अजनबी शहर में – (कहानी)
अजनबी शहर में – वंदना मुकेश मौसम आज फिर बेहद उदास था। सूरज देवता रजाई में ऐसे दुबके थे कि पूरा सप्ताह बीत गया…। यहाँ सुबह लगभग आठ बजे तक…
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अजनबी शहर में – वंदना मुकेश मौसम आज फिर बेहद उदास था। सूरज देवता रजाई में ऐसे दुबके थे कि पूरा सप्ताह बीत गया…। यहाँ सुबह लगभग आठ बजे तक…
दर्पणों की गली – वरुण कुमार “यह रात जैसे दर्पणों की गली हो और तुम एक अकेली चांदनी बनकर निकली हो…” छत की रेलिंग पर भिंचे अपने हाथ की उंगलियों…
जिन्दगी बड़ा सच – वरुण कुमार अस्पताल का गमगीन माहौल। सभी के चेहरे बुझे हुए। मृत्यु की घटना के ऩजदीक में होने का अनुभव भी कितना अवसन्नकारी होता है। डेड…
यक्षिणी का मेघदूत मूल कहानी की भाषा – मराठीलेखिका – डॉ. निर्मोही फडके.अनुवाद- डॉ. वसुधा सहस्रबुध्दे अपने घर के अटारी की सफाई करते समय उसे एक फटी पुरानी बैग मिल…
पंजाबी कहानीकार : जसवीर राणा अनुवादिका : जसविन्दर कौर बिन्द्रा एक छोटी सी बेवफाई सभी ने चिता में तिनके तोड़ कर फेंक दिए थे मगर मैं नहीं फेंक पाया था।…
सब ठीक है, माँ… -यूरी बोत्वींकिन मुझे नहीं पता मैं अच्छा बेटा हूँ या बुरा… अपनी माँ से झूठ बोलना यदि बुराई है तो बुरा ही हूँ। बहुत झूठ बोलता…
लेबनॉन की एक रात…. डॉ. शैलजा सक्सेना १२ अगस्त १९४५! दूसरी बड़ी लड़ाई का समय! लेबनॉन के यहूदी लोग छोटे-छोटे समूहों में छिप कर अपनी ज़मीन पर अपना देश बनाने…
एक ग़लत कदम -सुधा ओम ढींगरा “सरला, शुक्ला जोड़े को क्या हुआ है?” विमला ने गलियारे में जा रही सरला से पूछा।“कौन से शुक्ला? किन की बात कर रही हो!”…
मन का प्रहरी -शिवानी आज तक मुझे अपनी अन्तःप्रेरणा पर बड़ा गर्व था, पर आज सचमुच ही मेरा दर्प अचानक हाथ से गिर गए दर्पण की भाँति, यथार्थ की धरा…
गूंगा –शिवानी सर्जन पंड्या को दूर से देखने पर लगता, कोई अंग्रेज़ चला आ रहा है। सुर्ख़ गालों पर सुख, सन्तोष और स्वास्थ्य की चमक थी। उनके हाथ में कुछ…
जमने वाली बर्फ -निखिल कौशिक लंदन से लगभग 210 मील उत्तरी पूर्व-ब्रिटेन के जिस छोटे से शहर में मैं रहता हूँ, यहाँ बहुत बर्फ तो नहीं पड़ती पर जब पड़ती…
परदेस में पतझड़ –अरुणा सब्बरवाल वह भी अकेला बैठा था। बिलकुल अकेला, सिकुड़ा सा। वहीं, जहाँ वो अक्सर बैठा करता है। उसी सार्वजनिक बैंच पर। जो मॉरीसन सुपरमार्केट के राउंड…
छोटा सा शीश महल -अरुणा सब्बरवाल परेशान थी वह। परेशानियों जैसी परेशानी थी। दिल में एक दर्द जमा बैठा था। पिघलता ही नहीं। आकाश से बर्फ गिरती है। दो-तीन दिन…
रोजी -अरुणा सब्बरवाल आज रोजी बड़े अनमने मन से अपना सामान बाँध रही थी, यद्यपि जोयस और जॉन ने रोजी को गोद लेने के पश्चात् उसके लालन-पालन में कोई कमी…
इंटरनेट वाला प्यार –सुभाषिनी कुमार कई बार ऐसा होता है कि हमारी खुशी हमारे आस पास ही होती है लेकिन वो हमें दिखती नहीं। मैं बा शहर के एक छोटे…
नाम में का रखा है! -खमेन्द्रा कमल कुमार चलो सुनाई तुम लोग के एक कहानी। तो सुनो! सुन्दर दिन रहा, चटक घाम निकला और मंद मंद पुरवैया चलत रहा। जब…
चलो मुलुक खमेंद्रा कमल कुमार हम भी सोचा कि ई कौन झंझट में फस गवा। दुई चार पेनी पैसा बचा है, जनाइ बुढ़ापा में यहो डूब जई। ई सब मुसीबत…
जिनकी गोद-भराई नहीं होती -अनिल प्रभा कुमार चाय का प्याला साथ की तिपाई पर रखते हुए, मां ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा। “उठ जा बेटे, आज तो…
फिर से –अनिल प्रभा कुमार केशी पांच सीढ़ियां नीचे धंसे फ़ैमिली रूम में, आराम-कुर्सी पर अधलेटे से चुपचाप पड़े थे। व्यस्तता का दिखावा करने के लिये सीने पर किताब नन्हे…
पीपल, पुरखे और पुरानी हवेली – अलका सिन्हा चैटर्जी लेन का यह सबसे पुराना, दो तल्ला मकान होगा जिसे समय के साथ नया नहीं कराया गया। नीचे-ऊपर मिला कर लगभग…