Category: कविता

निशब्द – (कविता)

निशब्द तुमनेबड़ी ख़ामोशी से कहामेरे भीतरचिल्लाते, शोर मचातेमन कोऔर चिल्लाओऔर शोर मचाओथोड़ा और ज़ोर सेऔर तब तक यूँ ही चिल्लाते रहोजब तकतुम्हारे अंतर्मन के पर्दे तुम्हारे मन कीझुँझलाहट सेये नहीं…

हूक – (कविता)

हूक लो कारी बदरिया आई घिरइक हूक उठी हो माई फिरकदम्ब पे कोयल आ बैठीअब देगी कूक सुनाई फिर आँगन में एक साये सालो दिखा वही हरजाई फिरतन मन सिकोड़…

झगड़ा – (कविता)

झगड़ा दिल कहता है पूछ लो जाकरक्या वो मुझसे हैं नाराज़कहती है फिर रूह उबल करआ जाओ तुम अब भी बाज़जाओ मिल आओ दिल बोलाजीने का ये ही अंदाज़काटो दिन…

ब्रह्मांड के पैटर्न की पच्चीकारी हम – (कविता)

ब्रह्मांड के पैटर्न की पच्चीकारी हम हम ब्रह्मांड के पैटर्न की पच्चीकारी की तरह हैंसमझ में नहीं आता जिसका अर्थ!नीले आकाश की मेहराब के नीचे हम छल्ले छोड़ते हैं,जो हमसे…

पृथ्वी के मुख पर केवल धूल हैं हम – (कविता)

पृथ्वी के मुख पर केवल धूल हैं हम पृथ्वी के मुख पर केवल धूल हैं हमएक निस्संकोच नृत्य में हिमकण-फीता हैं जैसे..हम हैं मानों पिघले बादल जो माँ के गर्भ…

खुद का सहारा – (कविता)

खुद का सहारा खुद से सहारा बनने का वादा करो.अपना जीव तिरस्कार से नहीं पर समर्थन से भर लो,अपने लिए मित्र, पिता और सलाहकार बनो,बाहर से किसी की तलाश करने…

और भीड़ में भी मुझे तुम्हारी थकान महसूस हो रही है… – (कहानी)

और भीड़ में भी मुझे तुम्हारी थकान महसूस हो रही है… और भीड़ में भी मुझे तुम्हारी थकान महसूस हो रही है…सिर झुककर, तुम देर रात को मेट्रो से बाहर…

जीवन मेरा पैचवर्क कम्बल – (कविता)

जीवन मेरा पैचवर्क कम्बल मैं एक पैचवर्क कम्बल सिल दूँमेरे जीवन के प्रसंगों से।यहाँ गहरा नीला है, यहाँ चमकीला बैंगनी है, और भूरा, लाल और सभी हरा है!हर टुकड़ा मुझे…

उसके श्रम के आँसू – (कविता)

उसके श्रम के आँसू अब्र से कल्पित कोमल चक्षु उसके भींग गए उसके श्रम के आँसू वह हृदय स्थल तक भीत गए मेरी कामना की प्यास का नज़ारा एक यह…

कटघरा – (कविता)

कटघरा रात का अँधेरासन्नाटा, औरमेरे वो एकाकी पलचिन देते हैं मुझेमन के कटघरे मेंहर रोज़पूछती हूँकितने सवालखुद सेदेती हूँ हर जवाबखुद हीहोती हूँकभी आरोपी, कभी दोषीखुद ही पक्ष, खुद ही…

भली थी – (कविता)

भली थी इक लड़कीकितनीभली थीनाज़ बिछौनेपली थीमाँ अँगना में खेलतीजूही कीकली थीपिता हथेली पे रखीगुड़-मिश्रीडली थीअल्हड़ हिरना झूमतीथोड़ी सीपगली थीभावी की गलियों मेंस्वप्न संजोएचली थीब्याही तो बेगाने घरधू-धू करजली थीबस…

शहीदों के बच्चे – (कविता)

शहीदों के बच्चे बड़े हो जाते हैं शहीदों के बच्चेबड़ा होने से पहले ही। पढ़ लेते हैं माँ की आँखों कीमूक भाषाजान लेते हैं मौन आह कीपरिभाषारोक लेते हैं कोरों…

यूक्रेनी कवि वसील स्तूस का हिंदी कविता – (अनुवाद)

मूल कविता : वसील स्तूस अनुवाद : यूरी बोत्वींकिन Ярій, душе… Ярій, душе. Ярій, а не ридай.У білій стужі сонце України.А ти шукай — червону тінь калинина чорних водах —…

एकाकी चलती जाऊँगी – (कविता)

एकाकी चलती जाऊँगी एकाकी चलती जाऊँगी। रोकेंगी बाधाएँ फिर भीबाँधेंगी विपदाएँ फिर भीराहें नई बनाऊँगीएकाकी चलती जाऊँगी। संकल्पों के सेतु होंगेनिष्ठा दिशा दिखाएगीसाहस होगा पथ प्रदर्शकआशा ज्योत जलाएगी विश्वासों के…

तारक चुनरी – (कविता)

तारक चुनरी कौन जुलाहातारक चुनरीबुनता सारी रात ? किरणों से करता नक्काशीबेल मोतिया टाँकेजूही-चंपा सजी पाँखुरीमोल भाव न आँके शरद चाँदनी जड़ी किनारीघूँघरू जोड़े साथचतुर जुलाहा तारक चुनरीबुनता सारी रात।…

मद्धम – (कविता)

मद्धम चाँद मद्धम, रात मद्धमरात की हर बात मद्धम। नभ की नीली नीलिमा मेंदीप झिलमिला रहेकाँपते अधर धरा केगीत गुनगुना रहे सुर मद्धम, ताल मद्धमबज रहे हैं साज मद्धम। अंग-अंग…

बड़े हो गए हम – (कविता)

बड़े हो गए हम ज़रूरी नहीं अबकिसी का अनुमोदनबड़े हो गए हम। औरों की सुनी थीमन की ना मानीकमी थी,या खूबीना जानी,पहचानी विवादों ने घेरापरे हो गए हम। अनचीन्हा कोईभय…

ओढ़ली हैं चुप्पियाँ – (कविता)

ओढ़ ली हैं चुप्पियाँ ओढ़ ली हैं चुप्पियाँसिल गए अधर भीएक से लगने लगेघर भी – खंडहर भी । आँख से कह दियाभूल जा भीगनामन को समझा दियाछोड़ दे रीझना…

थके हैं मगर – (कविता)

थके हैं मगर, हारे नहीं थके हैं मगर, हारे नहींभीड़ जैसे ही हैं , कोई न्यारे नहीं। चौराहे मिले या दोराहे मिलेहम अपनी ही राहें बनाते रहेलाख भटकन लिपटी पड़ी…

तुम कहो तो मैं लिख दूँ – (कविता)

तुम कहो तो मैं लिख दूँ चूल्हे की रोटी का वो स्वाद,जो माँ के प्यार से रचा था,मोहल्ले की दादी का आशीर्वाद,जहाँ हर गम छुप जाता था।तुम कहो तो मैं…

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