Category: कविता

रुद्रावतार – (कविता – महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष प्रस्तुति)

रुद्रावतार भगवान भुवन-भास्कर का मुख झलका पूरब की दिशा हुई रक्तिमलहरियाँ उठीं मद्धिम-मद्धिम शिव समाधिस्थ थे, ध्यान कलश छलका भगवान भुवन-भास्कर का मुख झलका देखा__धर्म की ध्वजा है जीर्ण-शीर्ण अहसास…

सबके अपने अपने राम – (कविता)

सबके अपने अपने राम (आल्हा छंद) मुल्ला पंडित सिक्ख मसीहा, नाना पंथ अनेकों नाम।सभी धर्म का मूल एक है, किंतु सभी के अपने राम॥ हर रजकण में राम व्याप्त हैं,…

शब्दों की वेणी – (कविता)

शब्दों की वेणी (दोहावली) शब्दों की वेणी सजा, रचें नव्य प्रतिमान।गद्य पद्य हो या ग़ज़ल, सुन्दर बने सुजान॥ नव्य नवल नूतन प्रखर, रचना रचें महान।ताल छंद सुर से सजी, जाने…

सुखद सुहाना भोर – (कविता)

सुखद सुहाना भोर (शृंगार छंद) हुआ अब सुखद सुहाना भोर।अरुण झांके प्राची के छोर॥यामिनी भाग गयी निज धाम।प्रात किरणें निकली अविराम॥ विहग नित कलरव में हैं मग्न।दृश्य सुन्दर मनभावन लग्न॥भृंग…

नवोन्मेष नवतान लिखें – (कविता)

नवोन्मेष नवतान लिखें (लावणी छंद) नये विचारों को संचित कर,आओ नवल विहान लिखें।नव पीढ़ी हो नूतन पथ पर प्रगतिशील पथगान लिखें॥नए विचारों से सजधज करनूतन गीत विधान लिखें।नूतन पंक्ति उक्ति…

होने ना होने के बीच – (कविता – अनुवाद – पंजाबी)

मूल कविता : अनीता वर्मा अनुवादक : डॉ चरनजीत सिंह होने ना होने के बीच ज़िन्दा होना ही तो काफ़ी नहींअपने तमाम वजूद को करना पड़ता है साबितकहना पड़ता है…

जब कभी जाऊँगा पृथ्वी से – (कविता)

जब कभी जाऊँगा पृथ्वी से सोचता हूँजब कभी जाऊँगा पृथ्वी सेक्या ले जाऊँगा अपने साथ सफलताएं छूट जाएंगी यहींदेह के मैल की तरह यदि उन्हें मान लें इत्रतो भी वे…

धीरे-धीरे रीतती है करूणा – (कविता)

धीरे-धीरे रीतती है करूणा धीरे -धीरे रीतती है करूणाधीरे-धीरे संवेदनाएं बदलने लगती हैं प्रस्तर मेंधीरे-धीरे सूख जाती है भावुकता की नदीधीरे-धीरे मनुष्य परिवर्तित हो जाता है किसी यंत्र में धीरे-धीरे…

नियम की तरह – (कविता)

नियम की तरह वे लोग जिनसे मिले बिना शाम ढलती ही नहीं थीउदास बैठ जाती थी गुलमोहर की किसी नर्म शाख परलगता था जैसे ये न होंगे तो कैसे कटेगा…

बनारस एक जीवित संस्कृति है सबसे अलहदा – (कविता)

बनारस एक जीवित संस्कृति है सबसे अलहदा मेरा बनारस वह नहीं है जो बहुत सी कविताओं में हैवह भी नहीं जिसका ज़िक्र किया करते थे मित्र बातचीत मेंकभी हँसते हुए…

मृणाल कांति घोष के जादुई जूते – (कविता)

मृणाल कांति घोष के जादुई जूते जब भी पहनता हूँ जूतामुझे मृणाल कांति घोष के वे जूते याद आते हैंजिन्हें सन् 1997 के अक्टूबर में पहनकर गया था मैंनौकरी का…

तुम सुखी रहना – (कविता)

तुम सुखी रहना आज फिर तुम्हारी याद आई! चली पुरवाई उभरा घावपर सोचता हूँक्या तुममें बचा होगा कोई भावअब भी होगा मिलने का चावया भूल चुकी होगी तुम अतीत का…

अछूते राग – (कविता)

अछूते राग सर्दियाँ आ गईंतुम कहाँ हो? लोग घूम रहे हैं रंगरेज बनेखुद भी रंगे दूजे को रंगेसड़कें अटी पड़ी हैं लोगों सेचेहरे पर चेहरे चिपके हैं कभी लगे है…

आज मिलेंगे – (कविता)

आज मिलेंगे तुम मिलोगे तो कहाँ से शुरू होगी हमारी बातचीत?सूरजकुण्ड सिटी हॉल्ट की हलचल भरी शामों सेया किसी उदास दोपहरी सेजब 32/3 बहस कार्यालय में हम बिना दूध की…

प्राथमिकता का व्याकरण – (कविता)

प्राथमिकता का व्याकरण बहुत जटिल होता है प्राथमिकता का व्याकरणवैसे यह निर्भर करता है व्यक्ति-व्यक्ति पर कुछ लोग अपना अर्जित सब कुछ गँवा देते हैंपर नहीं बदलते प्राथमिकताकुछ बदल लेते…

नए सुख के पास जादुई धूल होती है विस्मृति की – (कविता)

नए सुख के पास जादुई धूल होती है विस्मृति की नए सुख में होती है मादकताअफीम से ज़्यादा नया सुख आता हैऔर मनुष्य बहुत कुछ भूल जाता हैकई बार तो…

अनुत्तरित प्रश्न – (कविता)

अनुत्तरित प्रश्न बच्चे आजकल बहुत प्रश्न करते हैंमाँओं के पास उत्तर नहीं हैंपिता से पूछो तो झल्लाते हैंप्रश्न पूछने को बेवकूफी बताते हैंअध्यापकों के पास, हर प्रश्न केकुछ रेडीमेड उत्तर…

फूल खिल रहा है – (कविता)

फूल खिल रहा है वहाँ बगीचे में फूल खिल रहा हैनहीं, फूल हँस रहा हैफूल खुशियाँ बाँट रहा हैसुगंध लुटा रहा हैफूल शुभकामनाओं के रंग छलका रहा हैउमंगों के इंद्रधनुष…

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