Category: प्रवासी रचनाकार

तुम्हारे शब्द मुझ तक पहुँच ही कहां पाते हैं ?

अनूप भार्गव अक्सर जमाने कीज़बरदस्ती ओढाई गईतहज़ीब की चाशनी मेंफ़िसल के लौट जाते हैं , तुम्हारे शब्द मुझ तक पहुँच ही कहां पाते हैं ? तुम्हारे होठों के गोल होने…

दृश्य: सुबह – डॉ. शैलजा सक्सेना ( कविता )

दृश्य: सुबह – डॉ. शैलजा सक्सेना ( कविता ) हवा शान्त है,रात बरसता मेह रुक गया,सड़कें पानी पीकर लेटीं,पत्ते सभी नहाये दिखते,सूरज भी अब बदन पौंछ कर,आने की तैयारी में…

दृश्य: वर्षा – डॉ. शैलजा सक्सेना ( कविता )

दृश्य: वर्षा – डॉ. शैलजा सक्सेना ( कविता ) आज धूप की मुठ्ठी बाँधेसूरज बादल पीछे दुबकाऔर हवा की बन आई हैघर-घर जा कर चुगली करती। सूरज व्याकुल देख रहा…

“एक साँस”- डॉ. शैलजा सक्सेना

“एक साँस”- डॉ. शैलजा सक्सेना साँसों की भीड़ मेंएक साँस है,सब साँसों को साँस बनातीजैसे वो साँस नहींएक पेड़ हो ऑक्सीज़न का! जब दिन की भाग–दौड़ में साँसें शोर मचाती,सब…

इंटरनेट की सड़क पर : डॉ. शैलजा सक्सेना

इंटरनेट की सड़क पर – ( कविता ) हमने इंटरनेट की भीड़-भरी सड़क पर ढूँढ ही लिया एक छोटा-सा कोना, बतियाने के लिये। अब परीक्षा है हमारी कि बिना चेहरा…

“चाय की मिठासक्ष” – सांद्रा लुटावन

“चाय की मिठासक्ष” – सांद्रा लुटावन सुबह की शुरुआत हो या शाम का समाँ,चाय हर पल को बना देती है सुहाना।कभी हल्की भाप में सुकून मिलता है,कभी एक प्याले में…

“प्रवासी मजदूर”- डॉ. वंदना मुकेश

“प्रवासी मजदूर”- डॉ. वंदना मुकेश छत होती तो देखती,गली से निकलतेप्रवासी मजदूरों की टोलियाँ।देखती कुछ औरतें,कुछ बच्चे लटकाए,कंधों पर झोले अटकाए। कुछ औरतें,खाली पेटवाली,कुछ पेटवाली, खाली। मुझे छत चाहियेकि देख…

हम मिलें आमने-सामने (कविता)

हम मिलें आमने-सामने (कविता) (बृद्धावस्था, सामयिक चिंतन) खुशी की खोज में मैं करवटें बदलता हूँमैं कोई संगीतकार या कवि नहीं हूँऔर नहीं हूँ शब्दों का जाल बिछाता लेखकजो बनाते हैं…

प्रभु का ध्यान (कविता)

प्रभु का ध्यान (कविता) (आत्मिक चिंतन, अधूरे प्रश्न) प्रभु, मैं कैसे ध्यान करूँ?अपने मन के भावों को कैसे तुम्हें बताऊँश्रद्धा भक्ति के गीतों को कैसे तुम्हें सुनाऊँ व्याथापूर्ण वाणी को…

राही एक सड़क पर (कविता)

राही एक सड़क पर (कविता) (प्रवासी जीवन, भावनात्मक संघर्ष) विजय पताका लेकर भागा, दुनिया की इस दौड़ मेंकालचक्र की सुधि नहीं थी, यौवन के इस खेल में lसुख-दुःख का बन्धन…

नवल वर्ष की धवल चाँदनी

नवल वर्ष की धवल चाँदनी (नव वर्ष का संदेश) नवल वर्ष की धवल चाँदनी जीवन में परिमल लाएमानव के उज्जवल भविष्य का मंगलगान सुनाए l सुख, सम्पदा, शान्ति का हम…

सत्य और असत्य की मुलाक़ात

सत्य और असत्य की मुलाक़ात (संदर्भ : काल्पनिक, चिन्तनशील, परिहास) कहावत है पाप और पुण्य एक ही सिक्के के दो पार्श्व हैं अर्थात् एक के बिना दूसरे का अस्तित्व नहीं…

सनातन की लहरें

सनातन की लहरें (संदर्भ : सामयिक चर्चा, चुनावी माहौल, परिहास)वर्ष 2024, तिथि 22 जनवरी l अयोध्या में नवनिर्मित भव्य मंदिर में प्रभु राम की प्राण-प्रतिष्ठा l उनकी प्रतिमा के दर्शनार्थ…

रामू की बेटी

रामू की बेटी (विधा : लघुकथा, काल्पनिक पात्र, समकालीन संदर्भ) मिथिला प्रदेश बिहार का एक गाँव, शहर से दूर, ग्रामीण संस्कृति का पोषक, मुख्यतः कृषक समाज l बढ़ती आबादी और…

किसने लिखी थी प्रथम कविता?(काल्पनिक चिंतन, सांस्कृतिक उद्भव)

किसने लिखी थी प्रथम कविता?(काल्पनिक चिंतन, सांस्कृतिक उद्भव) कौन थी वह प्रथम बालाजिसने लिखी थी प्रथम कवितासौग़ात में जिसने दिया थाप्रेम प्रणय और भावुकता? कौन थी वह सरस कामिनीचंद्रमा की…

अतीत के पन्नों से (डायरी)

अतीत के पन्नों से (डायरी) मेरी यादों का फलक वो कहते हैं न, ‘स्काई इज द लिमिट’ कुछ ऐसे ही मेरे जीवन की पगडंडियों के निशान हैं जो अब धरती…

अपने भीतर के क़लमकार से मुलाक़ात (डायरी)

अपने भीतर के क़लमकार से मुलाक़ात (डायरी) अपने अंदर छुपे हुए इस रचनाकार से में अपरिचित थी, पर जब पहचान हुई तो लगा हम अजनबी थे ही नहीं, साथ-साथ एक…

श्रीलाल शुक्ल की व्यंग्य दृष्टि: संदर्भ ‘अंगद का पांव’ – (आलेख)

श्रीलाल शुक्ल की व्यंग्य दृष्टि: संदर्भ ‘अंगद का पांव’ डॉ ज्ञान प्रकाश विजिटिंग प्रोफेसर, हंगुक यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज, सियोल, दक्षिण कोरिया श्रीलाल शुक्ल स्वातंत्र्योत्तर भारतीय यथार्थ के सतर्क और…

कोरिया में हांगुल डे पर ‘हांगुल रन’ – (रिपोर्ट)

कोरिया में हांगुल डे पर ‘हांगुल रन’ डॉ. संजय कुमार (सेजोंग सिटी, कोरिया से) 9 अक्टूबर को हांगुल डे के अवसर पर मैंने कोरिया के सेजोंग शहर में आयोजित ‘हांगुल…

अबूझ – (कहानी)

अबूझ – सरस दरबारी, कनाडा “दीदी आपको शादी में आना ही होगा।” “पर स्वाति मैं किसी को नहीं जानती।” “मुझे तो जानती हैं न। यह भी जानती हैं कि मेरे…

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