Author: वैश्विक हिंदी परिवार

‘वैश्विक हिंदी परिवार’ की संगोष्ठी में उठा भाषा, शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक अस्मिता का व्यापक विमर्श : विजय नगरकर

‘वैश्विक हिंदी परिवार’ की संगोष्ठी में उठा भाषा, शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक अस्मिता का व्यापक विमर्श : विजय नगरकर मातृभाषा : स्मृति नहीं, भविष्य की शक्ति भाषा केवल शब्दों का…

झाँसी में जमा दिल्ली के कवियों का रंग

झाँसी में जमा दिल्ली के कवियों का रंग झाँसी में रविवार, छह सितम्बर को कवि-शायरों की एक ख़ूबसूरत महफ़िल सजाई डॉ. विक्रम अग्रवाल और कथाकार डॉ. निधि अग्रवाल ने, जिसका…

दिन विशेष ( कविता ) में धर्मवीर भारती की कविता ‘कनुप्रिया’ से

दिन विशेष ( कविता ) में धर्मवीर भारती की कविता ‘कनुप्रिया’ से घाट से लौटते हुएतीसरे पहर की अलसायी बेला मेंमैंने अक्सर तुम्हें कदम्ब के नीचेचुपचाप ध्यानमग्न खड़े पायामैंने कोई…

21वीं सदी में रचनात्मक लेखन के विविध आयाम

21वीं सदी में रचनात्मक लेखन के विविध आयाम साहित्य अकादमी एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज के हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘21वीं सदी में रचनात्मक लेखन के…

दिन विशेष ( कविता ) में सांद्रा लुटावन की कविताएँ

दिन विशेष ( कविता ) में सांद्रा लुटावन की कविताएँ सूरीनाम – दक्षिण अमेरिका से सांद्रा लुटावन की कविताएँ। उनकी कविताओं की अनगढ़ता पूरे भोलेपन के साथ देखी जा सकती…

जन्मदिन विशेष में भारतेंदु हरिश्चंद्र की कविता “अब प्रीति करी तौ निबाह करौ”

जन्मदिन विशेष में भारतेंदु हरिश्चंद्र की कविता “अब प्रीति करी तौ निबाह करौ” अब प्रीति करी तौ निबाह करौअपने जन सों मुख मोरिए ना ।तुम तो सब जानत नेह मजाअब…

उर्दू अकादमी के कार्यक्रम में ‘स्त्री-विमर्श और संस्कारों के बदलते कथानक’ विषय पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए: मनोज कुमार श्रीवास्तव

उर्दू अकादमी के कार्यक्रम में ‘स्त्री-विमर्श और संस्कारों के बदलते कथानक’ विषय पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए: मनोज कुमार श्रीवास्तव अभी जब सिराज अजमली सर बोल रहे…

गोपालदास नीरज साहित्य समूह के कवि सम्मेलन में साहित्य और राष्ट्रभावना का अद्भुत संगम

गोपालदास नीरज साहित्य समूह के कवि सम्मेलन में साहित्य और राष्ट्रभावना का अद्भुत संगम नई दिल्ली। द्वारका सेक्टर-12 स्थित गैलार्ड टावर में रविवार को गोपालदास नीरज साहित्य समूह के बैनर…

हिंदू कम्युनिटी जापान ने टोक्यो में रचा इतिहास

हिंदू कम्युनिटी जापान ने टोक्यो में रचा इतिहास कृष्ण जन्माष्टमी एवं तिरंगा उत्सव में पहली बार महिलाओं की दही हांडी, भारत-जापान मित्रता का खूबसूरत संदेश टोक्यो, जापान | ६ सितंबर…

‘मेरे जीवन में मातृभाषा – स्थिति और चुनौतियाँ’ विषय पर वैश्विक हिंदी परिवार की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

‘मेरे जीवन में मातृभाषा – स्थिति और चुनौतियाँ’ विषय पर वैश्विक हिंदी परिवार की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न केंद्रीय हिंदी संस्थान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद, वातायन (यूके) तथा भारतीय भाषा मंच के…

दिन विशेष में महेंद्र सिंह की कहानी “एक्वेरियम”

दिन विशेष में महेंद्र सिंह की कहानी “एक्वेरियम” यह मैं हूं। यह मेरी तस्वीर है। इसमें मेरे बाल खूब बढ़े हुए हैं-धोनी प्रभाव के चलते नहीं, बल्कि अल्प-बेकारी से उपजे…

दिन विशेष में सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा की लघुकथाएँ

दिन विशेष में सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा की लघुकथाएँ “थ्रिल मेरी जान” “मैं ठीक तीन बजे आ जाऊँगी तेरे हॉस्टल के गेट पर। तैयार मिलियो।” अंतिम पीरियड समाप्त होते ही नमिता…

दिन विशेष कहानी में डॉ. अंजना गर्ग की कहानी “चार खुश औरतें”

दिन विशेष कहानी में डॉ. अंजना गर्ग की कहानी “चार खुश औरतें“ डॉ अंजना गर्ग की यह कहानी “चार खुश औरतें” जीवन के प्रति एक नए दृष्टिकोण को प्रस्तुत करती…

वैश्विक हिंदी परिवार : विशेषांक की झलक

वैश्विक हिंदी परिवार : विशेषांक की झलक विशेषांक उल्लेखवैश्विक हिंदी परिवार के विशेषांक में साहित्य की विविध विधाओं का सुंदर संगम प्रस्तुत किया गया है। इसमें कहानी, कविता, ग़ज़ल, व्यंग्य,…

काजल सूरी की पुस्तक-नाटक ‘सस्सी पुन्नू’ का विमोचन

काजल सूरी की पुस्तक-नाटक ‘सस्सी पुन्नू’ का विमोचन रुबरू थिएटर की ओर से काजल सूरी द्वारा लिखित पुस्तक-नाटक ‘सस्सी पुन्नू’ का विमोचन किया गया। यह पुस्तक हंस प्रकाशन से प्रकाशित…

‘बेशर्ममेव जयते’ के मंचन ने लेखक को दिया रचनात्मक सुख

‘बेशर्ममेव जयते’ के मंचन ने लेखक को दिया रचनात्मक सुख मुंबई में प्रेम जनमेजय के व्यंग्य-संग्रह ‘बेशर्ममेव जयते’ पर आधारित नाटक का पहली बार मंचन किया गया। गोदान कुमार और…

‘अगम बहै दरियाव’ का नायक पूरा बनकट गाँव है : प्रो. श्रद्धा सिंह

‘अगम बहै दरियाव’ का नायक पूरा बनकट गाँव है : प्रो. श्रद्धा सिंह हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. श्रद्धा सिंह ने कहा कि शिवमूर्ति के पात्र संकट का शिकार होने…

कविता – शिक्षक-कर्म : प्रखर शर्मा

कविता – शिक्षक-कर्म : प्रखर शर्मा जैसे एक कुंभकारएक कुंभ की रचना के दौरानसर्वप्रथम भूमि पर पड़ी मिट्टी को परखकरबहुत ही संजीदगी से उठाता है।फिर कंकड़ बिनपानी आदि से सानकरपटककर-पीटकर(तरह-तरह…

माँ का जन्मदिन : वेद प्रकाश सिंह

माँ का जन्मदिन : वेद प्रकाश सिंह आज माँ का जन्मदिन हैयह बात बच्चों को क्या!माँ को भी नहीं मालूम थी। तीन दिन पहले हीमाँ अनंत की यात्रा पर निकल…

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास में हिंदी माह का शुभारंभ, हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर जोर

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास में हिंदी माह का शुभारंभ, हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर जोर राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत द्वारा प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार…

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