सूखी आँखों का गीला दर्शन : डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’
सूखी आँखों का गीला दर्शन : ( व्यंग्य ) सेकंड क्लास के स्लीपर कोच में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो हम भारतीय रेल के डिब्बे में नहीं, बल्कि…
हिंदी का वैश्विक मंच
सूखी आँखों का गीला दर्शन : ( व्यंग्य ) सेकंड क्लास के स्लीपर कोच में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो हम भारतीय रेल के डिब्बे में नहीं, बल्कि…
इंटरनेट की सड़क पर – ( कविता ) हमने इंटरनेट की भीड़-भरी सड़क पर ढूँढ ही लिया एक छोटा-सा कोना, बतियाने के लिये। अब परीक्षा है हमारी कि बिना चेहरा…
मातृ दिवस : स्प्रिंगडेल ब्रांचलाइब्रेरी, ब्रैंपटन में राइटर्स गिल्ड ( कैनेडा ) विशेष कार्यक्रम सम्पन्न मातृ दिवस के अवसर पर 16 मई 2026 की दोपहर 1:00 से 4:00 तक स्प्रिंगडेल…
वात्सल्य वार्षिकोत्सव : डॉ. कविता मल्होत्रा – “भारत भाग्य विधाता” तथा “संस्कारों की उड़ान” कृति का लोकार्पण एवं सम्मान समारोह सम्पन्न दिनांक 17 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित बंग…
वात्सल्य वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में डॉ कविता मल्होत्रा की दो नवीनतम कृतियों “भारत भाग्य विधाता” तथा “संस्कारों की उड़ान” के लोकार्पण एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन सम्पन्न कार्यक्रम की…
पछतावा (व्यंग्य) शहर के सबसे बड़े मल्टी-स्पेशालिटी अस्पताल के आईसीयू वार्ड के बाहर वेटिंग एरिया में एक अजीब सी गंध थी फिनाइल और मरती हुई उम्मीदों का कॉकटेल। सुमित वहां…
खादी पंखों वाली आत्मा (व्यंग्य) सत्ता की रीढ़ जितनी लचीली होती है, चापलूसी के सुर उतने ही मधुर सुनाई देते हैं। उस दोपहर महामहिम की कचहरी में एक ऐसी ही…
स्टैप्लर (व्यंग्य) बजाज साहब की मेज पर वह बिल्कुल आखिरी कोने में पड़ा रहता था। एक ऐसा अनाम कैदी, जिसकी तरफ कोई मुस्कुराकर देखता भी नहीं था। क्रोमियम की उसकी…
“चाय की मिठासक्ष” – सांद्रा लुटावन सुबह की शुरुआत हो या शाम का समाँ,चाय हर पल को बना देती है सुहाना।कभी हल्की भाप में सुकून मिलता है,कभी एक प्याले में…
“अभिजातकलाकलापेषु भारतीय – ज्ञान – परंपरा (सद्योवृत्तान्तः)” भारतीय ज्ञान परम्परा और शास्त्रीय कलाओं के समकालीन स्वरूप पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ हुआ भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस), राष्ट्रपति…
‘बृज लोक मंच’ – ( 181वें भारतीय आगमन दिवस )
साहित्य संवाद – अर्चना पैन्यूली https://us02web.zoom.us/j/87612432009 (Password: 898796) यू-ट्यूब पर लाइव प्रसारण: https://bit.ly/2KQGo2W
“मोरपंख”- प्रवीण ‘बनजारा’ सब उन्हें माताजी के नाम से जानते थे।उस दिन बड़े तड़के जब नींद खुली तो अंधेरा ही दिखा। गली के एक खम्भे के लाटू की रोशनी जाने…
डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के रचना संसार पर आयोजित कार्यक्रम नई दिल्ली। सुप्रसिद्ध साहित्यकार, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तथा भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’…
कालीदास गुप्ता रज़ा एकदिवसीय जन्मशतवार्षिकी संगोष्ठी एवं साहित्य मंच : कविता पाठ
अक्षर कुंभ – एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी
विशेषण (कविता) एक दिन संज्ञा और सर्वनाम नेविशेषण का पकड़ लिया गिरेबान!और चिढ़ाते हुए बोले —हमारे अंगने में तुम्हारा क्या काम? विशेषण मुस्कराया !बोला — संज्ञा बी!यह सर्वनाम तो तुम्हारा…
सुप्रसिद्ध कवि-लेखक-समीक्षक नरेश शांडिल्य के 3 गद्य संग्रहों पर चर्चा
“सौ ग्राम जिंदगी”- डॉ. नीना छिब्बर अकल्पनीय है सांसों की पूंजी को कंजूसी से खर्चना तोला माशा का हिसाब रख फूंक -फूंक कर गर्म पलों को ठंडा कर के देना…