Author: वैश्विक हिंदी परिवार

‘नियति’ ( कविता ) : डॉ. शिप्रा मिश्रा 

‘नियति’ : ( कविता ) महीनों बाद अस्पताल से छूटकर आज काम पर फिर वापस आई गुलबिया एक बच्ची को गोद में थामे दो और बच्चे उसका आँचल पकड़े एकटक…

“रेडियो की भाषा” : डॉ.सुनील देवधर 

“रेडियो की भाषा” : निबंध इस्लामी दार्शनिक जलालुद्दीन रूमी ने अपनी मसनवी में एक कहानी बयान की है। एक आदमी ने चार अलग-अलग भाषा बोलने वालों को एक दिरहम दिया…

(विश्व पर्यावरण दिवस) : दोहे – डॉ. बबिता ‘किरण’

(विश्व पर्यावरण दिवस) : दोहे – डॉ. बबिता ‘किरण‘ मेरे आंगन झूमती, हरियाली की डोर।करती चिड़ियों की चहक, सुखद सुहानी भोर।। बना हुआ है घोंसला, चीं चीं का है शोर।काश…

“मेघ कहाँ से बरसेंगे” : डॉ. अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’

“मेघ कहाँ से बरसेंगे” : कविता काट रहे हो जब पेड़ों को,मेघ कहाँ से बरसेंगे। मानव लगा हुआ है देखो,अंधाधुंध कटाई में।बिन बारिश सब हरियाली अरु,पैदावार खटाई में।।जल बिन अवनी…

प्रकृति, संवेदना और मानवता का काव्यात्मक घोष – ”धरती ने भिजवाई पाती“ : समीक्षक – डॉ. ऋतु शर्मा ननंन पाँडे

प्रकृति, संवेदना और मानवता का काव्यात्मक घोष – ”धरती ने भिजवाई पाती“ : समीक्षा साहित्य जब केवल शब्दों का विन्यास न रहकर संवेदना का सजीव स्वर बन जाता है, तब…

“धरती ने भिजवाई पाती” : संगीता चौबे ‘पंखुड़ी’

“धरती ने भिजवाई पाती” : ( कविता ) धरती ने भिजवाई पातीजिसमें पीड़ा और उदासीझर झर उसके आँसू बहतेतेज गति से तरु जब कटते…. सुनो मनुज! अब मेरी गाथाकब तक…

हिंदुस्तानी प्रचार सभा में भारतीय भाषा के लेखकों और विद्वानों का एक विमर्श, रचना पाठ और स्नेह मिलन का आयोजन सम्पन्न

हिंदुस्तानी प्रचार सभा में भारतीय भाषा के लेखकों और विद्वानों का एक विमर्श, रचना पाठ और स्नेह मिलन का आयोजन सम्पन्न दिनांक 2 जून, 2026 को हिंदुस्तानी प्रचार सभा में…

सरकारी तख्ता (तुर्की व्यंग्य) : अजीज नेसिन

सरकारी तख्ता (तुर्की व्यंग्य) : अजीज नेसिन क्या आप जानते हैं कि सरकार का तख्ता कैसे उलटा जाता है? संभव है, आप कभी इस प्रकार का कार्य संपन्न करने के…

रिश्वतखोर लिमिटेड (तुर्की व्यंग्य) : अजीज नेसिन

रिश्वतखोर लिमिटेड (तुर्की व्यंग्य) : अजीज नेसिन जिस विभाग के कर्मचारियों को रिश्वत खाने की बीमारी लग जाए तो वे उससे कभी मुक्त नहीं होना चाहते हैं। और उसके राह…

 (कविता-अनुवाद) : “लेटर टू मदर”- “माँ को पत्र”-  प्रीति अग्रवाल

“लेटर टू मदर”- सर्गेई येसेनिन : “माँ को पत्र”- प्रीति अग्रवाल : (कविता-अनुवाद) माँ को पत्र क्या तुम अभी जीवित हो, मेरी प्यारी बूढी माँ? मैं भी जीवित हूँ। तुम्हें…

अंत भला तो सब भला ( कहानी अनुवाद ) : रेखा राजवंशी

अंत भला तो सब भला ( कहानी अनुवाद ) : रेखा राजवंशी जब किराए की कार झाँसी स्टेशन के बाहर आकर रुकी, प्रिया का भाई अनिल ड्राइवर के पास वाली…

“101 मंगल विचार” पुस्तक का लोकार्पण सम्पन्न

“101 मंगल विचार” पुस्तक का लोकार्पण सम्पन्न दिनांक – 03 जून 2026 ,फरीदाबाद के सरोवर पोर्टिको , मैपल हॉल में कवयित्री, मंच संचालिका सुमन माहेश्वरी की सद्यः प्रकाशित पुस्तक “101…

साहित्य, संवेदना, आत्मीयता एवं स्मृतियों से परिपूर्ण एक अविस्मरणीय साहित्यिक गोष्ठी सम्पन्न

श्रद्धांजलि के स्वर, साहित्य के संग “तुम मेरी धमनियों में रक्त बन बह रहे हो,जैसे धरती में होती है अपनी सौंधी सुगंध।और फूलों में बसी भीनी-मधुर महक॥” 1 जून 2026…

साइकिल – स्वास्थ्य और खुशी का साथी : सांद्रा लुटावन (कविता)

साइकिल – स्वास्थ्य और खुशी का साथी : सांद्रा लुटावन (कविता) सुबह की पहली किरण जब धरती पर मुस्काती है,हल्की ठंडी हवा भी मन को छू जाती है।सड़क किनारे खड़ी…

पूर्वोत्तर एवं कश्मीर में देवनागरी लिपि का प्रयोग : चुनौतियाँ और संभावनाएँ

पूर्वोत्तर एवं कश्मीर में देवनागरी लिपि का प्रयोग : चुनौतियाँ और संभावनाएँ दिनांक 31 मई 2026 को विश्व हिंदी सचिवालय, केंद्रीय हिंदी संस्थान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद, वातायन तथा भारतीय भाषा…

प्रतीक्षा ( कविता ) : मंजु गुप्ता

प्रतीक्षा ( कविता ) : मंजु गुप्ता क्या कभी तुमने महसूसा हैवह क्षणजब देह की पोर- पोर मेंउग आती हैं आँखेंरोम-रोम बन जाता है कानऔर सहस्राक्ष सा अपलक गिनता हैकिसी…

पेड़ सब हरे होते हैं ( कविता ) : मंजु गुप्ता

पेड़ सब हरे होते हैं ( कविता ) : मंजु गुप्ता पेड़ सब हरे होते हैंहरा होना कितनी बड़ी बात है, जानते हो ?धूप, ताप, आँधी, बरसात, पतझड़ सहते हुए,…

Translate This Website »