Category: प्रवासी रचनाकार

डॉ. पद्मेश गुप्त के आलेख ‘ब्रिटेन में हिंदी कविता के साढ़े तीन दशक’ पर विशेष विमर्श

ब्रिटेन में हिंदी कविता के साढ़े तीन दशक! : डॉ. पद्मेश गुप्त डॉ. पद्मेश गुप्त ब्रिटेन में बसे प्रतिष्ठित साहित्यकार, शिक्षाविद्, उद्यमी और समाजसेवी हैं, जिन्होंने हिन्दी भाषा, शिक्षा और…

डॉ. शैलजा सक्सेना की कविता ‘माँ! मैं तुम सी न हो पाई’ का आशा बर्मन द्वारा बांग्ला अनुवाद

डॉ. शैलजा सक्सेना की कविता ‘माँ! मैं तुम सी न हो पाई’ का आशा बर्मन द्वारा बांग्ला अनुवाद माँ! मैं तुम सी न हो पाई’ – डॉ. शैलजा सक्सेना माँ!…

प्रगति टिपणीस की कविताएं

प्रगति टिपणीस की कविताएं कविता विमर्श में आज पढिए, मूलतः लखनऊ से प्रगति टिपणीस पिछले तीस से अधिक वर्षों से मॉस्को में निवास कर रही हैं। वे पेशे से इंजीनियर…

कनाडा के वरिष्ठ साहित्यकार श्याम त्रिपाठी को श्रद्धांजलि : डॉ. शैलजा सक्सेना

कनाडा के वरिष्ठ साहित्यकार श्याम त्रिपाठी को श्रद्धांजलि : डॉ. शैलजा सक्सेना मृत्यु का सन्नाटा उन लोगों के लिए अधिक होता है जो पीछे रह जाते हैं। लोग कहते हैं…

पुरु और प्राची : दिव्या माथुर

पुरु और प्राची : दिव्या माथुर बद्रीनारायण ओसवाल का इकलौता वारिस था उनका बेटा, हरिनारायण जो एक अमेरिकन लड़की से शादी करके कैलिफ़ोर्निया में जा बसा था। हालांकि हरिनारायण की…

दिव्या माथुर का ‘मायाजाल’ प्रवासी जीवन, मानवीय संबंधों और आत्मसंघर्षों का बहुरंगी आख्यान : पूर्णिमा वर्मन

दिव्या माथुर का ‘मायाजाल’ प्रवासी जीवन, मानवीय संबंधों और आत्मसंघर्षों का बहुरंगी आख्यान : पूर्णिमा वर्मन शुभ संकल्प समूह-इंदौर का हार्दिक धन्यवाद, जिन्होंने मुझे दिव्या माथुर के कहानी-संग्रह ‘माया जाल’…

योग – एक जीवन-प्रणाली : डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना

योग – एक जीवन-प्रणाली : डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना मानव जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाएँ प्राप्त करना नहीं, बल्कि इसकी सार्थकता शारीरिक, मानसिक, आत्मिक संतुलन और चैतन्य की प्राप्ति…

मेरी प्रिय मित्र शैल जी ( संस्मरण ) : आशा बर्मन 

मेरी प्रिय मित्र शैल जी ( संस्मरण ) : आशा बर्मन अभी भी विश्वास नहीं आता है कि शैल जी हमें छोड़कर चली गई हैं। मेरा और उनका साथ बहुत…

অধিকার – प्रीति अग्रवाल : अधिकार – आशा बर्मन : अनुवाद (लघुकथा)

অধিকার – प्रीति अग्रवाल : अधिकार – आशा बर्मन : अनुवाद (लघुकथा) अधिकार रश्मि अपनी दो बरस की बिटिया को अपने से चिपका कर, नजरें झुकाए, ऐसे सिमट कर बैठी…

