Category: विधा

मैं, श्यामली

आज सभी प्रदर्शनी की तैयारी में जुटे हुए हैं। एक कोलाहल सा मचा हुआ है। नहीं नहीं! हम कहीं बाहर प्रदर्शनी देखने नहीं जा रहे हैं, प्रदर्शनी यहीं है, हमारे…

देहरी

आज नेहा के ऑफ़िस का वार्षिक उत्सव था। उसने अपने आप को आख़िरी बार आईने में निहारा- गुलाबी बनारसी साड़ी और उसपर सोने, मोती का हार व झुमके– वह बेहद…

बोझ उतर गया

अंबिका कई दिनों से सोच रही थी कि ड्राइंग रूम की शोभा बढ़ाती काँच की अलमारी में सजी मूल्यवान क्रोकरी पर जमी धूल की सतह वह पुनः साफ़ करे। वह…

उलझन

जैसे ही सीमा ने घर में क़दम रक्खा उसकी घबराई हुई माँ ने कहा, “मैं तो फ़िक्र के मारे मर ही गई थी बिटिया इतनी देर कर दी तूने पर…

तिकड़ी…

आजकल मेरे स्कूल के दो क्लास्मेट याद आते हैं… वीक्टर और आलेक्स। ऐसा नहीं हैं कि मेरे बहुत पक्के मित्र थे, किंतु किशोरावास्था के एक दौर में काफ़ी करीब हो…

गरिमा…

उस साल अपना पर्यटक-दल कश्मीर-लद्दाख की यात्रा में ले गया था… भारतीय मित्र तक मना कर रहे थे। दल में थीं मेरी पांच छात्राएँ, मेरी एक मौसेरी बहन, एक छात्रा…

कौवे का न्याय…

आइना नम्बु नुंग्शी… – मैं बोला जब वह मिली थी गली में… मणिपुरी में मुझसे “मैं तुमसे प्यार करता हूँ” सुनकर शर्माकर भाग गई… स्वभावतः वह घबराई। मणिपुर से मध्य-भारतीय…

काग़ज़ के फूल

मेरे घर की खिड़की में चीड़-पेड़ों का उपवन दिखता है… उसी के पीछे से सूर्योदय होता है… किसी ने कहा है कि सूर्य कभी भेदभाव नहीं करता है, भलों-दुष्टों को…

यूरी बोत्वींकिन की कविताएं

फ़रिश्ता… मेरी रक्षा के लिए भेजे फ़रिश्ते, तुम हो भी क्या?.. और हो तो बस छुप जाओ तुम मेरी पीठ के पीछे – सुरक्षित रहोगे… यह जो विजेता का सेहरा…

दुआ या कुछ और . . .

“ये लो, वो गुरबख़्श भी आ गया, अब एक जन और आ जाये तो हम सारे मिल के ताश की बाज़ी लगायें,” पार्क की बेंच पर बैठे हुये जोगिंदर ने…

अस्थिकलश

टोरोंटो एअरपोर्ट से अंतराष्ट्रीय उड़ानों का सिलसिला जारी था। दोपहर के क़रीब दो बज रहे थे। दुनिया के कोने-कोने में जाने वाले यात्रियों से हवाई अड्डे का चेक-इन एरिया खचाखच…

जूता पुराण

हमारे यहाँ कई पुराण हैं, परन्तु संभवतः आप ‘जूता पुराण’ से परिचित न हों। संसार में भारत ही ऐसा अनोखा देश है जहाँ “जूतों की पूजा” की जाती है तथा…

सारा टैक्स जाता कहाँ है

मैं गणित में कमज़ोर हूँ पर मेरी सरकार गणित में महाकमज़ोर है। सरकार को गणित नहीं आता तो भी वह बड़े-बड़े जोड़ लगाती है। बिलियनों डॉलर के जोड़ लगाती है…

संस्कृति के आधुनिक संस्कार

कैनेडा और अमेरिका की ठंडी हवा में मीठी-मीठी ख़ुमारी है। प्राणवायु के साथ लोगों को मेरुआना और गाँजे के धुएँ का लुत्फ़ मुफ़्त मिलता है। यहाँ भारत जैसा भेदभाव नहीं…

अनोखा सुख

फोन की घंटी घनघनाई! गोद में खिला रही नन्ही बच्ची को पत्नी की ओर बढ़ाते हुए तिवारी जी ने रिसीवर थामा– हल्की सी प्रसन्नता घुली आवाज़ में– हैलो–अरे प्रभाकर– नमस्ते-नमस्ते,…

गैप

चाय की चुस्की लेते हुए पापा ने पूछा, “नेहा कौन सा विषय सोचा नवीं कक्षा के लिए, साइंस या कॉमर्स?” कुछ सोचते हुए नेहा बोली, “पापा, साईंस तो बिल्कुल नहीं।…

कैसे हाशिए

जैसे ही समीरा लंच से लौट कर आई उसके सेल फोन पर एक मैसेज आया। मैसेज को पढ़ते ही उसके चहेरे पर परेशानी की लकीरें उभरने लगीं। “माँ की तबीयत…

मेरे बाबूजी!

सोचते हुये बहुत समय हो गया कि बाबूजी के जीवन के विषय में कुछ लिखूँ परन्तु कहाँ से आरंभ करूँ और क्या-क्या बताऊँ उनके बारे में, यह समझ ही नहीं…

कैनडा में!

५० वर्ष से भी अधिक समय हो गया जब हम भारत व अपना परिवार तथा वहाँ के सभी बन्धन छोड़ कर यहाँ कैनेडा आ पहुँचे; आँखों में कुछ स्वप्न लिये,…

डेड एंड (कहानी संग्रह) -लेखक : पद्मेश गुप्त

पिछली सदी में भारत से ब्रेन ड्रेन के दुष्परिणाम का सुपरिणाम विदेशों में हिन्दी का व्यापक विस्तार रहा है। विस्थापित प्रवासियों के परिवार जन भी उनके साथ विदेश गये। उनकी…

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