गांधी, काका कालेलकर और हिंदी – (विचार स्तंभ)
गांधी, काका कालेलकर और हिंदी – अतुल कुमार गांधी जी जब गुजरात बस गए तो वहां जैसे जीवन जाग उठा। राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने ‘गुजरात राजकीय परिषद’ की स्थापना की। गांधी…
हिंदी का वैश्विक मंच
गांधी, काका कालेलकर और हिंदी – अतुल कुमार गांधी जी जब गुजरात बस गए तो वहां जैसे जीवन जाग उठा। राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने ‘गुजरात राजकीय परिषद’ की स्थापना की। गांधी…
कविता में तो दर्द बहुत है कवि में पता नहीं कितना अच्छा जीवन-स्तर धुले वस्त्र चश्मे का सही नंबर, फ्रेम सुंदर लेकिन भीतर आँखें नम उनके लिए जिन्हें कपड़ा भी…
यदि आप समय रहते अपने बच्चों की अनुचित माँगों और इच्छाओं पर नियंत्रण नहीं रखते तो आप जीवन में असहाय हो जाएँगे… "कौरव" आप कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों,…
दक्षिण एशिया में भाषाओं के विकास पर पेगी मोहन की अंतर्दृष्टि ~ विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र भूमिका:भाषाओं का विकास किसी समाज के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक बदलावों का सजीव प्रतिबिंब…
ग्रोक (Grok xAI) से बातचीत ~ विजय नगरकर आजकल सोशल मीडिया पर कृत्रिम बुद्धि आधारित ग्रोक (Grok xAI) की भाषा और उत्तर देने की शैली पर बहुत चर्चा हो रही…
हिन्दी-अंग्रेज़ी अनुवाद कार्यशाला रिपोर्ट – डॉ जयशंकर यादव वैश्विक हिन्दी परिवार द्वारा सहयोगी संस्थाओं के तत्वावधान में अनुवाद की गुणवत्ता और महत्ता के मद्देनजर रविवारीय कार्यक्रम के अंतर्गत 23 मार्च…
संस्कारों के अंतर – अजेय जुगरान अनाहिता एक संवेदनशील, बुद्धिमान,पढ़ी-लिखी और देश – विदेश अच्छी तरह से घूम चुकी तैराक थी। वह अच्छे परिवार में पैदा हुई मुंबई की एक…
मनाली के इग्लू (पहला दिन – 21 जनवरी 2021) मनोज श्रीवास्तव ‘अनाम’ इस्माईल मेरठी का वही शे’र ख़ुद को बारम्बार आकर्षित करता रहा है, जिसने केदार मिश्र को राहुल सांकृत्यान…
मनोज श्रीवास्तव ‘अनाम’ जन्म : नवंबर 1983 (बहराइच, उ० प्र०) रचनाएँ : शे’र, कविता एवं कथेतर साहित्य में सृजनरत प्रकाशन : शाम और तन्हाई (दो लाइना इश्क़) शे’र संग्रह आगामी…
वारंगल के ध्वंसावशेषों में – डॉ वरुण कुमार “यहाँ कैसे आए, कोई काम था?” “नहीं, मैं तो यहाँ घूमने आया हूँ।” “यहाँ!” उनकी आँखों में हैरानी थी। “यहाँ क्या है?”…
हाल ही में एक महत्वपूर्ण साहित्यिक घटनाक्रम में, प्रख्यात हिंदी लेखक विनोद कुमार शुक्ल को प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। यह पुरस्कार न केवल…
डॉ. एच. बालसुब्रहमण्यम : एक बहुआयामी साहित्यिक व्यक्तित्व ~ विजय नगरकर डॉ. एच. बालसुब्रहमण्यम हिंदी साहित्य और अनुवाद के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम हैं। वे लेखन, अनुवाद, संपादन और…
आज के दिन विभूति विशेष के नाम : हनुमान प्रसाद पोद्दार – डॉ जयशंकर यादव 22 मार्च 1971 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और आध्यात्मिक विभूति हनुमान प्रसाद पोद्दार का निधन। उन्होंने…
मराठी-फारसी राज्य व्यवहार कोश की संक्षिप्त जानकारी ~विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी महाराज ने राज्य व्यवहार कोश मराठी में जारी किया था। इसके पीछे का इतिहास इस प्रकार है:…
यूक्रेन रूस युद्ध में भाषा विवाद का बारूद ~ विजय नगरकर यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे संघर्ष में भाषा विवाद एक महत्वपूर्ण और जटिल पहलू है, जो दोनों…
नीदरलैंड में भारत प्रेम – प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी मुझे मार्च 2005 में नीदरलैंड (हॉलैण्ड) जाने का अवसर मिला। मेरी नीदरलैंड यात्रा के विचार का शुभारंभ जून 2004 में फ्री…
प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी लेखक वर्तमान में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली के निदेशक हैं. पूर्व में इतिहास के प्रोफेसर रहे हैं। इनके इतिहास और मिथक से…
‘कोरोना-चिल्ला’ कहानी-संग्रह – अनिल जोशी प्रवासी साहित्य में एक सशक्त भूमिका निबाह रही दिव्या माथुर का नवीनतम कहानी संग्रह, कोरोना-चिल्ला, केन्द्रीय हिंदी संस्थान-आगरा की पुस्तक प्रकाशन परियोजना के तहत प्रकाशित…
हिंदी@स्वर्ग.इन कमल किशोर गोयनका दिव्या माथुर इंग्लैंड के प्रसिद्ध हिंदी रचनाकारों में से एक हैं। उनकी रचनात्मकता के कई आयाम हैं —कविता, कहानी, नाटक, अनुवाद, फिल्म, गीत, गज़ल, रेडियो एवं…
महात्मा गांधी और हिंदी – अतुल कुमार प्रभाकर अंग्रेजों ने भारत में अपनी पैठ बनाने के लिए हिंदुओं की पीठ पर हाथ रखा और कहा कि मुसलमान तो बाहर से…