Category: विधा

भीतरी तहों में – (कहानी)

-चाय पियोगी? आयशा हैरान कि यह कौन पूछ रहा! -???- उसने प्रश्न चिन्ह भेज दिए। -सॉरी! गलती से आ गया सन्देश आपके पास। 🙂 – उसने स्माइली भेज दी और…

ब्रोचेता एस्पान्या – (कहानी)

“सिगरेट मुक्त तुम्हारी उँगलियाँ देखना मुझे ज्यादा अच्छा लगेगा लड़की”… उस शांत दोपहर सोफिया को ऐसा कहने से रोक न पाई खुद को। “या! इन्तेन्तो देखार दे फुमार। मी माद्रे…

नया जन्म लेना – (कहानी)

“नीको, नीको! उठो न जल्दी!” “क्या हो गया लोली? क्यों सुबह सुबह शोर कर रही हो डिअर?”, नीकोलास ने आँख जबरन खोलते हुए हैरानी से पूछा। “यहाँ आओ न! हम…

पूजा अनिल की कविताएँ

1. प्राण रिसाव हम धीरे धीरे खत्म हो रहे थे, जैसे एक बादल बूँद-बूँद बरस रहा हो- देर तक हवा में झूलने की इच्छा लिए हुए। हम कम-कम ख़्वाब देख…

जय वर्मा की कविताएँ – (कविता)

1. एक टिमटिमाता तारा तारों की छाँव में चलते-चलतेएक टिमटिमाता तारासाथ देता रहामुस्कराता हुआआँख मिचौली खेलता रहाकभी आगे की ओर दौड़ जाताकभी पीछे वह रह जाताउसका साथ मुझे अच्छा लगतावह…

सात क़दम – (कहानी)

सात क़दम -जय वर्मा “कभी हमारे भी दिन बदलेंगे। सभी लोग छुट्टियाँ मनाने दूसरे देशों में घूमने-फिरने के लिए जाते हैं और एक हम हैं कि इंडिया भी नहीं जाते!……

फिर मिलेंगे – (कहानी)

फिर मिलेंगे – जय वर्मा, ब्रिटेन “माँ मुझे अपना हीरे का कंगन और शादी की अँगूठी उतारकर दे दो। मैं घर जाकर आपके सेफ़ बोक्स में इन्हें रख दूँगी। वरना…

गुलमोहर – (कहानी)

गुलमोहर – जय वर्मा, ब्रिटेन खिड़की के बाहर झाँककर कमला ने देखा कि बगीचे में सब ओर घुप अँधेरा है। ‘माली भी आजकल मनमानी करने लगा है। अपनी मर्जी से…

स्पर्श – (कहानी)

भीषण गर्मी के मारे सबका बुरा हाल था। आख़िर कब तक कोई घर की चारदीवारी में बन्द, पंखों और कूलरों की ओट में छुपा रहता, काम-काज के लिए बाहर तो…

पेड़

टन टन टन टन। घनघनाता कानफोड़ू इमरजेंसी अलर्ट। सभी के फोन बज उठे। एक विशेष आपातकालीन संदेश फोन की स्क्रीन पर चमक रहा था- “तेज बारिश और हवाओं का मिला-जुला…

पहिए

एक ही घर में दो दुनिया, एक गतिमान और दूसरी स्थिर। व्हील चेयर में धँसी कैमिला की दुनिया में पहिए चलते लेकिन वह स्थिर रहती। हेनरी खुद भी चलता और…

चेहरों पर टँगी तख्तियाँ

हल्की-फुल्की कसरत करते हुए वह रोज मिलती थी। सुबह-सवेरे खूब ताली बजाना फिर थोड़ी देर रुककर हाथ-पैर मोड़ना। शाम को पार्क में भी कभी हाथ ऊपर, कभी नीचे, कभी सीधे,…

लाश

उसकी लाश सड़क के किनारे फुटपाथ पर पड़ी मिली थी। उस लाश को पहले इन्हीं गलियों रहने वाले लोगों ने देखा था। इस इलाक़े के अधिकतर निवासी भारतीय या पाकिस्तानी…

सुबह साढ़े सात से पहले

वह साढ़े पाँच बजे से जाग रहा था। आदत है, बचपन से ही – चाह कर भी देर तक नहीं सो पाता। वह बार-बार नाईट टेबल पर पड़ी घड़ी की…

माँ

माँ की मृत्यु हुए क़रीब दो वर्ष बीत गए थे। एक दिन माँ की बहुत याद आ रही थी सोचा कि भाई-भाभी से भी मिल आऊँगी और भैया भी बीमार…

पिता जी का प्यार

पौ फटते ही चिड़ियों की चहचहाट शुरू हो गई। मेरी खिड़की के एक कोने में चिड़िया ने अपना घोंसला बना रखा था। छोटे-छोटे बच्चे चूँ-चूँ कर रहे थे। थोड़ी देर…

एक और विदाई

विमला आठ भाई बहनों में सबसे छोटी थी। माता पिता के पास धन का अभाव होने के कारण चाहते हुए भी विमला को बारह कक्षा पूरी होने के बाद पढाई…

विज्ञान और कला : एक अध्ययन

अमरीका में या कैनेडा में रहना अलग बात है और भारत में रहना अलग। इससे भला कौन न सहमत होगा। जो न होगा वो मूर्ख कहलायेगा और मूर्ख कहलाना किसी…

बेबी, खाना खा लिया?

से हाऊस वाईफ़ होती हैं, याने कि वो महिला जिसकी ज़िम्मेदारी घर सँभालना रहती है मसलन खाना बनाना, कपड़े धोना एवं घरेलू कार्य करना। वह कहीं काम पर नहीं जाती…

कड़वी निंबोली

माँ की धुँधली सी तस्वीर उसके मानस पटल पर अंकित है। साफ़-साफ़ तो नहीं याद, जब माँ गुज़री तब वो बहुत छोटा था। रात माँ के बाजू में ही दुबक…

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