क़तआत ( ग़ज़ल ) : बालस्वरूप ‘राही’
क़तआत ( ग़ज़ल ) : बालस्वरूप ‘राही’ 1. जानता हूँ कि ग़ैर हैं सपनेऔर खुशियाँ भी ये अधूरी हैंकिंतु जीवन गुज़ारने के लिएकुछ ग़लत फ़ेहमियाँ ज़रूरी हैं 2. हसरतों की…
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क़तआत ( ग़ज़ल ) : बालस्वरूप ‘राही’ 1. जानता हूँ कि ग़ैर हैं सपनेऔर खुशियाँ भी ये अधूरी हैंकिंतु जीवन गुज़ारने के लिएकुछ ग़लत फ़ेहमियाँ ज़रूरी हैं 2. हसरतों की…
लगे जब चोट सीने में हृदय का भान होता है ( ग़ज़ल ) : बालस्वरूप ‘राही’ लगे जब चोट सीने में हृदय का भान होता हैसहे आघात जो हँसकर वही…
अचानक दोस्ती करना, अचानक दुश्मनी करना ( ग़ज़ल ) : बालस्वरूप ‘राही’ अचानक दोस्ती करना, अचानक दुश्मनी करनाये उसका शौक है यारों सभी से दिल्लगी करना सभी जज़्बात को दीवानगी…
अक़्ल ये कहती है, सयानों से बनाए रखना ( ग़ज़ल ) : बालस्वरूप ‘राही’ अक़्ल ये कहती है, सयानों से बनाए रखनादिल ये कहता है, दीवानों से बनाए रखना लोग…
जो बात मेरे कान में ख़्वाबो ने कही है ( ग़ज़ल ) : बालस्वरूप ‘राही’ जो बात मेरे कान में ख़्वाबो ने कही हैवो बात हमेशा ही ग़लत हो के…
उनके वादे कल के हैं ( ग़ज़ल ) : डॉ. बालसरूप राही उनके वादे कल के हैंहम मेहमाँ दो पल के हैं । कहने को दो पलके हैंकितने सागर छलके…
ज्ञान – ध्यान कुछ काम न आए ( ग़ज़ल ) : डॉ. बालस्वरूप ‘राही’ ज्ञान ध्यान कुछ काम न आएहम तो जीवन-भर अकुलाए । पथ निहारते दृग पथराएहर आहट पर…
© विनयशील चतुर्वेदी ग़ज़ल युँ ढल कर शाम का सूरज सुबह ऐसे निकलता है।किसी दुल्हन की घूंघट से वदन जैसे झलकता है मुहल्ला आशिक़ों का है यहाँ आना बहुत धीमेकिसी…
© विनयशील चतुर्वेदी ग़ज़ल आँखों में ज़रूरी है ग़ैरत औ हया होना।।वादों में ज़रूरी है इक अहले वफ़ा होना।। तुम प्यार के खेतों में बारूद उगाते होतुम भूल गए शायद…
© विनयशील चतुर्वेदी ग़ज़ल रहते हैं किस तौर यहाँ पर हाल न पूछोमिलती है किस भाव यहाँ पर दाल न पूछो आत्महत्या पर खेतिहर की भी साहब जीहंसते हैं कि…
ग़ज़ल वाबस्ता हैं सब जिससे, ज़ंजीर है तारों कीहँसना कभी रोना भी तक़दीर है तारों की क्या ख़ूब फ़लक पर ये तहरीर है तारों कीलैला है या शीरीं है या…
विज्ञान व्रत की ग़ज़लें -एक- मैं था तनहा एक तरफ़और ज़माना एक तरफ़ तू जो मेरा हो जातामैं हो जाता एक तरफ़ अब तू मेरा हिस्सा बनमिलना-जुलना एक तरफ़ यों…
राजीव श्रीवास्तव की ग़ज़लें -एक- पानी पानी धूप बिछी है, पाँव न रख, जल जायेंगे।हँस-हँस कर मिलने आये हैं, रो कर बादल जायेंगे। पुरखों की थाती यदि आँगन से विस्थापित…