Category: भारत

शेष – अशेष : अनीता वर्मा ( कविता )

शेष – अशेष : अनीता वर्मा ( कविता ) क्या होगा अगर तुम्हें जानेंगे बहुत लोगक्या ही होगा अगर तुम सिर्फ बातें ही करोगे समझदारी कीऔर क्या ही करोगे जब…

परजीवी तिलचट्टे – विनयशील चतुर्वेदी ( कविता )

परजीवी तिलचट्टे – विनयशील चतुर्वेदी ( कविता ) बहुत ही खतरनाक हैं येढूंढ लेते हैं अंधरेघुस जाते हैदरारों मेंगटरों मेंहर उस जगह जहाँ होता हैअंधेरा………लाखों लाठियाँ लेकर भागोइनके पीछेहज़ारों तरह…

कमरा नंबर 302 – डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ (व्यंग्य)

कमरा नंबर 302 – डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ (व्यंग्य) उस ओयो होटल की गलियाँ किसी भूलभुलैया जैसी थीं, जहाँ रोशनी भी डरी-सहमी सी अंदर आती थी। बाहर बोर्ड पर…

“सीबीएसई विद्यार्थियों हेतु त्रिभाषा अध्ययन का स्वर्णिम अवसर” – ए. विनोद

“सीबीएसई विद्यार्थियों हेतु त्रिभाषा अध्ययन का स्वर्णिम अवसर”– ए. विनोद भारत को भाषाओं का देश कहा जाता है, और यह विशेषण अत्यंत सार्थक है। विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों का सहअस्तित्व…

पुल – डॉ. वंदना मुकेश ( कविता )

पुल – डॉ. वंदना मुकेश ( कविता ) पुलउस पीढ़ी से इस पीढ़ी तककई पुल बनने हैं।कुछ कदम तुम चलो,कुछ मैं। याद रखना,बनाओ जब पुल तोइनमें सरकारी सीमेंट न हो,दीवारों…

शोर – डॉ. वंदना मुकेश ( कविता )

शोर – डॉ. वंदना मुकेश ( कविता ) मैं कुछ कहती हूँतुम भी कुछ कहते हो।जो मैं कहती हूँकुछ वैसा ही तुम भी कहते हो। न तुम सुनते होन मैं…

पछतावा – डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ ( व्यंग्य )

पछतावा – डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ ( व्यंग्य ) शहर के सबसे बड़े मल्टी-स्पेशालिटी अस्पताल के आईसीयू वार्ड के बाहर वेटिंग एरिया में एक अजीब सी गंध थी फिनाइल…

“साख पर बट्टा”- डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’

“साख पर बट्टा”- डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ उस दिन घर के स्टोर-रूम के सबसे अंधेरे कोने में, जहाँ मकड़ियों ने अपनी नई रियासत बसाई थी, एक दिल दहलाने वाला…

“धूप छांव”- डॉ. नीना‌ छिब्बर

“धूप छांव”- डॉ. नीना‌ छिब्बर सुख के संग दुख मुस्कान के साथ ऑंसू आशा के संग निराशा गीत की धुन में खामोशी मंजिल की राह में रूकावटें विजय के संग…

उमरावनगर में कुछ दिन : श्रीलाल शुक्ल

उमरावनगर में कुछ दिन – व्यंग्य बकरी, मुर्गी, और फटी कमीजें बस में जहाँ मैं बैठा था, वहाँ बकरी न थी, मेरे पास बैठे आदमी की गोद में सिर्फ मुर्गी…

प्रेम की बिरादरी : हरिशंकर परसाई

प्रेम की बिरादरी – व्यंग्य उनका सबकुछ पवित्र है । जाति में बाजे बजाकर शादी हुई थी । पत्नी ने 7 जन्मो में किसी दूसरे पुरुष को नहीं देखा ।…

पछतावा (व्यंग्य)

पछतावा (व्यंग्य) शहर के सबसे बड़े मल्टी-स्पेशालिटी अस्पताल के आईसीयू वार्ड के बाहर वेटिंग एरिया में एक अजीब सी गंध थी फिनाइल और मरती हुई उम्मीदों का कॉकटेल। सुमित वहां…

खादी पंखों वाली आत्मा (व्यंग्य)

खादी पंखों वाली आत्मा (व्यंग्य) सत्ता की रीढ़ जितनी लचीली होती है, चापलूसी के सुर उतने ही मधुर सुनाई देते हैं। उस दोपहर महामहिम की कचहरी में एक ऐसी ही…

स्टैप्लर (व्यंग्य)

स्टैप्लर (व्यंग्य) बजाज साहब की मेज पर वह बिल्कुल आखिरी कोने में पड़ा रहता था। एक ऐसा अनाम कैदी, जिसकी तरफ कोई मुस्कुराकर देखता भी नहीं था। क्रोमियम की उसकी…

“मोरपंख”- प्रवीण ‘बनजारा’

“मोरपंख”- प्रवीण ‘बनजारा’ सब उन्हें माताजी के नाम से जानते थे।उस दिन बड़े तड़के जब नींद खुली तो अंधेरा ही दिखा। गली के एक खम्भे के लाटू की रोशनी जाने…

विशेषण – डॉ. अशोक बत्रा (कविता)

विशेषण (कविता) एक दिन संज्ञा और सर्वनाम नेविशेषण का पकड़ लिया गिरेबान!और चिढ़ाते हुए बोले —हमारे अंगने में तुम्हारा क्या काम? विशेषण मुस्कराया !बोला — संज्ञा बी!यह सर्वनाम तो तुम्हारा…

“सौ ग्राम जिंदगी”- डॉ. नीना‌ छिब्बर

“सौ ग्राम जिंदगी”- डॉ. नीना‌ छिब्बर अकल्पनीय है सांसों की पूंजी को कंजूसी से खर्चना तोला माशा का हिसाब रख फूंक -फूंक कर गर्म पलों को ठंडा कर के देना…

“पहाड़ों मे पगडंडी”- जे. पी. पाण्डेय ( पुस्तक समीक्षा )

“पहाड़ों मे पगडंडी”- जे. पी. पाण्डेय ( पुस्तक समीक्षा ) यात्रा-वृत्तांत साहित्य की वह विधा है जिसमें लेखक अपनी यात्राओं के अनुभवों, दृश्यों, लोगों और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक स्थितियों का सजीव…

“युद्ध और स्त्रियाँ”- डॉ.नीना‌ छिब्बर

“युद्ध और स्त्रियाँ”- डॉ.नीना‌ छिब्बर स्त्रियाॅं चाहे‌ हो ताकतवर या कमजोर देश की युद्ध चाहे शीत हो या विध्वंसक दिन का उजाला हो या घुप अंधेराकभी टैंकों की गड़गड़ाहट गूंजेकभी…

“धीरज आखिर टूट गया”- डॉ. वेद व्यथित 

“धीरज आखिर टूट गया”- डॉ. वेद व्यथित और छुपाता दर्द हृदय में अब कितना दर्द हृदय की सब सीमायें लांघ गया कितने ज्वार उठे और कितने लौट गये कितने मोती…

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