ब्लडी कोठी – (कहानी)
ब्लडी कोठी – दिव्या माथुर ‘चोर भी दो घर छोड़कर डाका डालता है, मम्मी।’ बड़े बेटे सुमित की बात सुनकर मानसी का दिल दहल गया; अपने ही छोटे भाई के…
हिंदी का वैश्विक मंच
ब्लडी कोठी – दिव्या माथुर ‘चोर भी दो घर छोड़कर डाका डालता है, मम्मी।’ बड़े बेटे सुमित की बात सुनकर मानसी का दिल दहल गया; अपने ही छोटे भाई के…
पहाड़ों के बीच धर्मों का संगम : राजगीर डॉ वरुण कुमार दिल्ली आने के बाद मैं जब भी मैं अपने कोलकातावासी मित्र अनिल जी से पूछता हूँ – “कहीं गए?”…
बचाव – दिव्या माथुर निंदिया के बाबा कहा करते थे कि दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं; एक तो वे जो पक्षियों की तरह सूरज के उगते ही…
संदेह – दिव्या माथुर ब्रायन पीटर्स पूर्णतः आश्वस्त था; चौपड़ का हर मोहरा उसकी मर्ज़ी के मुताबिक पर चल रहा था। संबंधी, मित्र, पड़ोसी और सहकर्मी उसकी तारीफ़ करते नहीं…
सांप-सीढ़ी – दिव्या माथुर सिनेमाघर के घुप्प अंधेरे में भी राहुल की आंखें बरबस खन्ना-अंकल के उस हाथ पर थीं जो उसकी मम्मी के कंधों और कमर पर बार-बार बहक…
आशियाना – दिव्या माथुर नर्स एडवर्ड ने आशा को उठा कर गाव-तकियों के सहारे बैठा दिया और बिस्तर के दोनों तरफ़ लगी स्टील की शलाकाओं को उठा कर उसे व्यवस्थित…
एक था मुर्गा – दिव्या माथुर डाक्टर पीटर्स के रोगनिदानुसार टिनिटस का सम्भवतः कोई इलाज न था; कैसे जी पाएगी अक्षता अपने कानों में इस शोर के साथ? जैसे-जैसे सांझ…
बेचारी सिंथिया – दिव्या माथुर हायसिंथ अथवा थियो, उर्फ़ ‘पुअर सिंथिया’ अथवा ‘घुन्नी सिंथिया’ जैसे नामों और उपनामों से सुसज्जित, सिंथिया को सिर्फ़ उसकी माँ ईडिथ ही उसे पूरे नाम…
पुरु और प्राची – दिव्या माथुर बद्रीनारायण ओसवाल का इकलौता वारिस था उनका बेटा, हरिनारायण जो एक अमेरिकन लड़की से शादी करके कैलिफ़ोर्निया में जा बसा था। हालांकि हरिनारायण की…
एडम और ईव – दिव्या माथुर बात ज़रा सी थी; एक झन्नाटेदार थप्पड़ ईव के गाल पर पड़ा। वह संभल नहीं पाई, कुर्सी और मेज़ से टकराती हुई ज़मीन पर…
नरेश शांडिल्य का नया दोहा ‘मेरी अपनी सोच’ का लोकार्पण नया दोहा संग्रह : ‘मेरी अपनी सोच’ (प्रकाशक : श्वेतवर्णा) लोकार्पण के अवसर पर कवि अनिल जोशी, दिव्या माथुर और…
माधवराव सप्रे राष्ट्रीय समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान भोपाल में तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों पर चर्चा ज्ञान तीर्थ माधवराव सप्रे राष्ट्रीय समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान भोपाल में तीन…
अनिल जोशी की कविताओं प्रति यह वैश्विक लगाव उनके कविता के सशक्त होने का प्रमाण है – अभय कुमार अनिल जोशी के प्रसिद्ध कविता संग्रह’ नींद कहाँ है’ के दूसरे…
हिन्दी के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन : उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ वैश्विक हिन्दी परिवार द्वारा सहयोगी संस्थाओं सहित नई दिल्ली में आयोजित विश्व हिन्दी दिवस एवं अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन के मद्देनजर हिन्दी…
मौसा… यूरी बोत्वींकिन जब मैं पैदा हुआ था मेरे पिता दूसरे शहर में थे एक सैनिक संस्था में कोर्स करते हुए, कुछ महिनों बाद ही आ पाए। अस्पताल से मेरी…
कुम्भ पूर्णता का प्रतीक है : वैश्विक हिंदी परिवार की महाकुम्भ पर एक विशेष संगोष्ठी प्रयागराज में एक विशेष समयांतर पर आयोजित किया जाने वाला कुम्भ मेला, भारतीय लोक संस्कृति…
कोलंबो (श्रीलंका) में विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी सम्मेलन का आयोजन कोलंबो (श्रीलंका) में विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, भारतीय दूतावास, विदेश मंत्रालय द्वारा…
प्रवासी भारतीय दिवस पर सिंगापुर से तीन पुस्तकों का विमोचन प्रवासी दिवस के विशेष अवसर पर,सिंगापुर में प्रवासी साहित्य की तीन पुस्तकों का विमोचन भारतीय उप उच्चायुक्त श्रीमती पूजा टिल्लू…
विश्व हिंदी दिवस 2025: हिंदी राइटर्स गिल्ड कनाडा और भारतीय कौंसलावास टोरंटो द्वारा भव्य आयोजन 11 जनवरी 2025 को ब्रैम्पटन के चिन्मय हेरिटेज सेंटर में हिंदी राइटर्स गिल्ड कनाडा ने…
पूनम कासलीवाल शिक्षिका, लेखिका और कवयित्री। एक प्रकाशित हिंदी उपन्यास – रुके – रुके से कदम और तीन काव्य संग्रह (सह-लेखन में)। हिंदी साहित्य में गहरी रुचि और अपनी रचनात्मकता…