छायावाद हिंदी साहित्य के उत्थान की काव्य-धारा – (कविता)
छायावाद हिंदी साहित्य के उत्थान की काव्य-धारा – डॉ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल में द्विवेदी युग के बाद के काल को छायावादी युग…
हिंदी का वैश्विक मंच
छायावाद हिंदी साहित्य के उत्थान की काव्य-धारा – डॉ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल में द्विवेदी युग के बाद के काल को छायावादी युग…
अनुवाद की अंतरगाथा – दिव्या माथुर दक्षिण एशिया का जीवंत बहुभाषावाद हमारी साहित्यिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो स्थानीय और प्रवासी संस्कृति का भी प्रतिनिधित्व करता है। हमें…
निर्भीक योद्धा : मेजर मोहित शर्मा, अशोक चक्र, सेना मेडल – (आलेख) – शशि पाधा वर्ष 1857 से 1947 तक के इतिहास को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के नाम से जाना…
जीवन में सफलता का रहस्य : भावनात्मक बुद्धिमत्ता – शशि पाधा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्राणी सफलता के उच्चतम शिखर पर पहुँचने की अभिलाषा रखता है और इसके लिये…
भूत और भविष्य के सेतु : बुज़ुर्ग – शशि पाधा घनी शाखाओं वाले विशाल वटवृक्ष की ठण्डी छाँव हर प्राणी को राहत देती है और चिन्ताएँ हर लेती है। जो…
विदेश में देश – विनीता तिवारी देश से बाहर निकले करीब पच्चीस साल हो गए लेकिन इन पच्चीस वर्षों में से शुरू के लगभग तेरह वर्ष ऐसे थे, जिनमें हर…
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में भाषा और साहित्य डॉ. वंदना मुकेश भूमिका बचपन में लोककथाओं में जादू की छड़ी वाली परी के चमत्कार लुभाते थे नरभक्षी डायन और राक्षसों की…
ब्रिटेन में हिंदी शिक्षण एवं प्रशिक्षण – एक संक्षिप्त अवलोकन – डॉ. वंदना मुकेश भाषा, भाव और विचारों की अभिव्यक्ति का साधन है। किसी भी भाषा को सीखना, सिखाना या…
ज़मीं खा गई आसमां कैसे कैसे – मीनाक्षी जोशी फिल्मी दुनिया की चकाचौंध, ग्लेमर, धन और यश की क्षणभंगुरता से कौन परिचित नहीं है? न जाने कितने सितारे रोज नए…
वेनिस का सौदागर : यहूदी घृणा की जड़ें डॉ वरुण कुमार दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान नाजी सरकार द्वारा यहूदियों का नरसंहार बीसवीं सदी की हृदयविदारक घटनाओं में से एक है,…
अद्भुत भाषा संस्कृत संस्कृत में 1700 धातुएं, 70 प्रत्यय और 80 उपसर्ग हैं, इनके योग से जो शब्द बनते हैं, उनकी संख्या 27 लाख 20 हजार होती है। यदि दो…
वेदांत से वैराग्य -सुरेश पटवा आध्यात्मिक ग्रंथ उन ऊंचाइयों पर सृजित होते हैं जहाँ नाम, रूप, काल, दिग, दिशायें सब खो जाते है। साधक के भीतर खिला हुआ शून्य, ज्ञान…
तमिल रामायण ‘रामावतारम्’ : एक विवेचन (-डॉ. दंडिभोट्ला नागेश्वर राव) भारत में नैतिक मूल्यों की स्थापना में साहित्य का विशेष स्थान है। काव्य-सौंदर्य के प्रतिमानों में सामाजिक एवं सामूहिक हित…
युक्रैनी हिंदी-शिक्षण में कला-प्रेम का योगदान -डॉ. यूरी बोत्वींकिन, युक्रैन प्रत्येक देश का इतिहास कितना भी जाटिल और दुख-भरा क्यों न हो उससे राष्ट्रीय चेतना का एक गहरा जुड़ाव अवश्य…
हिन्दी साहित्य की विश्व में भारतीय संस्कृति को बढ़ाने में भूमिका -परवीन लता हमें ये जानना है कि संस्कृति का शब्दlर्थ क्या है? संस्कृति याने कि उत्तम या सुधरी हुई…
हिन्दी को बैसाखी नहीं चाहिए -हंसा दीप इन दिनों सभी को हिन्दी पठन और लेखन को लेकर एक समान चिन्ता है। भारत हो या भारत के बाहर, हर ओर एक…
सिंगापुर में हिंदी -डॉ. संध्या सिंह भारतीय डायस्पोरा का फैलाव विश्व के कई देशों में काफी बड़े स्तर पर है। यह सिर्फ फैलाव ही नहीं है बल्कि उस देश के…
थाईलैंड में भारतीय संस्कृति का प्रभाव –शिखा रस्तोगी भाषा, संस्कृति प्राण देश के,इनके रहते राष्ट्र रहेगा।भारतीय संस्कृति का जयघोष गुंजाकर,भारत मां का मान बढ़ेगा।। प्रत्येक राष्ट्र की पहचान उसकी सांस्कृतिक…
थाईलैंड में हिंदी –शिखा रस्तोगी गूंजे हिंदी विश्व में स्वप्न हो साकार, थाई देश की धरा से हिंदी की जय-जय कारहिंदी भाषा का जयघोष है सात समुंदर पार, हिंदी बने…
जोगिन्द्र सिंह कंवल : फीजी के प्रेमचंद डॉ. सुभाषिनी लता कुमार स्वर्गीय श्री जोगिन्द्र सिंह कंवल एक महान लेखक, अद्भुत व्यक्तित्व और सामान्य रूप में शिक्षा और समाज में योगदान…