दिन विशेष कविता : यह करवा चौथ याद आएगा – स्मृति आदित्य

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सिनेमा विभाग में एडजंक्ट प्रोफ़ेसर हैं। उनकी यह कामकाजी स्त्री पर करवा चौथ की कविता प्रस्तुत है। – स्वरांगी साने

Smriti aaditya

क्या हुआ जो नहीं लगा पाई इस बरस मेहंदी
उनके प्रेम का रंग तो है न अब तक गाढ़ा…
क्या हुआ जो नहीं खरीदी कोई साड़ी
उनकी परवाह का पैरहन तो है न कवच बनकर…
क्या हुआ जो नहीं मिला कोई उपहार इस साल
सुबह याद से फूल तो ले ही आए थे चढ़ाने को…
सिरहाने रखे हरसिंगार और नीली अपराजिता
कितना कुछ बोल रहे थे सुबह…
मैं ही नहीं सुन पाई वो बात जो कहते रहे तुम दिन रात…
क्या हुआ जो कोई गहना नहीं मिला मुझे पिछले कई साल से….
गृहस्थी की जाने कौन कौन सी किश्तें तो तुम भर ही देते हो याद से…
उम्र किसकी लंबी है यह तो वक्त बताएगा
नौकरी की उलझन में मना करवा चौथ
किसी न किसी को कभी न कभी तो जरूर याद आएगा….

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