गाँधीजी के बन्दर तीन ( बालगीत ) : डॉ. बालस्वरूप ‘राही’
गाँधीजी के बन्दर तीन ( बालगीत ) : डॉ. बालस्वरूप ‘राही’ गाँधीजी के बन्दर तीन,सीख हमें देते अनमोल । बुरा दिखे तो दो मत ध्यान,बुरी बात पर दो मत कान,कभी…
हिंदी का वैश्विक मंच
गाँधीजी के बन्दर तीन ( बालगीत ) : डॉ. बालस्वरूप ‘राही’ गाँधीजी के बन्दर तीन,सीख हमें देते अनमोल । बुरा दिखे तो दो मत ध्यान,बुरी बात पर दो मत कान,कभी…
बुढ़ापा बनाम अनुभव ( कविता ) : मंजु गुप्ता बुढ़ापा बिन बुलाए आता हैअनुभव परिश्रम से कमाया जाता है।बुढ़ापा लाचारी, अनुभव जौहरी पारखीबुढ़ापा तोड़ता है, अनुभव सिखाताबुढ़ापा उम्र की मजबूरी,…
बस दौड़ रहा आदमी… ( कविता ) : मंजु गुप्ता बच्चों मे भोलापन, मासूमियतकिशोरों में जिज्ञासा, कौतूहलयुवाओं में स्वप्नदर्शिता और जीवन में आस्था, विश्वासइत्र की खुली शीशी – सी गायब…
उनके वादे कल के हैं ( ग़ज़ल ) : डॉ. बालसरूप राही उनके वादे कल के हैंहम मेहमाँ दो पल के हैं । कहने को दो पलके हैंकितने सागर छलके…
ज्ञान – ध्यान कुछ काम न आए ( ग़ज़ल ) : डॉ. बालस्वरूप ‘राही’ ज्ञान ध्यान कुछ काम न आएहम तो जीवन-भर अकुलाए । पथ निहारते दृग पथराएहर आहट पर…
मुखौटों का बाज़ार ( व्यंग्य ) : डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ लाइब्रेरी की पुरानी लकड़ी की महक के बीच सुधीर चश्मा ठीक करते हुए एक पुरानी फाइल पलट रहे…
फूल – एक अहसास ( कविता ) : मंजु गुप्ता फूल तो मात्र एक अहसास होते हैंपानी की एक बूँद या मात्र एक घूँट नहींतृप्ति का अनंत, अथाह सागर होते…
प्रेम का छठा कोण ( कविता ) : मंजु गुप्ता एक प्रेम था- दो हृदयों को जोड़ने वालामाँ ने उसे ममता बना दियापिता ने वात्सल्यबहन ने स्नेह के धागे में…
‘नियति’ : ( कविता ) महीनों बाद अस्पताल से छूटकर आज काम पर फिर वापस आई गुलबिया एक बच्ची को गोद में थामे दो और बच्चे उसका आँचल पकड़े एकटक…
“रेडियो की भाषा” : निबंध इस्लामी दार्शनिक जलालुद्दीन रूमी ने अपनी मसनवी में एक कहानी बयान की है। एक आदमी ने चार अलग-अलग भाषा बोलने वालों को एक दिरहम दिया…
(विश्व पर्यावरण दिवस) : दोहे – डॉ. बबिता ‘किरण‘ मेरे आंगन झूमती, हरियाली की डोर।करती चिड़ियों की चहक, सुखद सुहानी भोर।। बना हुआ है घोंसला, चीं चीं का है शोर।काश…
“मेघ कहाँ से बरसेंगे” : कविता काट रहे हो जब पेड़ों को,मेघ कहाँ से बरसेंगे। मानव लगा हुआ है देखो,अंधाधुंध कटाई में।बिन बारिश सब हरियाली अरु,पैदावार खटाई में।।जल बिन अवनी…
प्रतीक्षा ( कविता ) : मंजु गुप्ता क्या कभी तुमने महसूसा हैवह क्षणजब देह की पोर- पोर मेंउग आती हैं आँखेंरोम-रोम बन जाता है कानऔर सहस्राक्ष सा अपलक गिनता हैकिसी…
पेड़ सब हरे होते हैं ( कविता ) : मंजु गुप्ता पेड़ सब हरे होते हैंहरा होना कितनी बड़ी बात है, जानते हो ?धूप, ताप, आँधी, बरसात, पतझड़ सहते हुए,…
चिड़िया और उदासी ( कविता ) : मंजु गुप्ता एक उदास चिड़ियाबैठी थी पेड़ पर अकेली, गुमसुममैं भी उदास, सोच रही थी-चिड़िया उदास भला किस कारण होगीशायद उसे भूख लगी…
“भरी गर्मी में काव्य की शीतल छाँव : अंतस् की 82वीं गोष्ठी बशीर बद्र को समर्पित” 28 मई की ‘नौ तपा’ की शाम 8 बजे आयोजित अंतस् की 82वीं गोष्ठी…
स्वर्णिम मार्ग : जापान यात्रा और भारत-जापान संबंधों का बहुआयामी परिप्रेक्ष्य – अमित गुप्ता प्रस्तावना –टोक्यो की सड़कों पर पहली बार कदम रखते ही मुझे लगा कि मैं किसी जीवंत…
धरती का दर्द – अनीता वर्मा आवारा बादल खुशी से गुनगुनाता हुआ नीचे जा रही नदी को देख कर दीवाना हो रहा था। साफ हवाएँ उनके इश्क को देखकर तेजी…
अभी कई सारे गीत उन पर लिखे जाने की प्रतीक्षा में हैं – स्वरांगी साने : समीक्षा डॉ. सुनील देवधर आकाशवाणी से सहायक निदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।…
इट हैपंस इन इंडिया: अनोखे रिश्ते – सच्चिदानंद जोशी इंडिगो की फ्लाइट से गौहाटी जा रहा था। सबसे आगे वाली सीट थी , विंडो के पास। फ्लाइट चलने को हुई…