भावना ( कविता ) : डॉक्टर शिवनंदन यादव

भावना ( कविता ) : डॉक्टर शिवनंदन यादव मैंने पूछा कि भावना क्या है?कौन-सा रूप, धारणा क्या है?भावना दुलार, नेह, ममता है,मीरा का गीत, सूर-कविता है; भावना मिलन-सांझ, सरस प्रेम-पाती…

कविता अनुवाद : “टू माय डॉटर “- कवि: हेइके एन. सिम्स : “मेरी बेटी के लिए”- आशा बर्मन 

कविता अनुवाद : “टू माय डॉटर “- कवि: हेइके एन. सिम्स : “मेरी बेटी के लिए”- आशा बर्मन मेरी बेटी के लिए मेरी बेटी ,तेरी ओर देखती हूँ,और स्वयं से…

बूढ़ी यादें ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना

बूढ़ी यादें ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना याद आ रही तेरी बेटादिन में ही अँधियारा छायाआँखें अब कमज़ोर हो गईं,सही लग रहा मैला-मैला॥ तू अपने घर उलझा है,पर…

पिछली रोटी ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना

पिछली रोटी ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना उसने कभी नहीं दीपिछली रोटीअपने पति और बच्चों को,….ख़ुद ली…!! जब भूलने लगी अपना होना,तो याद आयामाँ ने भी नहीं दी…

दो लड़कियाँ ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना

दो लड़कियाँ ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना दो –दो लड़कियाँ रहती हैं मेरे भीतर!एक वो, जो पैदा हुई थीगली के कोने वाले घर में जहाँ सौर के बाहर…

प्रकृति, संवेदना और मानवता का काव्यात्मक घोष – ”धरती ने भिजवाई पाती“ : समीक्षक – डॉ. ऋतु शर्मा ननंन पाँडे

प्रकृति, संवेदना और मानवता का काव्यात्मक घोष – ”धरती ने भिजवाई पाती“ : समीक्षा साहित्य जब केवल शब्दों का विन्यास न रहकर संवेदना का सजीव स्वर बन जाता है, तब…

“धरती ने भिजवाई पाती” : संगीता चौबे ‘पंखुड़ी’

“धरती ने भिजवाई पाती” : ( कविता ) धरती ने भिजवाई पातीजिसमें पीड़ा और उदासीझर झर उसके आँसू बहतेतेज गति से तरु जब कटते…. सुनो मनुज! अब मेरी गाथाकब तक…

सरकारी तख्ता (तुर्की व्यंग्य) : अजीज नेसिन

सरकारी तख्ता (तुर्की व्यंग्य) : अजीज नेसिन क्या आप जानते हैं कि सरकार का तख्ता कैसे उलटा जाता है? संभव है, आप कभी इस प्रकार का कार्य संपन्न करने के…

रिश्वतखोर लिमिटेड (तुर्की व्यंग्य) : अजीज नेसिन

रिश्वतखोर लिमिटेड (तुर्की व्यंग्य) : अजीज नेसिन जिस विभाग के कर्मचारियों को रिश्वत खाने की बीमारी लग जाए तो वे उससे कभी मुक्त नहीं होना चाहते हैं। और उसके राह…

 (कविता-अनुवाद) : “लेटर टू मदर”- “माँ को पत्र”-  प्रीति अग्रवाल

“लेटर टू मदर”- सर्गेई येसेनिन : “माँ को पत्र”- प्रीति अग्रवाल : (कविता-अनुवाद) माँ को पत्र क्या तुम अभी जीवित हो, मेरी प्यारी बूढी माँ? मैं भी जीवित हूँ। तुम्हें…

अंत भला तो सब भला ( कहानी अनुवाद ) : रेखा राजवंशी

अंत भला तो सब भला ( कहानी अनुवाद ) : रेखा राजवंशी जब किराए की कार झाँसी स्टेशन के बाहर आकर रुकी, प्रिया का भाई अनिल ड्राइवर के पास वाली…

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