चिड़िया और उदासी ( कविता ) : मंजु गुप्ता
एक उदास चिड़िया
बैठी थी पेड़ पर अकेली, गुमसुम
मैं भी उदास, सोच रही थी-
चिड़िया उदास भला किस कारण होगी
शायद उसे भूख लगी हो या बेचारी थक गयी होगी
क्या पता, अपने बच्चों की चिंता में उदास हो
या प्रतीक्षा कर रही हो साथी की
नहीं तो इतनी गुमसुम क्यों बैठी है
तभी अचानक, वह फुर्र से उड़ गई
क्षण भर में उदासी को झटक
हवा में तिर गई.
पत्थर- सी भारी मेरी उदासी को
और गहरा गयी उसकी उड़ान
काश, मैं भी चिड़िया होती
झटक पाती अपनी पथरीली उदासी
और हल्की हो आकाश में उड़ पाती.
