Category: आलेख

जापान में भारतीय ज्ञान परंपरा की कुछ छवियाँ – (आलेख)

जापान में भारतीय ज्ञान परंपरा की कुछ छवियाँ डॉ वेदप्रकाश सिंह ओसाका विश्वविद्यालय, जापान जापान की संस्कृति में शिंतो और बौद्ध धर्म का अमिट प्रभाव है। शिंतो धर्म जापान में…

शरद जोशी हास्य का मर्म, व्यंग्य का धर्म और साहित्य की आत्मा थे – (आलेख)

शरद जोशी हास्य का मर्म, व्यंग्य का धर्म और साहित्य की आत्मा थे ~ विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र “लेखक होना केवल शब्दों से खेलना नहीं होता, बल्कि समाज की नब्ज…

गणेश लेखनविद्या और ॐ – (आलेख)

गणेश लेखनविद्या और ॐ ~ विजय नगरकर, अहिल्यानगर महाराष्ट्र मानव सभ्यता के इतिहास में संवाद की कला ने एक विशेष स्थान बनाया है। प्राचीन काल से ही मनुष्य ने परस्पर…

दक्षिण, मध्य और पूर्व एशिया में हिंदी शिक्षण: समस्याएँ और सुझाव – (आलेख)

दक्षिण, मध्य और पूर्व एशिया में हिंदी शिक्षण: समस्याएँ और सुझाव डॉ. ज्ञान प्रकाश विजिटिंग प्रोफेसर, हांगुक यूनिवर्सिटी ऑफ़ फॉरेन स्टडीज़ (HUFS),सिओल, दक्षिण कोरिया ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना से संचालित…

दक्षिण कोरिया में “बुद्धं शरणं गच्छामि!” – (आलेख)

दक्षिण कोरिया में “बुद्धं शरणं गच्छामि!” डॉ. संजय कुमार, दक्षिण कोरिया बिहार स्थित गया (जिसका नया नामकरण गया जी किया गया है) मेरी पुश्तैनी धरती रही है। गया बौद्ध धर्म…

अंग्रेजी माध्यम : दोषी कौन – (विचार स्तंभ)

अंग्रेजी माध्यम : दोषी कौन – डॉ. अशोक बत्रा, गुरुग्राम निसंदेह नन्हे-नन्हे बच्चों से नन्हीं-सी आयु में अपनी भाषा छुड़वाकर किसी विदेशी भाषा में पढ़वाना डायलिसिस जैसा कष्टकारी है। भाषांतरण…

‘मानस’ में रामभक्त के मापदंड – (आलेख)

‘मानस’ में रामभक्त के मापदंड प्रो.आलोक गुप्त, पूर्व प्रोफेसर, गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने तुलसी के सदाचार और भक्ति को अन्योन्याश्रित बताया है। वैसे तो इसमें कोई नवीनता…

पंडित दीनानाथ मंगेशकर की अंतिम यात्रा: जब संगीत मौन हो गया – (आलेख)

पंडित दीनानाथ मंगेशकर की अंतिम यात्रा : जब संगीत मौन हो गया – प्रस्तुति- विजय नगरकर अप्रैल की तपती दोपहर थी। सड़कें सुनसान थीं, जैसे खुद शहर ने भी मौन…

जापानी विद्यालयों से जीवन मूल्यों की सीख – (आलेख)

जापानी विद्यालयों से जीवन मूल्यों की सीख – डॉ अर्चना पांडेय, जापान वर्ष 2013 में टोक्यो के एक अंतरराष्ट्रीय विद्यालय में हिंदी सेकेंड लैंग्वेज शिक्षिका के रूप में मेरी नई…

महाराष्ट्र राज्य स्थापना दिवस – (आलेख)

महाराष्ट्र राज्य स्थापना दिवस ~ विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र मराठी राजभाषा दिन और मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक भूमिका 1 मई 1960 को जब महाराष्ट्र राज्य की स्थापना भाषावार प्रांत रचना…

