इंडियन ख़ाउतेन्ग, दक्षिण अफ़्रीका

Indians Gauteng, South Africa पता: De Villiers Graaff Motorway, Johannesburg, 2000, South Africa Email: info(at)igonline(dot)co(dot)za Phone: फ़ोनः 0834560665 फ़ैक्सः 0866500050 ख़ाउतेन्ग दक्षिण अफ़्रीका के 9 प्रांतों में से एक है।…

कार्मेल स्कूल, कुवैत

Carmel School Kuwait पता: Khaitan Block – 2, Area 10 P.O. Box No. 596 Safat – 13006, Kuwait. Email: cskwt1969@gmail.com Phone: +965 2472 7226 / 2472 7383 +965 2472 7553…

हिंदी शिक्षा संघ, दक्षिण अफ्रीका

Hindi Shiksha Sangh, South Africa पता: 30 Oak Ave Chatsworth, Kharwastan, South Africa-4092 Email: hss@telkomsa.net Phone: 031 401 9788 031 401 5295 हिंदी शिक्षा संघ से संपर्क कीजिए: वर्ष 1947…

अल-मनार इंटरनेशनल स्कूल, सऊदी अरब

Al-Manar International School, Saudi Arabia पता: Al-Manar International School P.O. Box 906 GM 16 Nr. Police Station Yanbu Al Bahr Kingdom of Saudi Arabia Email: info@al-manarschool.com Phone: प्रशासन विभाग :…

फीजी की भारतीय सांस्कृतिक संस्थाएँ

फीजी गिरमिट कौंसिल फीजी गिरमिट कौंसिल एक गैर-लाभकारी, सामाजिक, गैर-सरकारी संगठन है जिसे डीड ऑफ ट्रस्ट के तहत 1979 में पंजीकृत किया गया। इसकी सदस्यता में फीजी के दस भारतीय…

अमेरिकी विश्वविद्यालयों में हिंदी (२०२४ तक) की सूची

विश्वविद्यालय का नाम स्थान हिंदी शिक्षण का स्तर 1 यूनिवर्सिटी ऑफ़ कनेक्टिकट स्टॉर्स, कनेक्टिकट एलिमेंटरी, इंटरमीडिएट 2 यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया, बर्कली बर्कली, कैलिफ़ोर्निया एलिमेंटरी, इंटरमीडिएट, एडवांस्ड 3 स्टैन्फ़र्ड यूनिवर्सिटी स्टैन्फ़र्ड,…

उत्तरी अमेरिका में हिंदी शिक्षण संस्थाएँ

उत्तरी अमेरिका में हिंदी शिक्षण संस्थाएँ खोजने के लिए यहाँ क्लिक करें https://mysalta.org/south-asian-language-programs-in-north-america/

सिंगापुर में भारतीय संस्कृति के प्रसार-प्रसार के लिए प्रतिबद्ध संस्थाएँ, समूह और समुदाय की सूची

हिन्दू एंडोमेंट्स बोर्ड (Hindu Endowments Board) 1968 में पारित हिन्दू एंडोमेंट्स एक्स के तरह स्थापित एक स्वायत्तशासी संस्था है जिसके सदस्यों की नियुक्ति सिंगापुर सरकार की संस्कृति, समुदाय और युवा…

प्रथम अध्याय / तृतीय वल्ली / भाग १ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

प्रथम अध्याय / तृतीय वल्ली / भाग १ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति ऋतं पिबन्तौ सुकृतस्य लोके गुहां प्रविष्टौ परमे परार्धे । छायातपौ ब्रह्मविदो वदन्ति पञ्चाग्नयो ये च त्रिणाचिकेताः ॥…

प्रथम अध्याय / तृतीय वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

प्रथम अध्याय / तृतीय वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति महतः परमव्यक्तमव्यक्तात्पुरुषः परः । पुरुषान्न परं किंचित्सा काष्ठा सा परा गतिः ॥ ११ ॥ जीवात्मा से तो…

द्वितीय अध्याय / प्रथम वल्ली / भाग १ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

