दोहे : विनयशील चतुर्वेदी
दोहे : विनयशील चतुर्वेदी सहज सरल सुंदर सुखद, कविता ज्ञान निकुंज ।बरबस मन मधुकर विमल, मोहित अक्षर पुंज ।। हृदय विवेक वीहीन कवि, बिहरेंं काव्याकाश ।रजत रेख घन दामिनी, ज्यों…
हिंदी का वैश्विक मंच
दोहे : विनयशील चतुर्वेदी सहज सरल सुंदर सुखद, कविता ज्ञान निकुंज ।बरबस मन मधुकर विमल, मोहित अक्षर पुंज ।। हृदय विवेक वीहीन कवि, बिहरेंं काव्याकाश ।रजत रेख घन दामिनी, ज्यों…
मानक देवनागरी में ‘ळ’ चिह्न को शामिल किया जाना (आलेख ) : डॉ. वरुण कुमार ऊपर संलग्न पृष्ठ को देखें। केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय ने देवनागरी लिपि के नवीनतम मानकीकरण में…
मानकीकरण की अवधारणा और देवनागरी लिपि (आलेख) : डॉ. वरुण कुमार “देवनागरी लिपि का मानकीकरण!” यह पदबंध ही कुछ अजीब नहीं लगता? लिपि का मानकीकरण!! लिपि के चिह्न और लेखन…
शब्द चिंतन मोड पर ( कविता ) : अनीता वर्मा जो हो रहा हैवो तो होना ही थापर जो नहीं चाहिए होनाउस होने के होने काक्या होना और क्या नहीं…
पी जा हर अपमान ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ पी जा हर अपमान और कुछ चारा भी तो नहीं ! तूने स्वाभिमान से जीना चाहा यही ग़लत थाकहाँ पक्ष…
जिंदगी क्रम ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ जो काम किया, वह काम नहीं आएगाइतिहास हमारा नाम नहीं दोहराएगाजब से सुरों को बेच ख़रीदी सुविधातब से ही मन में बनी…
अक़्ल ये कहती है, सयानों से बनाए रखना ( ग़ज़ल ) : बालस्वरूप ‘राही’ अक़्ल ये कहती है, सयानों से बनाए रखनादिल ये कहता है, दीवानों से बनाए रखना लोग…
जो बात मेरे कान में ख़्वाबो ने कही है ( ग़ज़ल ) : बालस्वरूप ‘राही’ जो बात मेरे कान में ख़्वाबो ने कही हैवो बात हमेशा ही ग़लत हो के…
ठुमक ठुमक ( बालगीत ) – बालस्वरूप ‘राही’ मैं तो बिल्कुल नहीं खेलतानाटक मम्मी जी, इस बार,गुड्डी को तो परी बनायामुझे बनाया राजकुमार! इसके ठाट-बाट तो देखोकैसी शान निराली है,आँखों…
‘न’ से ‘नानी'( व्यंग्य ) – डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ ननिहाल अब उस पुराने डाकखाने की तरह हो गया है जहाँ चिट्ठियाँ तो आती हैं, पर उन्हें पढ़ने वाला…
“तांडव” कविता : ( रेणुका – कविता संग्रह ) : रामधारी सिंह ‘दिनकर’ नाचो, हे नाचो, नटवर !चन्द्रचूड़ ! त्रिनयन ! गंगाधर ! आदि-प्रलय ! अवढर ! शंकर!नाचो, हे नाचो,…
रंग जमाया टी.वी. ने ( बालगीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ फीके पड़े तमाशे सारे, रंग जमाया टी.वी ने!ए बी सी डी ई एफ जी,फिल्मों की है धूम मची,सबने इतवारों की…
सात और आठ ( कविता ) : डॉ. अशोक बत्रा एक दिन झूमते हुएसात और आठपहुँच गएगणितज्ञ आर्यभट्ट के पास! खुशी से किलक कर पूछा आर्यभट्ट नेकहो प्यारे सात और…
ब्राउन का फीका रंग ( समीक्षा ) : स्वरांगी साने काले और सफ़ेद के बीच का कोई रंग ब्राउन हो सकता है। इन दिनों एशियन परिवारों को भी ब्राउन फैमिली…
दीवारों पर लिखी सिसकियाँ ( व्यंग्य ) : डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ इतिहास की किताबों में लिखा है कि शाहजहाँ ने मुमताज की याद में ताजमहल बनवाया था। पर…
गया बादळा ( राजस्थानी कविता ) : कल्याणसिंह शेखावत आज बादळा, नया बादळा,चढ्या सबैरे घणा बादळा। जबरा-जबरा काळा-काळा,म्हानै लाग्या भला बादळा।म्हारो तन अर मन हरसायो,नभ मे दीख्या बड़ा बादळा।। मॉक…
श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी (व्यंग्य) : सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला‘ श्रीमती गजानन्द शास्त्रिणी श्रीमान् पं. गजानन्द शास्त्री की धर्मपत्नी हैं। श्रीमान् शास्त्री जी ने आपके साथ यह चौथी शादी की है, धर्म…
मेंढकी का ब्याह ( व्यंग्य ) : वृंदावनलाल वर्मा उन ज़िलों में त्राहि-त्राहि मच रही थी। आषाढ़ चला गया, सावन निकलने को हुआ, परन्तु पानी की बूँद नहीं। आकाश में…
घोड़ाशाही ( व्यंग्य ) : सियारामशरण गुप्त प्राचीन भारत में चक्रवर्ती होने के लिए अश्वमेध यज्ञ किया जाता था। यज्ञ का घोड़ा छोड़ दिया जाता था और उसके पीछे-पीछे रक्षक…
“मंगल-आह्वान” कविता (कविता संग्रह – रेणुका ) : रामधारी सिंह ‘दिनकर’ भावों के आवेग प्रबलमचा रहे उर में हलचल। कहते, उर के बाँध तोड़स्वर-स्त्रोत्तों में बह-बह अनजान,तृण, तरु, लता, अनिल,…