गजरे का एक फूल ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’
गजरे का एक फूल ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ पूजा की माला में कैसे तो गुँथ गयाएक फूल गजरे काअर्चना के बोलों से आ जुडीमुजरे की एक कड़ी। गंगा…
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गजरे का एक फूल ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ पूजा की माला में कैसे तो गुँथ गयाएक फूल गजरे काअर्चना के बोलों से आ जुडीमुजरे की एक कड़ी। गंगा…
इस तरह तो ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ इस तरह तो दर्द घट सकता नहींइस तरह तो वक़्त कट सकता नहींआस्तीनों से न आँसू पोछिएऔर ही तदबीर कोई सोचिए।…
पाँच मुक्तक ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ 1. मेरा विश्वास पराजय को ज़हर होता हैमेरा उल्लास उदासी को क़हर होता हैमुझे घिरते हुए अँधियारे की परवाह क्यामेरी हर रात…
यात्रा ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ इन पथरीले वीरान पहाडों परज़िन्दगी थक गई है चढ़ते-चढ़ते । क्या इस यात्रा का कोई अंत नहींहम गिर जाएँगे थक कर यहीं कहींकोई…
अधूरी समाप्तियाँ ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ सब समाप्त हो जाने के पश्चात भीकुछ ऐसा हैजो कि अनहुआ रह जाता है चलते-चलते राह कहीं चुक जाती हैलेकिन लक्ष्य नहीं…
प्यास के क्षण ( गीत ) : बालस्वरूप राही बाँट दो सारा समंदर तृप्ति के अभिलाषकों में,मैं अंगारे से दहकते प्यास के क्षण माँगता हूँ, दूर तक फैली हुई अम्लान…
पलकें बिछाए तो नहीं बैठीं ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ कटीले शूल भी दुलरा रहे हैं पाँव को मेरेकहीं तुम पंथ पर पलकें बिछाए तो नहीं बैठीं ! हवाओं…
क़तआत ( ग़ज़ल ) : बालस्वरूप ‘राही’ 1. जानता हूँ कि ग़ैर हैं सपनेऔर खुशियाँ भी ये अधूरी हैंकिंतु जीवन गुज़ारने के लिएकुछ ग़लत फ़ेहमियाँ ज़रूरी हैं 2. हसरतों की…
लगे जब चोट सीने में हृदय का भान होता है ( ग़ज़ल ) : बालस्वरूप ‘राही’ लगे जब चोट सीने में हृदय का भान होता हैसहे आघात जो हँसकर वही…
अचानक दोस्ती करना, अचानक दुश्मनी करना ( ग़ज़ल ) : बालस्वरूप ‘राही’ अचानक दोस्ती करना, अचानक दुश्मनी करनाये उसका शौक है यारों सभी से दिल्लगी करना सभी जज़्बात को दीवानगी…
सिखों के पाँचवें गुरु – श्री गुरू अर्जुन देव जी का जीवन और उपदेश : डॉ. चरनजीत सिंह श्री गुरू नानक देव जी की पाँचवीं जोत साहिब श्री गुरू अर्जुन…
साहित्य, संस्कृति और शोध के क्षेत्र में सहयोग का नया अध्याय इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए), नई दिल्ली और लेखक गांव (स्पर्श हिमालय फाउंडेशन), थानो, देहरादून के मध्य एक…
साहित्य संवाद : अलका सरावगी
दोहे : विनयशील चतुर्वेदी सहज सरल सुंदर सुखद, कविता ज्ञान निकुंज ।बरबस मन मधुकर विमल, मोहित अक्षर पुंज ।। हृदय विवेक वीहीन कवि, बिहरेंं काव्याकाश ।रजत रेख घन दामिनी, ज्यों…
मानक देवनागरी में ‘ळ’ चिह्न को शामिल किया जाना (आलेख ) : डॉ. वरुण कुमार ऊपर संलग्न पृष्ठ को देखें। केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय ने देवनागरी लिपि के नवीनतम मानकीकरण में…
मानकीकरण की अवधारणा और देवनागरी लिपि (आलेख) : डॉ. वरुण कुमार “देवनागरी लिपि का मानकीकरण!” यह पदबंध ही कुछ अजीब नहीं लगता? लिपि का मानकीकरण!! लिपि के चिह्न और लेखन…
शब्द चिंतन मोड पर ( कविता ) : अनीता वर्मा जो हो रहा हैवो तो होना ही थापर जो नहीं चाहिए होनाउस होने के होने काक्या होना और क्या नहीं…
मनोज श्रीवास्तव ( साक्षात्कार ) : मानस के अनछुए पहलू डॉ. संध्या सिलावट जी ने लिया मनोज श्रीवास्तव जी, मुख्य चुनाव आयुक्त, मध्य प्रदेश का साक्षात्कार भारतीय समाज में तुलसीदास…
पी जा हर अपमान ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ पी जा हर अपमान और कुछ चारा भी तो नहीं ! तूने स्वाभिमान से जीना चाहा यही ग़लत थाकहाँ पक्ष…
जिंदगी क्रम ( गीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ जो काम किया, वह काम नहीं आएगाइतिहास हमारा नाम नहीं दोहराएगाजब से सुरों को बेच ख़रीदी सुविधातब से ही मन में बनी…