मनोदैहिक विकारों में योग की भूमिका – (आलेख)

मनोदैहिक विकारों में योग की भूमिका – मनोज श्रीवास्तव कल भोपाल विश्वविद्यालय में Role of Yoga in Psycho-somatic disorders में बोलते हुए मैंने कहा कि योग मन का जनतंत्र है।…

कृष्ण-कृष्णा की प्रेमावस्था…

कृष्ण-कृष्णा की प्रेमावस्था… (कुछ शास्त्रीय चरित्रों पर मुक्त विमर्श) – यूरी बोत्वींकिन, युक्रेन केनोपनिषद के तृतीय खंड में देवताओं का अभिमान तोड़ने के लिए ब्रह्म उनके समक्ष एक यक्ष के…

जापान में मेरा अनुभव – (आलेख)

जापान में मेरा अनुभव रूपा सिंह, जापान मैंने जापान आने के बाद देखा कि दुनिया में ऐसा समाज भी होता है जहाँ किसी को भी किसी का कैसा भी होना…

व्याकरण और लोक-प्रचलन के बीच का द्वंद्व – (विचार स्तंभ)

व्याकरण और लोक-प्रचलन के बीच का द्वंद्व – सृजन कुमार, बुसान यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज कुछ दिनों पहले फेसबुक पर एक पोस्ट से आँखें दो-चार हो गईं। हालाँकि मैं फेसबुक…

  भारतीय प्राचीन ज्ञान-परंपरा में प्रसव पूर्व मनोविज्ञान (Prenatal Psychology) – (आलेख)

भारतीय प्राचीन ज्ञान-परंपरा में प्रसव पूर्व मनोविज्ञान (Prenatal Psychology) – यूरी बोत्वींकिन, हिंदी शिक्षक एवं भारतविद्, तरास शेव्चेंको कीव राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, यूक्रेन “ज्ञान ही शक्ति है” – मेरी मातृभाषा यूक्रेनी…

जब प्रवासी साहित्य ने ब्रिटिश साम्राज्य को झुकने पर मजबूर किया – (विचार स्तंभ)

जब प्रवासी साहित्य ने ब्रिटिश साम्राज्य को झुकने पर मजबूर किया – अभिषेक त्रिपाठी, बेलफास्ट,आयरलैंड हिंदी साहित्य की मुख्यधारा में प्रवासी साहित्य को कई बार ऐसा साहित्य माना जाता है,…

बुल्गारिया का पर्व मार्तेनित्सा – (आलेख)

बुल्गारिया का पर्व मार्तेनित्सा लोहित नभ, श्वेत धरा – मार्तेनित्सा का आशीर्वाद मार्तेनित्सा – यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, शांति, और सौभाग्य का प्रतीक है। यह पर्व बुल्गारिया…

राजभाषा हिंदी प्रचार प्रसार में एण्ड्राइड मोबाइल की भूमिका

राजभाषा हिंदी प्रचार प्रसार में एण्ड्राइड मोबाइल की भूमिका – विजय प्रभाकर नगरकर आधुनिक तकनीकी विकास के साथ भाषा का विस्तार भी धीरे धीरे बढ़ रहा है। । सूचना प्रौद्योगिकी…

आगे आगे होता है क्या! – (विचार स्तंभ)

आगे आगे होता है क्या! – डॉ अशोक कुमार बत्रा लगभग 20 वर्ष पहले की बात है। चुनावों की तैयारियाँ चल रही थीं। दोपहर 2.30 बजे के आसपास मेरे घर…

महाकुंभ 2025 : आस्था को सहेजने के लिए मुझे सौ आंखें और चाहिए – (आलेख)

महाकुंभ 2025 : आस्था को सहेजने के लिए मुझे सौ आंखें और चाहिए – रामा तक्षक मेरा बहुत समय से भारतीय ज्ञान परम्परा और महाकुंभ के बारे में लिखने का…

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