साहित्य, संवेदना, आत्मीयता एवं स्मृतियों से परिपूर्ण एक अविस्मरणीय साहित्यिक गोष्ठी सम्पन्न
श्रद्धांजलि के स्वर, साहित्य के संग “तुम मेरी धमनियों में रक्त बन बह रहे हो,जैसे धरती में होती है अपनी सौंधी सुगंध।और फूलों में बसी भीनी-मधुर महक॥” 1 जून 2026…
