द्वितीय अध्याय / तृतीय वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति
द्वितीय अध्याय / तृतीय वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति यदा पञ्चावतिष्ठन्ते ज्ञानानि मनसा सह । बुद्धिश्च न विचेष्टते तामाहुः परमां गतिम् ॥ १० ॥ जब मन…
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द्वितीय अध्याय / तृतीय वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति यदा पञ्चावतिष्ठन्ते ज्ञानानि मनसा सह । बुद्धिश्च न विचेष्टते तामाहुः परमां गतिम् ॥ १० ॥ जब मन…
प्रथम अध्याय / द्वितीय वल्ली / भाग ३ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति एतदालम्बनँ श्रेष्ठमेतदालम्बनं परम्। एतदालम्बनं ज्ञात्वा ब्रह्मलोके महीयते ॥ १७ ॥ ॐ कार आलंबन अत्युतम, श्रेष्ठतम है, परम…
प्रथम अध्याय / द्वितीय वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति न नरेणावरेण प्रोक्त एष सुविज्ञेयो बहुधा चिन्त्यमानः । अनन्यप्रोक्ते गतिरत्र नास्ति अणीयान् ह्यतर्क्यमणुप्रमाणात् ॥ ८ ॥ सूक्षातिसूक्ष्म…
प्रथम अध्याय / द्वितीय वल्ली / भाग १ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति अन्यच्छेयोऽन्यदुतैव प्रेयस्ते उभे नानार्भे पुरुषं सिनीतः। तयोः श्रेय आददानस्य साधु भवति हीयतेऽर्थाद्य उ प्रेयो वृणीते ॥१॥ कल्याण…
प्रथम अध्याय / प्रथम वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति त्रिणाचिकेतस्त्रिभिरेत्य सन्धिं त्रिकर्मकृत् तरति जन्ममृत्यू । ब्रह्मजज्ञ। देवमीड्यं विदित्वा निचाय्येमां शानितमत्यन्तमेति ॥१७॥ त्रय बार करते जो अनुष्ठान…
कठोपनिषद – (पद्यानुवाद) मृदुल कीर्ति ॐ श्री परमात्मने नमः शांति पाठ ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्वि नावधीतमस्तु । मा विद्विषावहै । रक्षा…
ईशावास्य उपनिषद संस्कृत से हिंदी में पद्यानुवाद : मृदुल कीर्ति ॐ समर्पण परब्रह्म को उस आदि शक्ति को, जिसका संबल अविराम, मेरी शिराओ में प्रवाहित है। उसे अपनी अकिंचनता, अनन्यता…
सोहन लाल द्विवेदी“कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती” अनुवाद – हिरायुकी सातो “कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती” ハソーハン・ラール・ドヴィヴェーディー 「努力する者に決して敗北あることなし」 लहरों से डर कर नौका पार…
लेस्या उक्राईंका ( 25 फरवरी 1871 – 1 अगस्त 1913) यूक्रेनी साहित्य की अग्रणी लेखिकाओं में से एक थीं, जो अपनी कविताओं और नाटकों के लिए जानी जाती थीं। वह…
उक्राइनी से अनुवाद – यूरी बोत्वींकिन
उमाशंकर जोशी गुजराती के ऐसे वरिष्ठ साहित्यकार हैं जिन्होंने सर्जन, चिंतन, विवेचन और अनुवाद के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रदान किया है। उत्तर गुजरात के छोटे से गांव वामणा ( ईडर)…
राजेंद्र शाह आधुनिक गुजराती कविता में नवीन प्रवाह के अन्वेषक कवि माने जाते हैं। उनसे दो वर्ष की आयु में पिता की छत्रछाया छिन गई, लेकिन माता की ममता और…
गुजराती से अनुवादित अनुवादक : आलोक गुप्त —————————————————————– (1) वह पेड़ कहाँ गया बहुत वर्षों बाद गया था पाठशाला में नई खपरैल, छोटा- सा नया बाग है वहाँ दो रंगीन…
गुजराती से अनुवादित अनुवादक : आलोक गुप्त —————————————————– (1)नहीं रोकूँगी नहीं रोकूँगी वेदना का वरदान देकर भले चला जाए पिया! साज सजी खड़ी ऊँटनी को अपनी दुखी वाणी से नहीं…
मूल लेखक – व्लादिमीर व्लादिमीरोविच नाबोकोव (मूल अँग्रेज़ी से अनुवाद – प्रगति टिपणीस) इतने सालों में चौथी बार वे फिर इस बात पर सिर खपा रहे थे कि उस नौजवान…
व्लादिमीर व्लादिमीरोविच नाबोकोव (रूसी: Владимир Владимирович Набоков ; अप्रैल 1899 – 2 जुलाई 1977), जिसे व्लादिमीर सिरिन (Владимир Сирин) के उपनाम से भी जाना जाता है। रूसी-अमेरिकी उपन्यासकार, कवि, अनुवादक…
(मूल भाषा रूसी से अनुवाद – प्रगति टिपणीस) अख़रोट- लियोनिद निकोलायेविच आंद्रेयेव एक समय की बात है। हरे-भरे एक जंगल में एक बहुत सुंदर गिलहरी रहती थी जिसे हर कोई…
लियोनिद निकोलायेविच आंद्रेयेव (रूसी: Леони́д Никола́евич Андре́ев, 21 अगस्त 1871 – 12 सितंबर 1919) एक रूसी नाटककार, उपन्यासकार और लघु-कथा लेखक थे, जिन्हें रूसी साहित्य में अभिव्यक्तिवाद का जनक माना…
(कहानीकार – वस्येवलद गार्शिन) (रूसी भाषा से हिंदी में अनुवाद – प्रगति टिपणीस) I. – महाराजाधिराज पीटर प्रथम के आदेश पर मैं इस पागलख़ाने के मुआयने का ऐलान करता हूँ!…
वस्येवलद गार्शिन (1855-1888) रूसी साहित्यकार। वस्येवलद गार्शिन रूसी साहित्य में थोड़ा लिखकर भी अपनी एक अलग पहचान रखते हैं। “गार्शिन से अधिक प्रतिभाशाली, अधिक विख्यात और अधिक महत्त्वपूर्ण लेखक भी…