Category: अनुवाद

2024 साहित्य के नोबेल पुरस्कार विजेता हान कांग की कविता – (कविता)

स्वीडिश एकेडमी ने साहित्य के नोबेल प्राइज 2024 की घोषणा कर दी है, और इस वर्ष यह प्रतिष्ठित पुरस्कार साउथ कोरिया की प्रतिभाशाली लेखिका हान कांग को दिया गया है।…

कवियों का स्वर्ग – (थाई कविता का हिंदी अनुवाद)

कवियों का स्वर्ग (थाईलैंड के महान कवि राजकुमार बिद्यालोंकॉर्न द्वारा रचित “सूअंक सवान छन कवी” शीर्षक थाई कविता से प्रेरित है) कवियों का स्वर्ग है अत्यंत सुन्दरजहाँ चमक रत्नों से…

स्वस्ति की रक्षा – (थाई कविता का हिंदी अनुवाद)

थाईलैंड के महान कवि सुन्दरभू और अनूदित कविता “सुन्दरभू” थाईलैंड के सबसे महान कवियों में से एक हैं। उनका जीवनकाल सन् 1786 से 1855 तक रहा था। उस समय थाईलैंड…

रावण का मन – (थाई कविता का हिंदी अनुवाद)

रावण का मन (लोबबुरीरद रचित “चाई थोसकन” शीर्षक थाईलैंड का एक लोकप्रिय गीत का हिंदी अनुवाद) मोहब्बत हुई दिल खुश हुआमोहब्बत खत्म हुई दिल दर्द हुआयाद क्यों न करतामोहब्बत से…

असंभव… – (थाई कविता का हिंदी अनुवाद)

असंभव… (फयोंग मुकदा रचित “पेन पाई माय डाय” शीर्षक थाईलैंड का एक लोकप्रिय गीत का हिंदी अनुवाद) अगर रावण की तरह मेरे दस चेहरे होंदसों चेहरों को मुड़कर तुम्हारे लिए…

हेर्ड्रिक मार्समैन की कविता – (अनुवाद)

डच कवि : हेर्ड्रिक मार्समैन अनुवाद : ऋतु शर्मा ननंन पांडे Trecht na uw vijftigste jaar Langzaam te leren,dat het goed isAls de bladeren vallenDe sterken worden danToch nog niet…

हेर्ड्रिक मार्समैन – (परिचय)

हेर्ड्रिक मार्समैन हेर्ड्रिक मार्समैन 20 वीं शताब्दी के सबसे प्रसिद्ध डच कवियों में से एक हैं उनकी कविताएँ डच साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखतीं हैं। इनका जन्म 30 सितंबर…

मनुष्य की आँख – (लोक कथा)

मनुष्य की आँख मूल भाषा : अर्मेनियन लेखक : नार दोस अनुवादक : गायाने आग़ामालयान एक बार पुराने ज़माने में एक ग़रीब आदमी को कोई चीज़ मिली। चीज़ नरम, गोल…

अर्मेनियन कवि वाहान तेरयान की कविताएँ

अर्मेनियन कवि वाहान तेरयान की कविताएँ अलविदा तुम चले जाते हो – पता नहीं कहाँ,चुप और उदास,एक विनम्र पीले सितारे की तरह। मैं चला जाता हूँ अकेला-उदासअसामयिकफूल से गिरती हुई…

वाहान तेरयान – (परिचय)

वाहान तेरयान (१८८५-१९२०) अर्मेनियन प्रसिद्ध लेखक, कवि, गीतकार, सामाजिक विचारक और राजनीतिज्ञ थे। एक कवि जिन्होंने अर्मेनियन साहित्य के विकास की प्रक्रिया घुमा दिया। वाहान तेरयान अर्मेनियन काव्य के एक…

नार दोस – (परिचय)

नार दोस असली नाम : माइकल होवनहिस्यान जन्म : 1 मार्च, 1867, तिफ्लिस में निधन : 13 जुलाई, 1933 (आयु 66 वर्ष) टिफ्लिस में नार दोस का जन्म 1867 में…

प्रथम अध्याय / तृतीय वल्ली / भाग १ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

प्रथम अध्याय / तृतीय वल्ली / भाग १ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति ऋतं पिबन्तौ सुकृतस्य लोके गुहां प्रविष्टौ परमे परार्धे । छायातपौ ब्रह्मविदो वदन्ति पञ्चाग्नयो ये च त्रिणाचिकेताः ॥…

प्रथम अध्याय / तृतीय वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

प्रथम अध्याय / तृतीय वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति महतः परमव्यक्तमव्यक्तात्पुरुषः परः । पुरुषान्न परं किंचित्सा काष्ठा सा परा गतिः ॥ ११ ॥ जीवात्मा से तो…

द्वितीय अध्याय / प्रथम वल्ली / भाग १ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

द्वितीय अध्याय / प्रथम वल्ली / भाग १ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति पराञ्चि खानि व्यतृणत् स्वयम्भू- स्तस्मात्पराङ्पश्यति नान्तरात्मन् । कश्चिद्धीरः प्रत्यगात्मानमैक्ष- दावृत्तचक्षुरमृतत्वमिच्छन् ॥ १ ॥ इन्द्रियों की बहिर्मुख वृति,…

द्वितीय अध्याय / प्रथम वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

द्वितीय अध्याय / प्रथम वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति मनसैवेदमाप्तव्यं नेह नानाऽस्ति किंचन । मृत्योः स मृत्युं गच्छति य इह नानेव पश्यति ॥ ११ ॥ शुचि…

द्वितीय अध्याय / द्वितीय वल्ली / भाग १ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

द्वितीय अध्याय / द्वितीय वल्ली / भाग १ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति पुरमेकादशद्वारमजस्यावक्रचेतसः । अनुष्ठाय न शोचति विमुक्तश्च विमुच्यते । एतद्वै तत् ॥ १ ॥ मानव शरीरी रूप पुर,ईश्वर…

द्वितीय अध्याय / द्वितीय वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

द्वितीय अध्याय / द्वितीय वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति अग्निर्यथैको भुवनं प्रविष्टो रूपं रूपं प्रतिरूपो बभूव । एकस्तथा सर्वभूतान्तरात्मा रूपं रूपं प्रतिरूपो बहिश्च ॥ ९ ॥…

द्वितीय अध्याय / तृतीय वल्ली / भाग १ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

द्वितीय अध्याय / तृतीय वल्ली / भाग १ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति ऊर्ध्वमूलोऽवाक्शाख एषोऽश्वत्थः सनातनः । तदेव शुक्रं तद्ब्रह्म तदेवामृतमुच्यते । तस्मिँल्लोकाः श्रिताः सर्वे तदु नात्येति कश्चन । एतद्वै…

द्वितीय अध्याय / तृतीय वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

द्वितीय अध्याय / तृतीय वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति यदा पञ्चावतिष्ठन्ते ज्ञानानि मनसा सह । बुद्धिश्च न विचेष्टते तामाहुः परमां गतिम् ॥ १० ॥ जब मन…

प्रथम अध्याय / द्वितीय वल्ली / भाग ३ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

प्रथम अध्याय / द्वितीय वल्ली / भाग ३ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति एतदालम्बनँ श्रेष्ठमेतदालम्बनं परम्। एतदालम्बनं ज्ञात्वा ब्रह्मलोके महीयते ॥ १७ ॥ ॐ कार आलंबन अत्युतम, श्रेष्ठतम है, परम…

Translate This Website »