एडम और ईव – (कहानी)
एडम और ईव – दिव्या माथुर बात ज़रा सी थी; एक झन्नाटेदार थप्पड़ ईव के गाल पर पड़ा। वह संभल नहीं पाई, कुर्सी और मेज़ से टकराती हुई ज़मीन पर…
हिंदी का वैश्विक मंच
एडम और ईव – दिव्या माथुर बात ज़रा सी थी; एक झन्नाटेदार थप्पड़ ईव के गाल पर पड़ा। वह संभल नहीं पाई, कुर्सी और मेज़ से टकराती हुई ज़मीन पर…
मौसा… यूरी बोत्वींकिन जब मैं पैदा हुआ था मेरे पिता दूसरे शहर में थे एक सैनिक संस्था में कोर्स करते हुए, कुछ महिनों बाद ही आ पाए। अस्पताल से मेरी…
पूनम कासलीवाल शिक्षिका, लेखिका और कवयित्री। एक प्रकाशित हिंदी उपन्यास – रुके – रुके से कदम और तीन काव्य संग्रह (सह-लेखन में)। हिंदी साहित्य में गहरी रुचि और अपनी रचनात्मकता…
उसके श्रम के आँसू अब्र से कल्पित कोमल चक्षु उसके भींग गए उसके श्रम के आँसू वह हृदय स्थल तक भीत गए मेरी कामना की प्यास का नज़ारा एक यह…
प्रवासी लेखिका का फ़ेंग शुई डॉ आरती ‘लोकेश’ अरुंधति घर के दरवाज़े पर पहुँची ही थी कि घनघनाती फ़ोन की घंटी बंद दरवाज़े के बाहर तक सुनाई पड़ रही थी।…
फ़िबोनाची प्रेम डॉ आरती ‘लोकेश’ “ये सुनंदा ने दुबई की फ्लाइट क्यों ली? …जबकि उसे मालूम था कि हम आबुधाबी रहते हैं। … इतनी दूर जाना आसान है क्या?” अश्विन…
दस रुपए का सिक्का डॉ आरती ‘लोकेश’ उफ़्फ़! दिख ही नहीं रहा। कहाँ चला गया? अलमारी के नीचे तो नहीं? पचहत्तर की हो चली हूँ। आँखों की रोशनी भी खत्म…
फूस की सीढ़ी डॉ आरती ‘लोकेश’ समाचार-पत्र में कल के आयोजन की खबर खूब चमक रही थी। साध्वी गौर से सब पढ़ ही रही थी कि फ़ोन की घंटी बजी।…
गजदंत डॉ आरती ‘लोकेश’ घर आते ही गौतमी ने अपने चेहरे से थकान उतारकर अपनी वर्दी के साथ ही अलगनी पर टाँग दी। हाथ-मुँह धोया, कपड़े बदले। आईने में खुद…
आधी माँ, अधूरा कर्ज़ डॉ आरती ‘लोकेश’ आज सुबह अपनी हवेली से निकल छोटी माँ की हवेली में आई तो गहमा-गहमी मची हुई थी। दोनों हवेलियों के मध्य दालान वाला…
रविवार की छुट्टी – पूनम कासलीवाल देर रात सब काम निबटा कर लेटने लगी तो याद आया राजमा भिगोना भूल गयी। अंधेरे में टटोलते हुए उठी, कहीं आलोक की नींद…
कटघरा रात का अँधेरासन्नाटा, औरमेरे वो एकाकी पलचिन देते हैं मुझेमन के कटघरे मेंहर रोज़पूछती हूँकितने सवालखुद सेदेती हूँ हर जवाबखुद हीहोती हूँकभी आरोपी, कभी दोषीखुद ही पक्ष, खुद ही…
भली थी इक लड़कीकितनीभली थीनाज़ बिछौनेपली थीमाँ अँगना में खेलतीजूही कीकली थीपिता हथेली पे रखीगुड़-मिश्रीडली थीअल्हड़ हिरना झूमतीथोड़ी सीपगली थीभावी की गलियों मेंस्वप्न संजोएचली थीब्याही तो बेगाने घरधू-धू करजली थीबस…
शहीदों के बच्चे बड़े हो जाते हैं शहीदों के बच्चेबड़ा होने से पहले ही। पढ़ लेते हैं माँ की आँखों कीमूक भाषाजान लेते हैं मौन आह कीपरिभाषारोक लेते हैं कोरों…
डॉ कुसुम नैपसिक भारत और अमेरिका में हिंदी अध्यापन का कार्य स्कूल और कॉलेज दोनों स्तरों पर किया है। फुलब्राइट लैंग्वेज टीचर असिस्टेंट कार्यक्रम के तहत अमेरिका में पढ़ाना शुरू…
मूल कविता : वसील स्तूस अनुवाद : यूरी बोत्वींकिन Ярій, душе… Ярій, душе. Ярій, а не ридай.У білій стужі сонце України.А ти шукай — червону тінь калинина чорних водах —…
एकाकी चलती जाऊँगी एकाकी चलती जाऊँगी। रोकेंगी बाधाएँ फिर भीबाँधेंगी विपदाएँ फिर भीराहें नई बनाऊँगीएकाकी चलती जाऊँगी। संकल्पों के सेतु होंगेनिष्ठा दिशा दिखाएगीसाहस होगा पथ प्रदर्शकआशा ज्योत जलाएगी विश्वासों के…
तारक चुनरी कौन जुलाहातारक चुनरीबुनता सारी रात ? किरणों से करता नक्काशीबेल मोतिया टाँकेजूही-चंपा सजी पाँखुरीमोल भाव न आँके शरद चाँदनी जड़ी किनारीघूँघरू जोड़े साथचतुर जुलाहा तारक चुनरीबुनता सारी रात।…
मद्धम चाँद मद्धम, रात मद्धमरात की हर बात मद्धम। नभ की नीली नीलिमा मेंदीप झिलमिला रहेकाँपते अधर धरा केगीत गुनगुना रहे सुर मद्धम, ताल मद्धमबज रहे हैं साज मद्धम। अंग-अंग…
बड़े हो गए हम ज़रूरी नहीं अबकिसी का अनुमोदनबड़े हो गए हम। औरों की सुनी थीमन की ना मानीकमी थी,या खूबीना जानी,पहचानी विवादों ने घेरापरे हो गए हम। अनचीन्हा कोईभय…