Category: विधा

हिन्दी प्रचारिणी सभा की आवश्यकता

जब एक भारतीय अपना देश छोड़ता है और किसी भी नये देश में जाकर एक नये वातावरण में अपना जीवन पूर्ण रूप से प्रारम्भ करता है। अपने परिजनों से दूर,…

हाइकु – रमा पूर्णिमा शर्मा

1 गुड़िया नहीं अब कोई औरत समझें सब नहीं खिलौना न ही कठपुतली आज की नारी सारे आदेश नहीं मानेगी अब जान लो तुम जागी है नारी पढ़ेगी अब बेटी…

कालिदास की वैज्ञानिक दृष्टि और उनका राष्ट्रीय क्षितिज – (आलेख)

कालिदास की वैज्ञानिक दृष्टि और उनका राष्ट्रीय क्षितिज – कमलाकांत त्रिपाठी याद हो कि न याद हो: कालिदास की वैज्ञानिक दृष्टि और उनका राष्ट्रीय क्षितिज पुराणमित्येव न साधु सर्वं न…

कहत कबीर सुनो भई साधो

हिंदी के संत साहित्य में कबीर का अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है। चार प्रमुख भक्त कवियों में कबीर सबसे पहले आते हैं। भक्ति काल का समय मुहम्मद बिन तुगलक से शुरू…

ये दुनिया-वो दुनिया

वर्मा जी बहुत परेशान हैं। उनके छठे कहानी संकलन पर एक बड़ी गोष्ठी ज़ूम पर आयोजित की जा रही है और उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि वे कल…

उसका जाना

बेला हैरान थी, माँ को यूँ जार-जार रोते उसने कभी नहीं देखा था। कभी-कभी घर के कोनों में छुप कर माँ सुबक तो लेती थी पर इस तरह किसी अजनबी…

फूल और माली

कुछ दिनों में मुझे कैनेडा आए एक साल पूरा हो जाएगा, पिछले साल जनवरी में, मैं सपरिवार इंडिया में था। कैनेडा गमन होने वाला था इस लिए माँ-डैड से मिलने…

कोरोना की डायरी का पन्ना

मेरा नाम कोरोना है। मेरे इस नाम को सुनकर कुछ लोग तो यही सोचकर ख़ुशी के मारे चहकने लगे होंगे कि अब उन्हें इसी कोरोना नाम की दुनिया की मशहूर…

टैक्सी ड्राईवर का एक दिन

यूँ तो मेरा टैक्सी चलाने का समय दुपहर १२ बजे से शुरू होकर सुबह के चार बजे तक होता है, लेकिन उस दिन शहर में एकाएक बसों की हड़ताल होने…

प्रोफ़ेसर आदेश जी- एक संस्मरण

जुलाई १९९४ में हिंदी परिषद् (टोरोंटो), हिंदी लिटरेरी सोसाइटी (ओटवा) एवं अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (यू.एस.ए.) द्वारा यॉर्क यूनिवर्सिटी (टोरोंटो) में एक अंतर्राष्ट्रीय हिंदी अधिवेशन का आयोजन बड़ी सफलता पूर्वक सम्पन्न…

स्पेस

“बड़े दुख से गुज़री हो तुम, है न? सच बड़ा कठिन समय रहा होगा”। उसे नहीं चाहिये थी सहानुभूति । “साइको थेरैपी” के लिये कई जगह जा चुकी थी वह।…

पाव भर सच

जल्दबाज़ी में यूँही, स्कूटर को आड़ा-टेड़ा खड़ा करके, तेज़ क़दमों से राकेश बढ़ा और सड़क के कोने पर छोटी सी फलों की छबड़ी लगाए लड़के से बोला, “अरे भईया, ज़रा…

मैं, श्यामली

आज सभी प्रदर्शनी की तैयारी में जुटे हुए हैं। एक कोलाहल सा मचा हुआ है। नहीं नहीं! हम कहीं बाहर प्रदर्शनी देखने नहीं जा रहे हैं, प्रदर्शनी यहीं है, हमारे…

देहरी

आज नेहा के ऑफ़िस का वार्षिक उत्सव था। उसने अपने आप को आख़िरी बार आईने में निहारा- गुलाबी बनारसी साड़ी और उसपर सोने, मोती का हार व झुमके– वह बेहद…

बोझ उतर गया

अंबिका कई दिनों से सोच रही थी कि ड्राइंग रूम की शोभा बढ़ाती काँच की अलमारी में सजी मूल्यवान क्रोकरी पर जमी धूल की सतह वह पुनः साफ़ करे। वह…

उलझन

जैसे ही सीमा ने घर में क़दम रक्खा उसकी घबराई हुई माँ ने कहा, “मैं तो फ़िक्र के मारे मर ही गई थी बिटिया इतनी देर कर दी तूने पर…

तिकड़ी…

आजकल मेरे स्कूल के दो क्लास्मेट याद आते हैं… वीक्टर और आलेक्स। ऐसा नहीं हैं कि मेरे बहुत पक्के मित्र थे, किंतु किशोरावास्था के एक दौर में काफ़ी करीब हो…

गरिमा…

उस साल अपना पर्यटक-दल कश्मीर-लद्दाख की यात्रा में ले गया था… भारतीय मित्र तक मना कर रहे थे। दल में थीं मेरी पांच छात्राएँ, मेरी एक मौसेरी बहन, एक छात्रा…

कौवे का न्याय…

आइना नम्बु नुंग्शी… – मैं बोला जब वह मिली थी गली में… मणिपुरी में मुझसे “मैं तुमसे प्यार करता हूँ” सुनकर शर्माकर भाग गई… स्वभावतः वह घबराई। मणिपुर से मध्य-भारतीय…

काग़ज़ के फूल

मेरे घर की खिड़की में चीड़-पेड़ों का उपवन दिखता है… उसी के पीछे से सूर्योदय होता है… किसी ने कहा है कि सूर्य कभी भेदभाव नहीं करता है, भलों-दुष्टों को…

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