नमन करूँ मैं ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर”
नमन करूँ मैं ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर” तुझको या तेरे नदीश, गिरि, वन को नमन करूँ मैं।मेरे प्यारे देश! देह या मन को नमन करूत्र मैं?किसको…
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नमन करूँ मैं ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर” तुझको या तेरे नदीश, गिरि, वन को नमन करूँ मैं।मेरे प्यारे देश! देह या मन को नमन करूत्र मैं?किसको…
चांद का कुर्ता ( बाल कविता ) : रामधारी सिंह “दिनकर” हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला,‘‘सिलवा दो माँ मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला। सनसन…
स्वरांगी साने : नाम ही बदला है, घटना नहीं, कल सोनम थी, आज सिया, कल कोई और … इस बार नाम सिया है, पिछले साल सोनम थी। अगली बार कोई…
भक्तिकाल के कवियों का राष्ट्र निर्माण में योगदान – स्वरांगी साने राष्ट्र का निर्माण सरल कार्य नहीं है। यह व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण से भी जटिल है क्योंकि इसमें किसी…
औकात – स्वरांगी साने दिवाकर लगातार प्रिया के बनाए भोजन की तारीफ़ किए जा रहे थे। लेकिन दिवाकर तारीफ़ों के पुल बाँधे जा रहा था। थोड़ी देर बाद प्रिया को…
एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाना मात्र ही यात्रा नहीं कहलाता, बल्कि इसमें मनुष्य के अनुभवों, उसकी संवेदनाओं और दृष्टिकोण का विस्तार भी शामिल होता है। जब एक संवेदनशील…
“आधुनिकता का संत्रास और संबंधों का साधनीकरण” (आलेख) : मनोज श्रीवास्तव सन् १९८० में जब सुभाष घई की फ़िल्म ‘क़र्ज़’ भारतीय सिनेमाघरों में आई, तो दर्शकों ने उसे एक रोमांचक…
अनहद नाद ( कविता ) : अनीता वर्मा हमें सुनना होगा भीतर के कोलाहल को समेटना होगा उसे अपनी आत्म शक्ति से स्वयं से जुड़ने के लिए ज़रूरी है जुड़ना…
மூச்சுப் பயிற்சி ( கவிதை ) : ஜமுனா கிருஷ்ணராஜ் யோக வகுப்பில் எங்களிக்கப்பட்டதுமூச்சுப் பயிற்சிஅதாவது மூச்சை உள்ளிழுத்து வெளியே மெதுவாக விட வேண்டிய பயிற்சி. அப்போது நான் மூச்சின் வகைகளை உணர்ந்து சிந்தனையில் ஆழ்ந்தேன். அன்றாடம் நாம் ஓயாடிமூச்சிறைக்க வேலை…
योगाभ्यास ( कविता ) : डॉ. जमुना कृष्णाराज योग की कक्षा में मुझेदिया गया योगाभ्यास। श्वास लेने और छोड़ने कीविधि मुझे बताई गई। तब मैं श्वास के अनेक प्रकारों सेअवगत…
गजरे का एक फूल ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ पूजा की माला में कैसे तो गुँथ गयाएक फूल गजरे काअर्चना के बोलों से आ जुडीमुजरे की एक कड़ी। गंगा…
इस तरह तो ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ इस तरह तो दर्द घट सकता नहींइस तरह तो वक़्त कट सकता नहींआस्तीनों से न आँसू पोछिएऔर ही तदबीर कोई सोचिए।…
पाँच मुक्तक ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ 1. मेरा विश्वास पराजय को ज़हर होता हैमेरा उल्लास उदासी को क़हर होता हैमुझे घिरते हुए अँधियारे की परवाह क्यामेरी हर रात…
यात्रा ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ इन पथरीले वीरान पहाडों परज़िन्दगी थक गई है चढ़ते-चढ़ते । क्या इस यात्रा का कोई अंत नहींहम गिर जाएँगे थक कर यहीं कहींकोई…
अधूरी समाप्तियाँ ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ सब समाप्त हो जाने के पश्चात भीकुछ ऐसा हैजो कि अनहुआ रह जाता है चलते-चलते राह कहीं चुक जाती हैलेकिन लक्ष्य नहीं…
प्यास के क्षण ( गीत ) : बालस्वरूप राही बाँट दो सारा समंदर तृप्ति के अभिलाषकों में,मैं अंगारे से दहकते प्यास के क्षण माँगता हूँ, दूर तक फैली हुई अम्लान…
पलकें बिछाए तो नहीं बैठीं ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ कटीले शूल भी दुलरा रहे हैं पाँव को मेरेकहीं तुम पंथ पर पलकें बिछाए तो नहीं बैठीं ! हवाओं…
क़तआत ( ग़ज़ल ) : बालस्वरूप ‘राही’ 1. जानता हूँ कि ग़ैर हैं सपनेऔर खुशियाँ भी ये अधूरी हैंकिंतु जीवन गुज़ारने के लिएकुछ ग़लत फ़ेहमियाँ ज़रूरी हैं 2. हसरतों की…
लगे जब चोट सीने में हृदय का भान होता है ( ग़ज़ल ) : बालस्वरूप ‘राही’ लगे जब चोट सीने में हृदय का भान होता हैसहे आघात जो हँसकर वही…
अचानक दोस्ती करना, अचानक दुश्मनी करना ( ग़ज़ल ) : बालस्वरूप ‘राही’ अचानक दोस्ती करना, अचानक दुश्मनी करनाये उसका शौक है यारों सभी से दिल्लगी करना सभी जज़्बात को दीवानगी…