Learn Hindi Through EDUTAINMENT
इस लिंक में अनेक प्रकार की शिक्षण सामग्री है, जिसके द्वारा आप हिंदी सीख सकते हैं. https://search.app/ZN6w61eaaTSYUTQK7
हिंदी का वैश्विक मंच
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नीचे दिए गए लिंक के अंतर्गत पाठ, कुछ संवाद, कुछ विडियो आदि हैं, जिनकी सहायता से हिंदी बोलना-पढ़ना सीखा जा सकता है https://search.app/qFs1KamMYAxuqG2Q7
अनुवाद के साथ मेरा राब्ता कुछ दस साल पहले हुआ, जब मैंने रेडियो रूस में बतौर अनुवादक और उद्घोषक काम शुरू किया था। बावजूद इसके कि हिंदी और रूसी भाषाएँ…
मूल लेखक – व्लादिमीर व्लादिमीरोविच नाबोकोव (मूल अँग्रेज़ी से अनुवाद – प्रगति टिपणीस) इतने सालों में चौथी बार वे फिर इस बात पर सिर खपा रहे थे कि उस नौजवान…
व्लादिमीर व्लादिमीरोविच नाबोकोव (रूसी: Владимир Владимирович Набоков ; अप्रैल 1899 – 2 जुलाई 1977), जिसे व्लादिमीर सिरिन (Владимир Сирин) के उपनाम से भी जाना जाता है। रूसी-अमेरिकी उपन्यासकार, कवि, अनुवादक…
(मूल भाषा रूसी से अनुवाद – प्रगति टिपणीस) अख़रोट- लियोनिद निकोलायेविच आंद्रेयेव एक समय की बात है। हरे-भरे एक जंगल में एक बहुत सुंदर गिलहरी रहती थी जिसे हर कोई…
लियोनिद निकोलायेविच आंद्रेयेव (रूसी: Леони́д Никола́евич Андре́ев, 21 अगस्त 1871 – 12 सितंबर 1919) एक रूसी नाटककार, उपन्यासकार और लघु-कथा लेखक थे, जिन्हें रूसी साहित्य में अभिव्यक्तिवाद का जनक माना…
(1) असहिष्णु चुप थी गंगा सदियों से तो बड़ी भली थी लगी बोलने जब से दुनिया है अचरज में। कितना बड़ा अनर्थ हो रहा है भूतल पर! दासी देती है…
‘एक बार और जाल फेंक रे मछेरे/जाने किस मछली में बंधन की चाह हो’ जैसे अनेकों कालजयी गीतों के कवि डॉ बुद्धिनाथ मिश्र आधी सदी से हिन्दी काव्य मंच के…
(कहानीकार – वस्येवलद गार्शिन) (रूसी भाषा से हिंदी में अनुवाद – प्रगति टिपणीस) I. – महाराजाधिराज पीटर प्रथम के आदेश पर मैं इस पागलख़ाने के मुआयने का ऐलान करता हूँ!…
वस्येवलद गार्शिन (1855-1888) रूसी साहित्यकार। वस्येवलद गार्शिन रूसी साहित्य में थोड़ा लिखकर भी अपनी एक अलग पहचान रखते हैं। “गार्शिन से अधिक प्रतिभाशाली, अधिक विख्यात और अधिक महत्त्वपूर्ण लेखक भी…
कौन देश को वासी, वेणु की डायरी – डॉ. जयशंकर यादव) प्रवासी भारतीय होना भारतीय समाज की महत्वाकांक्षा भी है,सपना भी है,कैरियर भी है और सब कुछ मिल जाने के…
सुना था कि हवाएँ मौसम का रुख़ बदलती हैं, हमारी सोच के मौसम का भी, समाज के मौसम का भी। आजकल सुबह होते ही फ़ोन पर दिन का मौसम देखने…
6 जून 1799 को पूश्किन का जन्म हुआ, उन्हें उम्र 37 साल की मिली। यह उम्र अंकों में छोटी लगती है लेकिन किए गए काम कहते हैं कि वह सार्थक…
आजकल दुनिया निरंतर सिमटती जा रही है और लोग बेहतर काम और जीवन की तलाश में न सिर्फ़, अपना गाँव और शहर बदलते रहते हैं हैं बल्कि देश और महाद्वीप…
सुबह तेज़ बारिश हो रही थी, हवा भी तेज़ थी। आभास था कि दिन सुस्त और बादलों से घिरा रहेगा। फिर पता चला कि शहर के केंद्र में उसकी कुछ…
परिवर्तन ही सृष्टि के चालक हैं। कई सदियाँ बोल रही थीं, परिवर्तन की कहानी कह रही थीं और हमारे जैसे सैलानियों का समूह जो अपने शहर यानी मॉस्को को बेहतर…
मौसम कैसे भी करवट क्यों न ले, वसंत गर्माहट लाने में देर करे या घोड़े पर सवार हो कर आए; विलो (Willow) प्रजाति का एक पेड़ है जो रूसी भाषा…
ताल को जाती ढलान पर दूब की मख़मली क़ालीन बिछ गई है। सारा वातावरण वसंत की तस्वीर बना हुआ था, मैं उसका रसपान करते-करते अपने ख़यालों में लीन चली जा…