साइकिल – स्वास्थ्य और खुशी का साथी : सांद्रा लुटावन (कविता)
सुबह की पहली किरण जब धरती पर मुस्काती है,
हल्की ठंडी हवा भी मन को छू जाती है।
सड़क किनारे खड़ी साइकिल पुकार लगाती है,
चलो उठो, जीवन में नई ऊर्जा जगाती है।
दो पहियों पर चलता यह सरल सा साधन,
देता है शरीर को शक्ति और मन को वंदन।
ना धुआँ, ना शोर, बस प्रकृति का साथ है,
साइकिल चलाना जैसे स्वास्थ्य की सौगात है।
पैडल की हर चाल में एक लय सी बंध जाती है,
थकान की हर परत धीरे-धीरे मिट जाती है।
दिल की धड़कन भी जैसे गीत सुनाने लगती है,
हर सांस में ताजगी नई कहानी बन जाती है।
बच्चों की हँसी हो या बुजुर्गों का सहारा,
साइकिल हर उम्र का बन जाती है किनारा।
यह केवल साधन नहीं, यह है जीवन का अभ्यास,
जो रखे शरीर स्वस्थ और मन को रखे खास।
शहर की भीड़ में भी यह रास्ता दिखाती है,
पर्यावरण को भी यह साफ-सुथरा बनाती है।
ना पेट्रोल की चिंता, ना खर्च का बोझ है,
साइकिल चलाना सच में एक अनमोल सोच है।
आओ साइकिल अपनाएँ, स्वास्थ्य का दीप जलाएँ,
हर घर, हर राह में खुशियों के फूल खिलाएँ।
चलो मिलकर यह संकल्प आज दोहराएँ,
साइकिल चलाकर जीवन को सुंदर बनाएँ।
