Month: June 2026

बूढ़ी यादें ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना

बूढ़ी यादें ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना याद आ रही तेरी बेटादिन में ही अँधियारा छायाआँखें अब कमज़ोर हो गईं,सही लग रहा मैला-मैला॥ तू अपने घर उलझा है,पर…

पिछली रोटी ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना

पिछली रोटी ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना उसने कभी नहीं दीपिछली रोटीअपने पति और बच्चों को,….ख़ुद ली…!! जब भूलने लगी अपना होना,तो याद आयामाँ ने भी नहीं दी…

दो लड़कियाँ ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना

दो लड़कियाँ ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना दो –दो लड़कियाँ रहती हैं मेरे भीतर!एक वो, जो पैदा हुई थीगली के कोने वाले घर में जहाँ सौर के बाहर…

मुखौटों का बाज़ार ( व्यंग्य ) : डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’

मुखौटों का बाज़ार ( व्यंग्य ) : डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ लाइब्रेरी की पुरानी लकड़ी की महक के बीच सुधीर चश्मा ठीक करते हुए एक पुरानी फाइल पलट रहे…

फूल – एक अहसास ( कविता ) : मंजु गुप्ता

फूल – एक अहसास ( कविता ) : मंजु गुप्ता फूल तो मात्र एक अहसास होते हैंपानी की एक बूँद या मात्र एक घूँट नहींतृप्ति का अनंत, अथाह सागर होते…

प्रेम का छठा कोण ( कविता ) : मंजु गुप्ता

प्रेम का छठा कोण ( कविता ) : मंजु गुप्ता एक प्रेम था- दो हृदयों को जोड़ने वालामाँ ने उसे ममता बना दियापिता ने वात्सल्यबहन ने स्नेह के धागे में…

‘नियति’ ( कविता ) : डॉ. शिप्रा मिश्रा 

‘नियति’ : ( कविता ) महीनों बाद अस्पताल से छूटकर आज काम पर फिर वापस आई गुलबिया एक बच्ची को गोद में थामे दो और बच्चे उसका आँचल पकड़े एकटक…

“रेडियो की भाषा” : डॉ.सुनील देवधर 

“रेडियो की भाषा” : निबंध इस्लामी दार्शनिक जलालुद्दीन रूमी ने अपनी मसनवी में एक कहानी बयान की है। एक आदमी ने चार अलग-अलग भाषा बोलने वालों को एक दिरहम दिया…

(विश्व पर्यावरण दिवस) : दोहे – डॉ. बबिता ‘किरण’

(विश्व पर्यावरण दिवस) : दोहे – डॉ. बबिता ‘किरण‘ मेरे आंगन झूमती, हरियाली की डोर।करती चिड़ियों की चहक, सुखद सुहानी भोर।। बना हुआ है घोंसला, चीं चीं का है शोर।काश…

“मेघ कहाँ से बरसेंगे” : डॉ. अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’

“मेघ कहाँ से बरसेंगे” : कविता काट रहे हो जब पेड़ों को,मेघ कहाँ से बरसेंगे। मानव लगा हुआ है देखो,अंधाधुंध कटाई में।बिन बारिश सब हरियाली अरु,पैदावार खटाई में।।जल बिन अवनी…

प्रकृति, संवेदना और मानवता का काव्यात्मक घोष – ”धरती ने भिजवाई पाती“ : समीक्षक – डॉ. ऋतु शर्मा ननंन पाँडे

प्रकृति, संवेदना और मानवता का काव्यात्मक घोष – ”धरती ने भिजवाई पाती“ : समीक्षा साहित्य जब केवल शब्दों का विन्यास न रहकर संवेदना का सजीव स्वर बन जाता है, तब…

“धरती ने भिजवाई पाती” : संगीता चौबे ‘पंखुड़ी’

“धरती ने भिजवाई पाती” : ( कविता ) धरती ने भिजवाई पातीजिसमें पीड़ा और उदासीझर झर उसके आँसू बहतेतेज गति से तरु जब कटते…. सुनो मनुज! अब मेरी गाथाकब तक…

हिंदुस्तानी प्रचार सभा में भारतीय भाषा के लेखकों और विद्वानों का एक विमर्श, रचना पाठ और स्नेह मिलन का आयोजन सम्पन्न

हिंदुस्तानी प्रचार सभा में भारतीय भाषा के लेखकों और विद्वानों का एक विमर्श, रचना पाठ और स्नेह मिलन का आयोजन सम्पन्न दिनांक 2 जून, 2026 को हिंदुस्तानी प्रचार सभा में…

सरकारी तख्ता (तुर्की व्यंग्य) : अजीज नेसिन

सरकारी तख्ता (तुर्की व्यंग्य) : अजीज नेसिन क्या आप जानते हैं कि सरकार का तख्ता कैसे उलटा जाता है? संभव है, आप कभी इस प्रकार का कार्य संपन्न करने के…

रिश्वतखोर लिमिटेड (तुर्की व्यंग्य) : अजीज नेसिन

रिश्वतखोर लिमिटेड (तुर्की व्यंग्य) : अजीज नेसिन जिस विभाग के कर्मचारियों को रिश्वत खाने की बीमारी लग जाए तो वे उससे कभी मुक्त नहीं होना चाहते हैं। और उसके राह…

 (कविता-अनुवाद) : “लेटर टू मदर”- “माँ को पत्र”-  प्रीति अग्रवाल

“लेटर टू मदर”- सर्गेई येसेनिन : “माँ को पत्र”- प्रीति अग्रवाल : (कविता-अनुवाद) माँ को पत्र क्या तुम अभी जीवित हो, मेरी प्यारी बूढी माँ? मैं भी जीवित हूँ। तुम्हें…

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