Category: कहानी

धिनाधिन…धिन… धिनाधिन… – (कहानी)

धिनाधिन…धिन… धिनाधिन… -अलका सिन्हा हल्की बरसात के बाद मौसम सुहावना हो गया था। रास्ते में बिछे सुनहले पत्तों से आती चर्र- मर्र की आवाज अस्फुट-सी कुछ कह रही थी जो…

जन्मदिन मुबारक – (कहानी)

जन्मदिन मुबारक – अलका सिन्हा बगल के कमरे से उठती हुई दबी-दबी हंसी की आवाज उसके कमरे से टकरा रही है। ये हंसी है या चूड़ियों की खनक! पता नहीं,…

चांदनी चौक की जुबानी – (कहानी)

चांदनी चौक की जुबानी -अलका सिन्हा बहुत अच्छा गाती हैं आप!”मैंने कहा तो वान्या मुस्करा दी, ”धन्यवाद, मुझे संगीत बहुत प्रिय है।” अबकी बार मैं हंस पड़ी। विदेशी मूल का…

रिहाई – (कहानी)

रिहाई –अलका सिन्हा उम्रकैद की लंबी सजा को तेरह साल में निबटा कर आज वह अपने घर के सामने खड़ा था। टकटकी लगाए वह देर तक उस दरवाजे को घूरता…

सुन्दर बाबा की कहानी – (कहानी)

सुन्दर बाबा की कहानी हाइन्स वरनर वेस्लर सुंदरपुर नामक बिल्कुल मामूली एक गांव था। वहाँ रहते थे सुंदरलालजी। मालूम होता है कि नाम इसलिये रखा गया था क्योंकि सुंदरपुर में…

गंगासागर – (कहानी)

गंगासागर नितीन उपाध्ये आज जब से डाकिया जान्हवी दीदी की चिट्ठी दे कर गया है, सारे घर का वातावरण ही बदल गया है। अम्मा तो रसोईघर में जाकर सुबह से…

दाई मां – (कहानी)

दाई मां नितीन उपाध्ये भारत के प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने जब आजादी के गुमनाम नायकों को उचित सम्मान देकर उनकी वीर गाथा आज की पीढ़ी को बताने की…

जीवन चक्र – (कहानी)

जीवन चक्र भावना कुँअर बात उन दिनों की है जब रूपा ने तीसरे बेटे को जन्म दिया। दो बेटे पहले से ही थे। दो अबॉर्शन तो पहले ही उसके ससुराल…

ख़ुद्दारी – (कहानी)

ख़ुद्दारी भावना कुँअर आज फिर शीला अपने छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लेकर काम की तलाश में सुबह-सुबह ही निकल पड़ी। पूरा दिन बच्चों को लेकर यहाँ-वहाँ भटकती रही किंतु…

रोशनी का संचार – (कहानी)

रोशनी का संचार भावना कुँअर सोसाइटी में सभी लोग नये साल के जश्न की तैयारी में जुटे थे। हर तरफ़ रंगीन कनातें तन चुकी थीं। सोसाइटी के कुछ हिस्से रंग-बिरंगी…

सुनहरी किरण – (कहानी)

सुनहरी किरण अनु बाफना रात के सन्नाटे में जीप धांय-धांय उड़ी जा रही थी…किरण ड्राइवर के पास वाली सीट पर बैठी थी। कांस्टेबल ओम प्रकाश गाडी चला रहा थे। पीछे…

झूठ अच्छे होते हैं…. – (लघु कथा)

झूठ अच्छे होते हैं …. -अनु बाफना दीदी आपने झूठ क्यों बोला? उमा ने मुँह बनाते हुए शिकायती लहज़े में कहा। क्या हो गया उमा रानी ?- स्वाति ने शरारती…

रद्दी के टुकड़े – (कहानी)

रद्दी के टुकड़े -अनु बाफना ‘पर ये अचानक ..क्या हुआ है तुमको केशवी ..?” ‘व्हाई आर यू बीइंग सो मैलोड्रामैटिक ?”- ओफ्फो…जस्ट कांट बेयर योर मूड स्विंग्स यार !-‘ इट्स…

तीन पुतले – (कहानी)

तीन पुतले विजय विक्रान्त महाराजा चन्द्रगुप्त का दरबार लगा हुआ था। सभी सभासद अपनी अपनी जगह पर विराजमान थे। महामन्त्री चाणक्य दरबार की कार्यवाही कर रहे थे। महाराजा चन्द्र्गुप्त को…

संवेदनशील मनोवृत्ति – (कहानी)

संवेदनशील मनोवृत्ति कौशल किशोर श्रीवास्तव मेलबर्न महानगर का एक चर्चित उच्च विद्यालय। आठवें वर्ष की कक्षा में प्रवीण विद्यार्थियों का समूह, तेरह-चौदह वर्ष के हमउम्र लड़के और लड़कियों की संख्या…

शिक्षक की परीक्षा – (कहानी)

शिक्षक की परीक्षा कौशल किशोर श्रीवास्तव आज शिक्षक दिवस का पुनीत अवसर था। एक ऐसा दिन जब सारा समाज शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करता है, बच्चों में ज्ञान और…

दस्तक – (कहानी)

दस्तक कौशल किशोर श्रीवास्तव मेलबर्न शहर, वर्ष 2020 का उत्तरार्ध, कोरोना वायरस महामारी का वैश्विक प्रकोप, मृत्यु की काली छाया, लोगों में दहशत, सर्वत्र लॉकडाउन, घर से पाँच किलोमीटर से…

दो पाटों के बीच – (कहानी)

दो पाटों के बीच रोहित कुमार हैप्पी रेडियो पर गीत बज रहा है और बूढ़ी हो चली भागवन्ती जैसे किसी सोच में डूबी हुई है। तीन-तीन बेटों वाली इस ‘माँ’…

चायवाला – (कहानी)

चायवाला रोहित कुमार हैप्पी गंगाधरन पहली बार भारत आया था। वैसे तो वह फीजी से था लेकिन अब कई वर्षों से न्यूज़ीलैंड में आ बसा था। यहाँ के बड़े उद्यमियों…

आ अब लौट चलें… – (कहानी)

आ अब लौट चलें… -रोहित कुमार हैप्पी स्वर्ग पाने के बाद भी एक आत्मा नाखुश थी। भूलोक के लोग अकसर स्वर्ग पाने के लिए लालायित रहते हैं लेकिन इस आत्मा…

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