पछतावा – डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ ( व्यंग्य )
पछतावा – डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ ( व्यंग्य ) शहर के सबसे बड़े मल्टी-स्पेशालिटी अस्पताल के आईसीयू वार्ड के बाहर वेटिंग एरिया में एक अजीब सी गंध थी फिनाइल…
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पछतावा – डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ ( व्यंग्य ) शहर के सबसे बड़े मल्टी-स्पेशालिटी अस्पताल के आईसीयू वार्ड के बाहर वेटिंग एरिया में एक अजीब सी गंध थी फिनाइल…
दृश्य: वर्षा – डॉ. शैलजा सक्सेना ( कविता ) आज धूप की मुठ्ठी बाँधेसूरज बादल पीछे दुबकाऔर हवा की बन आई हैघर-घर जा कर चुगली करती। सूरज व्याकुल देख रहा…
नेपाल में अंतरराष्ट्रीय संबंध बना सम्मान का सेतु ई त खबर ना,इतिहास बनत बा।भोजपुरी विरासत और कला संस्कृति को 25 वर्षों से लगातार अंतरराष्ट्रीय फलक पर स्थापित करने पर नेपाल…
“पुष्पा सिन्हा के उपन्यास ‘जेल समाधि’ का गरिमामय विमोचन” दिनांक 16.05.2026 को नई दिल्ली के आईटीओ क्षेत्र में स्थित हिन्दी भवन के सभागार में केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, शिक्षा मंत्रालय, भारत…
“साख पर बट्टा”- डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ उस दिन घर के स्टोर-रूम के सबसे अंधेरे कोने में, जहाँ मकड़ियों ने अपनी नई रियासत बसाई थी, एक दिल दहलाने वाला…
“धूप छांव”- डॉ. नीना छिब्बर सुख के संग दुख मुस्कान के साथ ऑंसू आशा के संग निराशा गीत की धुन में खामोशी मंजिल की राह में रूकावटें विजय के संग…
“एक साँस”- डॉ. शैलजा सक्सेना साँसों की भीड़ मेंएक साँस है,सब साँसों को साँस बनातीजैसे वो साँस नहींएक पेड़ हो ऑक्सीज़न का! जब दिन की भाग–दौड़ में साँसें शोर मचाती,सब…
“रफ़ी के सुरों में गूंजती गाडगिल की आवाज़”- स्वरांगी साने ‘दुःख-सुख की हर एक माला, कुदरत ही पिरोती है’ सन् 1981 की फ़िल्म ‘कुदरत’ का यह गीत है, जिसे आर.डी.…
“स्नेहिल आत्मीय मिलन कार्यक्रम सम्पन्न” दिनांक 24 मई 2026 “स्नेहिल आत्मीय मिलन कार्यक्रम” आयोजित हुआ , यह अत्यंत आत्मीय, सौहार्दपूर्ण एवं यादगार रहा। सभी वरिष्ठ लेखक, कवि एवं कवयित्रियों की…
हिन्दी पत्रकारिता द्विशताब्दी महोत्सव
उमरावनगर में कुछ दिन – व्यंग्य बकरी, मुर्गी, और फटी कमीजें बस में जहाँ मैं बैठा था, वहाँ बकरी न थी, मेरे पास बैठे आदमी की गोद में सिर्फ मुर्गी…
प्रेम की बिरादरी – व्यंग्य उनका सबकुछ पवित्र है । जाति में बाजे बजाकर शादी हुई थी । पत्नी ने 7 जन्मो में किसी दूसरे पुरुष को नहीं देखा ।…
सूखी आँखों का गीला दर्शन : ( व्यंग्य ) सेकंड क्लास के स्लीपर कोच में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो हम भारतीय रेल के डिब्बे में नहीं, बल्कि…
इंटरनेट की सड़क पर – ( कविता ) हमने इंटरनेट की भीड़-भरी सड़क पर ढूँढ ही लिया एक छोटा-सा कोना, बतियाने के लिये। अब परीक्षा है हमारी कि बिना चेहरा…
मातृ दिवस : स्प्रिंगडेल ब्रांचलाइब्रेरी, ब्रैंपटन में राइटर्स गिल्ड ( कैनेडा ) विशेष कार्यक्रम सम्पन्न मातृ दिवस के अवसर पर 16 मई 2026 की दोपहर 1:00 से 4:00 तक स्प्रिंगडेल…
वात्सल्य वार्षिकोत्सव : डॉ. कविता मल्होत्रा – “भारत भाग्य विधाता” तथा “संस्कारों की उड़ान” कृति का लोकार्पण एवं सम्मान समारोह सम्पन्न दिनांक 17 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित बंग…
वात्सल्य वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में डॉ कविता मल्होत्रा की दो नवीनतम कृतियों “भारत भाग्य विधाता” तथा “संस्कारों की उड़ान” के लोकार्पण एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन सम्पन्न कार्यक्रम की…
पछतावा (व्यंग्य) शहर के सबसे बड़े मल्टी-स्पेशालिटी अस्पताल के आईसीयू वार्ड के बाहर वेटिंग एरिया में एक अजीब सी गंध थी फिनाइल और मरती हुई उम्मीदों का कॉकटेल। सुमित वहां…
खादी पंखों वाली आत्मा (व्यंग्य) सत्ता की रीढ़ जितनी लचीली होती है, चापलूसी के सुर उतने ही मधुर सुनाई देते हैं। उस दोपहर महामहिम की कचहरी में एक ऐसी ही…
स्टैप्लर (व्यंग्य) बजाज साहब की मेज पर वह बिल्कुल आखिरी कोने में पड़ा रहता था। एक ऐसा अनाम कैदी, जिसकी तरफ कोई मुस्कुराकर देखता भी नहीं था। क्रोमियम की उसकी…