द्वितीय अध्याय / प्रथम वल्ली / भाग १ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति पराञ्चि खानि व्यतृणत् स्वयम्भू- स्तस्मात्पराङ्पश्यति नान्तरात्मन् । कश्चिद्धीरः प्रत्यगात्मानमैक्ष- दावृत्तचक्षुरमृतत्वमिच्छन् ॥ १ ॥ इन्द्रियों की बहिर्मुख वृति,…

द्वितीय अध्याय / प्रथम वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

द्वितीय अध्याय / प्रथम वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति मनसैवेदमाप्तव्यं नेह नानाऽस्ति किंचन । मृत्योः स मृत्युं गच्छति य इह नानेव पश्यति ॥ ११ ॥ शुचि…

द्वितीय अध्याय / द्वितीय वल्ली / भाग १ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

द्वितीय अध्याय / द्वितीय वल्ली / भाग १ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति पुरमेकादशद्वारमजस्यावक्रचेतसः । अनुष्ठाय न शोचति विमुक्तश्च विमुच्यते । एतद्वै तत् ॥ १ ॥ मानव शरीरी रूप पुर,ईश्वर…

द्वितीय अध्याय / द्वितीय वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

द्वितीय अध्याय / द्वितीय वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति अग्निर्यथैको भुवनं प्रविष्टो रूपं रूपं प्रतिरूपो बभूव । एकस्तथा सर्वभूतान्तरात्मा रूपं रूपं प्रतिरूपो बहिश्च ॥ ९ ॥…

द्वितीय अध्याय / तृतीय वल्ली / भाग १ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

द्वितीय अध्याय / तृतीय वल्ली / भाग १ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति ऊर्ध्वमूलोऽवाक्शाख एषोऽश्वत्थः सनातनः । तदेव शुक्रं तद्ब्रह्म तदेवामृतमुच्यते । तस्मिँल्लोकाः श्रिताः सर्वे तदु नात्येति कश्चन । एतद्वै…

द्वितीय अध्याय / तृतीय वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

द्वितीय अध्याय / तृतीय वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति यदा पञ्चावतिष्ठन्ते ज्ञानानि मनसा सह । बुद्धिश्च न विचेष्टते तामाहुः परमां गतिम् ॥ १० ॥ जब मन…

प्रथम अध्याय / द्वितीय वल्ली / भाग ३ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

प्रथम अध्याय / द्वितीय वल्ली / भाग ३ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति एतदालम्बनँ श्रेष्ठमेतदालम्बनं परम्। एतदालम्बनं ज्ञात्वा ब्रह्मलोके महीयते ॥ १७ ॥ ॐ कार आलंबन अत्युतम, श्रेष्ठतम है, परम…

प्रथम अध्याय / द्वितीय वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

प्रथम अध्याय / द्वितीय वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति न नरेणावरेण प्रोक्त एष सुविज्ञेयो बहुधा चिन्त्यमानः । अनन्यप्रोक्ते गतिरत्र नास्ति अणीयान् ह्यतर्क्यमणुप्रमाणात् ॥ ८ ॥ सूक्षातिसूक्ष्म…

प्रथम अध्याय / द्वितीय वल्ली / भाग १ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

प्रथम अध्याय / द्वितीय वल्ली / भाग १ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति अन्यच्छेयोऽन्यदुतैव प्रेयस्ते उभे नानार्भे पुरुषं सिनीतः। तयोः श्रेय आददानस्य साधु भवति हीयतेऽर्थाद्य उ प्रेयो वृणीते ॥१॥ कल्याण…

प्रथम अध्याय / प्रथम वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति

प्रथम अध्याय / प्रथम वल्ली / भाग २ / कठोपनिषद / मृदुल कीर्ति त्रिणाचिकेतस्त्रिभिरेत्य सन्धिं त्रिकर्मकृत् तरति जन्ममृत्यू । ब्रह्मजज्ञ। देवमीड्यं विदित्वा निचाय्येमां शानितमत्यन्तमेति ॥१७॥ त्रय बार करते जो अनुष्ठान…

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