Category: भारत

हम ‘केवल श्रद्धा’ नहीं – (कविता)

सुनीता पाण्डेय ***** हम ‘केवल श्रद्धा’ नहीं हमें नहीं बहना‘विश्वास-रजत-नग-पग-तल’ मेंहमें बहना है तुम्हारे साथया तुम्हारे समानान्तर. हम जीती जागतीहाड़ मांस कीऔरतें हैंऔरतें नहींइंसान।हमें नहीं चाहिएमहानता का ताजहमें भी सहज…

वापसी – (कहानी)

वापसी सुनीता पाण्डेय -“पिताजी यह मांस नही खाऊँगा मैं।” -“क्यों बेटा?” -“अच्छा नहीं लगता, मन ऊब गया इसे खाते-खाते।” -“बेटा यहाँ तो यही है, इस समय पेड़ों पर भी कुछ…

परिवार- हमारे विश्व कूँजी – (कविता)

लक्ष्मी जयपोल ***** परिवार- हमारे विश्व कूँजी परिवार जीवन के सर्वोत्तम प्राथमिकता हैपरिवार ही जीवन और प्राण हैपरिवार हैतो हम हैपरिवार हमारी पहचान है। परिवार हमें जीवन दान देता हैपरिवार…

मजबूरी का सौदा – (व्यंग्य कथा)

मजबूरी का सौदा डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ गौरीपुरा गाँव के ठीक बीचों-बीच, बरगद के पेड़ के नीचे, गिरधारी की छोटी-सी दुकान थी। दुकान क्या थी, एक फटी-पुरानी चारपाई, जिस…

याद – (कहानी)

याद जयशंकर इस क्रिसमस को मैं पैंसठ बरस का हो गया। चौंसठ का हो रहा था और ब्लड प्रेशर रहने लगा। रोज सुबह एक टेबलेट लेने की शुरुआत हो गयी।…

पूर्व-राग : एक पाठक की नोटबुक में कस्बों, किताबों और सिनेमा की दुनिया – (पुस्तक समीक्षा)

पूर्व-राग : एक पाठक की नोटबुक राकेश कुमार मिश्र हिंदी के वरिष्ठ कथाकार-गद्यकार जयशंकर जी की नई किताब पूर्व-राग : एक पाठक की नोटबुक (2025) को पढ़ते हुए लगा कि…

अनुपम मिश्र की उपस्थिति – (संस्मरण)

वरिष्ठ लेखक जयशंकर ने प्रसिद्ध पर्यावरणविद, लेखक अनुपम मिश्र जी को, उनके कामों को याद करते हुए यह आत्मीय गद्य लिखा है।

“हॉब्सन-जॉब्सन, आधुनिक ऑक्सफोर्ड अंग्रेज़ी कोश और  हिंदी” – (आलेख)

हॉब्सन-जॉब्सन और आधुनिक ऑक्सफोर्ड अंग्रेज़ी कोश: हिंदी के बहाने अंतरराष्ट्रीय अंग्रेज़ी का विस्तार ~ विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र 📜 भूमिका भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और…

हिंदी के मानकीकरण और दस्तावेज़ीकरण का इतिहास – (आलेख)

हिंदी के मानकीकरण और दस्तावेज़ीकरण का इतिहास ~ विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र हिंदी के मानकीकरण और दस्तावेज़ीकरण का इतिहास एक लंबी प्रक्रिया है जो सदियों से चली आ रही है।…

रिमझिम बरसात भरी – (कविता)

डॉ॰ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’ *** रिमझिम बरसात भरी (उड़ियाना छंद) रिमझिम बरसात भरी, सावन सुहावनी।शिव जी का ध्यान धरें, ऋतु है सुपावनी॥नद नाले तृप्त हुए, हरियाली छायी।कोयल की कुहू-कुहू, मन…

चाँद – (कविता)

अनीता वर्मा *** चाँद नभ पर देखे चंदा इंसीदेख-देख हँसी है छलकीनानी कहती चंदा है मामामम्मी कहती वो तो है नानीचाँदनी जैसे बाल हैं उसकेमुझे लगे ये कोई कहानीटी.वी.तो कुछ…

नन्ही बूँदे – (कविता)

अनीता वर्मा *** नन्ही बूँदे नन्हीं बूँदें टप-टप बरसेंधरती का मन देखो हरषेपेड़ों ने तो गीत सुनायानन्हा पौधा भी मुस्कायाहरी घास भी लहराती हैजानें क्या क्या गाती हैकोयल ने भी…

जल बचाओ – (कविता)

अनीता वर्मा *** जल बचाओ रिमझिम बूँदें बरस रहीं हैंधरती कितनी चमक रही हैहरा-भरा परिधान पहनकरदेखो कैसी महक रही हैपेड़ों पर कोयल कूक रही हैना जाने क्या पूछ रही हैपत्ते…

पक्का वादा – (बाल कविता)

अनीता वर्मा *** पक्का वादा पक्का वादाहम करते हैं पक्का वादानहीं खायेंगे मीठा ज़्यादाफल सब्ज़ियाँ ताक़त वालीलाती हैं चेहरे पर लालीदादू मुझको आम खिलातेपापा मीठे फल हैं लातेमुझको मेरी मम्मी…

‘कुछ कही, कुछ अनकही’ : संवेदनाओं की मौन अभिव्यक्ति – (पुस्तक समीक्षा)

कही गई और अनकही भावनाओं का आईना समीक्षक: प्रीती जायसवाल कविता साहित्य का वह सशक्त माध्यम है जो हमें समाज को एक नई दृष्टि से देखने, समझने और महसूस करने…

छुअन- छुअन में फर्क बहुत है! – (कविता)

डॉ. अशोक बत्रा, गुरुग्राम छुअन- छुअन में फर्क बहुत है! माँ छूती है बादल जैसेबारिश जैसे, अमृत जैसे!स्पर्श पिता काधूप हो जैसे, सूरज जैसे।दादा दादी नाना नानीकिशमिश जैसे और छुआरे।सखी…

अपनी नागरी लिपि – (कविता)

डॉ. शारदा प्रसाद *** अपनी नागरी लिपि हिंदी हो जन-जन की भाषाहिंदी हो हर-मन की आशा!बने सकल विश्व में सिरमौरऐसी है सबकी अभिलाषा!! सब मिलकर करें प्रयासहर बोली का हो…

करम परब – (कविता)

*** डॉ शारदा प्रसाद करम परब (झारखंड का लोकप्रिय पर्व) भादो माह शुक्ल एकादशीकरम परब लेकर आया!हरियर करम डाल ले भाई आयाबहना का मन हरसाया!! भाई-बहन का पर्व है प्याराकरमा-धरमा…

रक्षा बंधन – (कविता)

डॉ शारदा प्रसाद *** रक्षा बंधन सावन का पूनम का चंदाआया ले किरणों का उपहार!सकल विश्व मना रहाभाई-बहन का सुंदर त्यौहार!! कलाई सजेगी राखी सेशुभ तिलक लगेगा भाल विशाल!आरती उतारे…

झूलन – (कविता)

डॉ शारदा प्रसाद *** झूलन झूला झूलैं कृष्ण-कन्हैयामाथे मोर मुकुट अति शोभितबलि-बलि जात हैं नंद-यशोदागोपियों का मन हर्षित- मोहित सावन माह है अति मनभावनझूलैं संग-संग राधा रानी!कृष्ण-कन्हैया के मन बसतीवृषभानु…

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