दिन विशेष विमर्श में ‘रास बिहारी गौड़’ की कविता “अपना घर”
बिटिया
कभी गुस्से में
कभी लाड़ में
कभी जज़्बात में
कह देती है
चली जाऊँगी
एक रोज ‘अपने घर’
पूरे घर के कानों में
थोड़ा डर, थोड़ा सवाल
थोड़ी पीड़ा
बनकर गूँजता है
बिटिया का कहना
अपना घर ..!
अपना घर ..?
अपना घर..।
