शेष – अशेष : अनीता वर्मा ( कविता )

क्या होगा अगर तुम्हें जानेंगे बहुत लोग
क्या ही होगा अगर तुम सिर्फ बातें ही करोगे समझदारी की
और क्या ही करोगे जब एक बड़ी भीड़ के सामने
तुम सिर्फ बातें करोगे विख्यात होने की
और क्या ही हो सकेगा अगर तुम मोहित कर लोगे उन्हें
अपने चमत्कारिक शब्दों की चमकीली रोशनी में
उस एक दिन जब वो जान लेंगे कि बात सिर्फ
बित्ते भर की थी
जिसे तुमने यूँ ही बड़ा कर दिया था विख्यात होने को
उस एक विशेष दिन तुम हो जाओगे विख्यात से कुख्यात
या यह भी हो सकता है कि तुम कुछ नहीं रहोगे
कुछ होने की झूठी दौड़ में
मत करो ये बड़ी-बड़ी बातें या बातों के ही बतौले
कि बस ये बोलें या यह ही बोलें
भाषा की परिभाषा गढ़ने से इतर
अंतिम पड़ाव पर सिर्फ याद रखी जाएगी
तुम्हारी वो विशेष एक बात कि
फ़लाँ या अमुक अपनी बात का पक्का था

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