बिल्लौची – (कविता)
बिल्लौची लड़की अब माँ है माँ रोती हुई बच्ची को चुपाती लोरी सुनाती न सोये तो डराती ‘सो जा, नहीं सोई तो बिल्लौची आ जाएगा’ बच्ची सो जाती सुबह उठती…
हिंदी का वैश्विक मंच
बिल्लौची लड़की अब माँ है माँ रोती हुई बच्ची को चुपाती लोरी सुनाती न सोये तो डराती ‘सो जा, नहीं सोई तो बिल्लौची आ जाएगा’ बच्ची सो जाती सुबह उठती…
मुखौटे पढ़ी लिखी लड़की काम पर जाती है हवाई जहाज़ उड़ाती है स्पेस शिप चलाती है बिल्डिंग्स बनाती है और टीचर बनकर जीवन कैसे जियें पाठ पढ़ाती है वो इंजीनियर…
इश्तेहार भारत हो या ऑस्ट्रेलिया यूरोप हो या अमेरिका अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस बार – बार आता है स्त्री अधिकारों के चर्चे स्वतंत्रता के नारे और नारी – मुक्ति का युद्ध…
विराम को विश्राम कहाँ! -आरती लोकेश गए दिनों कुछ संपादकीय कार्य करते हुए मुझे लगभग एक ही जैसी चीज़ें बार-बार खटकीं। कुछ रचनाएँ, शब्द संयोजन, वाक्य विन्यास और विराम चिह्न…
श्येन परों पर ठहरी हिन्दी -डॉ. आरती ‘लोकेश’ दुबई, यू.ए.ई. किसी विदेश भ्रमण के दौरान हर व्यक्ति एक विदेशी भाषा को हर समय सुनने के लिए अपने कानों को तैयार…
बाबा की धूल प्रभु मुझे नव जन्म में करना, बाबा की बगिया का फूल । और नहीं तो मुझको करना, बगिया की मिट्टी की धूल । क्यारी में पानी देते…
आधी माँ, अधूरा कर्ज़ -आरती लोकेश आज सुबह अपनी हवेली से निकल छोटी माँ की हवेली में आई तो गहमा-गहमी मची हुई थी। दोनों हवेलियों के मध्य दालान वाला एक…
पड़ोसी धर्म -डॉ. सुभाषिनी लता कुमार सुबह से रीमा का माथा ठनका हुआ था। रात उसने डेढ़ बजे तक पढ़ाई की थी और कुछ दिनों से परीक्षा के टेंशन में…
मेरी कविता कहती खामोशी की कहानी तू है मौन की अभिव्यक्ति तू सुख-दुख की मेरी सहेली है साथ तेरे हर पल नव जीवन बिन तेरे सब कुछ लगे निरर्थक निराशा…
सच्चा साथी – अंजू घरभरन विद्या रातभर पढ़ने के बाद पौ फटने पर लेटी थी।आँखे बोझिल और नींद से भारी हो चुकीं थी। मन की चिंता को छुपाते हुए माँ…
मॉरीशस वर्षों पहले भारत के कुछ लाल एग्रीमेंट पर लाये गए गिरमिटिया कुली कहलाये वे उपनिवेशी था वह काल नंबर थी एकमात्र पहचान खून-पसीना भरपूर बहाया हड्डियां भी तुड़वायीं अपनी…
ताना-बाना रानी घर के काम निपटा कर बाज़ार की ओर का रुख ले चुकी थी। घर में एक भी सब्ज़ी नहीं थी। जल्दी से घर लौटकर उसे शाम के लिए…
डॉ मृदुल कीर्ति जन्म : 07 अक्तूबर 1951 जन्म स्थान : पूरनपुर, जिला पीलीभीत, उत्तर प्रदेश, भारत शिक्षा : पीएच.डी (1991), राजनीति विज्ञान, मेरठ विश्वविद्यालय। राजनीति विज्ञान में एम.ए., आगरा…
1. चिड़िया का होना ज़रूरी है! पेड़ पर फुदकती है चिड़िया पत्ते हिलते, मुस्कुराते हैं, चिड़िया पत्तों में भरती है चमक, डाली कुछ लचक कर समा लेती है चिड़िया की…
2015.378784.Bavander-BaherBhitter
1. मैंने बिकना अभी नहीं सीखा जैसा बाज़ार का माहौल है, वैसा रंग बदलना अभी नहीं सीखा, दुःख में शामिल होकर, अपना उल्लू सीधा करना अभी नहीं सीखा, यारों का…
1. सुविधापरस्त ए.सी. वाली कार के भीतर बैठ मुरझाया-सा मन लिए जब चिलचिलाती धूप में मुस्कुराते फूल को देखा तो हैरत से भर गई मैं कि कैसे इतनी सड़ी गरमी,…