Category: प्रवासी कविता

कटघरा – (कविता)

कटघरा रात का अँधेरासन्नाटा, औरमेरे वो एकाकी पलचिन देते हैं मुझेमन के कटघरे मेंहर रोज़पूछती हूँकितने सवालखुद सेदेती हूँ हर जवाबखुद हीहोती हूँकभी आरोपी, कभी दोषीखुद ही पक्ष, खुद ही…

भली थी – (कविता)

भली थी इक लड़कीकितनीभली थीनाज़ बिछौनेपली थीमाँ अँगना में खेलतीजूही कीकली थीपिता हथेली पे रखीगुड़-मिश्रीडली थीअल्हड़ हिरना झूमतीथोड़ी सीपगली थीभावी की गलियों मेंस्वप्न संजोएचली थीब्याही तो बेगाने घरधू-धू करजली थीबस…

शहीदों के बच्चे – (कविता)

शहीदों के बच्चे बड़े हो जाते हैं शहीदों के बच्चेबड़ा होने से पहले ही। पढ़ लेते हैं माँ की आँखों कीमूक भाषाजान लेते हैं मौन आह कीपरिभाषारोक लेते हैं कोरों…

एकाकी चलती जाऊँगी – (कविता)

एकाकी चलती जाऊँगी एकाकी चलती जाऊँगी। रोकेंगी बाधाएँ फिर भीबाँधेंगी विपदाएँ फिर भीराहें नई बनाऊँगीएकाकी चलती जाऊँगी। संकल्पों के सेतु होंगेनिष्ठा दिशा दिखाएगीसाहस होगा पथ प्रदर्शकआशा ज्योत जलाएगी विश्वासों के…

तारक चुनरी – (कविता)

तारक चुनरी कौन जुलाहातारक चुनरीबुनता सारी रात ? किरणों से करता नक्काशीबेल मोतिया टाँकेजूही-चंपा सजी पाँखुरीमोल भाव न आँके शरद चाँदनी जड़ी किनारीघूँघरू जोड़े साथचतुर जुलाहा तारक चुनरीबुनता सारी रात।…

मद्धम – (कविता)

मद्धम चाँद मद्धम, रात मद्धमरात की हर बात मद्धम। नभ की नीली नीलिमा मेंदीप झिलमिला रहेकाँपते अधर धरा केगीत गुनगुना रहे सुर मद्धम, ताल मद्धमबज रहे हैं साज मद्धम। अंग-अंग…

बड़े हो गए हम – (कविता)

बड़े हो गए हम ज़रूरी नहीं अबकिसी का अनुमोदनबड़े हो गए हम। औरों की सुनी थीमन की ना मानीकमी थी,या खूबीना जानी,पहचानी विवादों ने घेरापरे हो गए हम। अनचीन्हा कोईभय…

ओढ़ली हैं चुप्पियाँ – (कविता)

ओढ़ ली हैं चुप्पियाँ ओढ़ ली हैं चुप्पियाँसिल गए अधर भीएक से लगने लगेघर भी – खंडहर भी । आँख से कह दियाभूल जा भीगनामन को समझा दियाछोड़ दे रीझना…

तुम कहो तो मैं लिख दूँ – (कविता)

तुम कहो तो मैं लिख दूँ चूल्हे की रोटी का वो स्वाद,जो माँ के प्यार से रचा था,मोहल्ले की दादी का आशीर्वाद,जहाँ हर गम छुप जाता था।तुम कहो तो मैं…

कवि और कविता – (कविता)

कवि और कविता——————— हिन्दी के कवि और कविता कीदेखो कितनी लाचारी है।बिना मानदेय छप-छप कर भीसंपादक का आभारी है। कोविड ने जब से दिखलाईराह नई अंतर्जालों कीज़ूम बराबर ज़ूम हो…

नया साल : नया गीत – (कविता)

नया साल : नया गीत———————— नये साल में गीत लिखेंकुछ नये भाव के ऐसेहर शाखा पर पत्र-पुष्प नवऋतु बसंत में जैसे ख़ुशियाँ हों हर घर आँगन मेंप्रेम प्यार हो मन…

पहुँच गए अमरीका – (कविता)

पहुँच गए अमरीका———————— बाँध गठरिया घर से निकलेपहुँच गए अमरीकानए देश के नए शहर मेंलगता था सब फीका धीरे-धीरे समय गुजरतादिखती थी चहुँओर विषमतासात समुंदर पार करे नहींकोई रोली टीका…

काश मैं अंग्रेजी होती – (कविता)

काश मैं अंग्रेजी होती काश मैं अंग्रेजी होतीमैं इतराती, मैं इठलातीSwag से मैं भी बोली जातीकाश मैं अंग्रेजी होती वक्ताओं का गुरूर होतीश्रोताओं को भी cool लगतीकाश मैं अंग्रेजी होती…

मेरे राम लला – (कविता)

मेरे राम लला एकटक तकतीं शून्य में,बाट जोहती प्रति क्षण,पंथ निहारतीं.. तरसती दरस को,अंखियां मेरी प्रतीक्षा में तेरी,ओ मेरे राम लला। सुध-बुध बिसरा के,सर्वस्व भूला के,राम नाम जपते जपते,सिया राम…

मेरा भारत देश महान – (कविता)

मेरा भारत देश महान गर्व है सौभाग्य है किमिट्टी में तेरी जन्मी ये कायादूर हो कर भी दूर नहींतू मन में जो है समायातू मेरा भारत देश महानमेरा भारत देश…

राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस – (रिपोर्ट)

राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस लो फिर एक बार.. राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस आ गया,लो फिर एक बार.. हम भारतीयों का देश प्रेम जाग गया। देशभक्ति हममें है कितनी, प्यार हमें…

बदलती ऋतु – (कविता)

बदलती ऋतु तुम..जैसे..इंग्लैंड की कड़कड़ाती ठंड में खिली,किरन एक छोटी सी सुनहरी धूप की। तुम..जैसे..पतझड़ के मौसम में वो पत्तियाँ झड़ी,धरती सजी तमाम रंगों की रंगोली सी। तुम..जैसे..ओले और बर्फ़बारी…

सोचा ना था कभी – (कविता)

सोचा ना था कभी सोचा ना था कभी,देस से दूर कहीं बस जाना होगा, करोड़ों की आबादी में भीखुल कर सांस लेने वाले,हमको मुठ्ठी भर लोगों मेंघुटन महसूस करना होगा।…

चाँद को ताकूँ मैं – (कविता)

चाँद को ताकूँ मैं चाँद को ताकूँ मैंसारी सारी रातऔर सोचूँ अक्सरबस एक ही बात।। बाबजूद दाग़ के भीवो क्यों लगेइतना ख़ास हमको,बाबजूद दाग़ के भीखूबसूरती क्यों लगेबेदाग हमको। चाँद…

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