Category: कविता

जंगल का कानून – (कविता)

जंगल का कानून बचपन लाचार है, यौवन मजबूरप्रौढ़ कोल्हू का बैल हो गया हैबुढ़ापा टुकड़ों पर ललचाता श्वानगलियों के आवारा कुत्ते, सफेदपोशों पर भौंकते हैंसांड स्वच्छंद विचरतेजंगल छोड़ भेड़िए, नगरों…

हँसी और मुस्कान – (कविता)

हँसी और मुस्कान हँसी और मुस्कान, दो बहिनेंएक होकर भी अलगएक ही डाल पर खिले दो फूलएक अधखिली कली, दूसरी पूरा खिला फूलएक भोर की पहली किरन-सी उजली, नाजुक, लजीलीदूसरी…

श्री गुरु नानक देव जयंती पर विशेष – (श्रद्धांजलि)

हे बाबा नानक! बहुत पुरानी बात हैयुगों पुरानी नहींबाबा नानक, चहुं दिशाएं घूमतान कोई सवारी, न कोई ठेलाअपने पांवों पर चलअपने भक्तों तक पहुंचताया जो उसकी प्रतीक्षा मेंनज़रें बिछाए रहतास्वयं…

लोग सो रहे हैं या साजिशें कर रहे हैं – (कविता)

लोग सो रहे हैं या साजिशें कर रहे हैं एक बार फिरमेरे गाँव मेंफसलों के मौसम मेंबच्चे उग आए हैंऔर मैंकलम थामे तैयार हूँकविता करने के लिए। यहाँ-वहाँ लोगया तो…

बौनों की बारात – (कविता)

बौनों की बारात झूम-झूम कर नाच रही, छायाएँ आधी रातधूम धाम से निकल रही है, बौनों की बारात सोच भी बौनी, कर्म भी बौना, मन का हर कोना है घिनौनाजो…

शब्द एक रास्ता है – (कविता)

शब्द एक रास्ता है शब्द एक रास्ता हैमेरा विश्वास हैयह सोचकर मैंने उसे पुकारापर उधर से कोई उत्तर नहीं मिला। मैंने फिर सोचाशब्द एक रास्ता हैऔर शब्दों को कागज पर…

जनमानस में राम – (कविता)

जनमानस में राम सूर्य सगर्व निरखता,सरयु-साकेत समन्त,वन्दन से वंदनवार तक,रामबाण अरिहन्त। नित्य प्रति हो सुखकारीश्रीरामकथा का श्रवण,हरें सकल हिय की व्यथाश्रीजानकी श्रीचरण। शेषनाग अवतार रूपसद्गुण शुभ लक्षण,तत्पर प्राण समर्पण कोरामानुज…

ज्योति गीत – (कविता)

ज्योति गीत हों सहस्त्र ज्योति दीप, हों सहस्त्र ज्योति कण,हों सहस्त्र ज्योति गीत, हों सहस्त्र ज्योति क्षण, थिरकते हों ज्योति स्वर, काल के अवशेष पर,महकते हों पारिजात, ज्योति रश्मि केश…

विज्ञान व्रत – (परिचय)

विज्ञान व्रत जन्म-तिथि : 17 अगस्त 1943 जन्म-स्थान : तेड़ा (मेरठ) उ प्र शिक्षा : M A ललित कला, B. Ed, डिप्लोमा — चित्रकला (राजस्थान) सम्प्रति : लेखन तथा चित्रकला…

वसन्त तो आ चुका है – (कविता)

वसन्त तो आ चुका है पक रहा है मौसमअमराइयाँ खदक रही हैं मीठी आँच परतितलियों पर मढ़ा हुआ सोनाचम-चम चमक रहा हैचंगुलों में लौट आयी हैं सुगंधियाँ;पूरे उफान पर है-नुचे…

दलदल के फूल – (कविता)

दलदल के फूल मैंग्रूव के जंगलों में छितरायीअनगढ़ और भयावनी दुनियाबदलती रहती हैहर घण्टे अपना चेहरापीछे से समन्दर भीमैदान बदल-बदल करखेलता रहता हैलहरों के खेल… सरकण्डों और मिट्टी के सहारे…

कमीज़ – (कविता)

कमीज़ कमरे की दीवार परखूँटी से झूलती कमीज़मेरी अपनी पहचान हैगोकि मसक गयी है जगह -जगह सेपर वर्षों बाद भी उतरा नहीं है इसका कड़क रंग बनिये की पुरानी उधारीऔर…

सबसे सुंदर लड़की – (कविता)

सबसे सुंदर लड़की सबसे सुंदर लड़कीकाँपती रहीलहरों में-थर-थरसिवार सी,सिहरती रहीआर्द्र दूब परनंगे पाँव। तिनके-तिनकेबहती रहीबारिशों मेंवक्त बे वक़्त;फेरती रहीआँख-हर मुस्कुराहट से,खींचती रहीहाथ-दोस्तों के हाथों से,डरती रही-परदेसी आसमानों से,प्रेमविह्वलपंछियों से। सबसे…

स्त्रियाँ – (कहानी)

स्त्रियाँ स्त्रियाँ पागल रहती हैं-किसी न किसी प्रतीक्षा में;यही नहीं कि बाहर गये लोग कब लौटेंगे वापसया कब कोई अतिथि दे देगा दस्तक द्वार परबल्कि स्त्रियाँ कुछ-कुछ पंछियों की तरह…

झिमिर झिम- झिम… – (कविता)

झिमिर झिम- झिम… जोड़ टूटे, बंद टूटे,बदलियों के छंद टूटे झिमिर झिम- झिम…झिमिर झिम- झिम… प्रात सावन, रात सावन,गूँध प्यासे गात सावन,पड़ गयी छोटी यवनिका-और रेशम कात सावन, झिमिर झिम-…

कोए से दिन – (कविता)

कोए से दिन फिर आएरेशम केकोए से दिन … धूप की नदीजैसेपिघला पीला संगमरमर,छायाएँलगी काँपनेडोंगियों सी ज़मीन पर,पानी-सा मन –सोने के साँपों के पोए से दिन… हर सम्मोहनटूटासूरज का जैसे…

मेघ ये आषाढ़ के – (कविता)

मेघ ये आषाढ़ के मेघ ये आषाढ़ के… बाँध कर साफे धुले, एक- सी लय में खड़े, ये चलें तो- आसमानी फर्श- फाहे सा उड़े, छतरियाँ सिर पर धरे, धूप…

वे बोलेंगे… – (कविता)

वे बोलेंगे… वे बोलेंगे…जिन कण्ठों में स्वर सच्चे हैं –वे बोलेंगे …जिनके सीने भीग रहे श्रम के पानी से,जिन आँखों में कच्ची मिट्टी के सपने हैं,इन्तजार में जो हैं –कब…

किरनों के मोरपंख – (कविता)

किरनों के मोरपंख किरनों के मोरपंखधूप लगी नोचने,चिड़ियों कोदर्द दिये-चिड़िये की चोंच ने… कागज़ की रोटियाँपंजों से बेल कर –कैसे फुसलायेगी ?पकड़ेगी हर शिकार –किधर खेल-खेलकर ?माथे पर –बल डाले-शाम…

सागर के तट पर – (कविता)

सागर के तट पर सागर की पारदर्शी देह पर थिरकती हैंरहस्य और रोमांच से आह्लादित लहरेंरेतीली जमीन पर लिखती हैंप्रेम की अमिट कहानियां…समर्पित होने से ठीक पहलेआवेग से आती हैंपुरजोर…

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