ही जल ।…
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वर्षा ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर” अम्मा, ज़रा देख तो ऊपरचले आ रहे हैं बादल ।गरज़ रहे हैं, बरस रहे हैं,दीख रहा है जल ही जल ।…
मिर्च का मज़ा ( बाल कविता ) रामधारी सिंह “दिनकर” एक काबुली वाले की कहते हैं लोग कहानी,लाल मिर्च को देख गया भर उसके मुँह में पानी। सोचा, क्या अच्छे…
चूहे की दिल्ली-यात्रा ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर” चूहे ने यह कहा कि चूहिया! छाता और घड़ी दो,लाया था जो बड़े सेठ के घर से, वह पगड़ी…
सूरज का ब्याह ( बाल कविता) : रामधारी सिंह “दिनकर” उड़ी एक अफवाह, सूर्य की शादी होने वाली है,वर के विमल मौर में मोती उषा पिराने वाली है। मोर करेंगे…
नमन करूँ मैं ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर” तुझको या तेरे नदीश, गिरि, वन को नमन करूँ मैं।मेरे प्यारे देश! देह या मन को नमन करूत्र मैं?किसको…
चांद का कुर्ता ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर” हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला,‘‘सिलवा दो माँ मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला। सनसन…
स्वरांगी साने : नाम ही बदला है, घटना नहीं, कल सोनम थी, आज सिया, कल कोई और … इस बार नाम सिया है, पिछले साल सोनम थी। अगली बार कोई…