घर का शतदल भूल गए – (कविता)
घर का शतदल भूल गए धन दौलत की खातिर अपना ,सारा दल-बल भूल गए,मैया छोड़ी ,बाबा छोड़े, घर का शत दल भूल गए। कैरी, इमली, सोंधी रोटी, भूले माटी की…
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घर का शतदल भूल गए धन दौलत की खातिर अपना ,सारा दल-बल भूल गए,मैया छोड़ी ,बाबा छोड़े, घर का शत दल भूल गए। कैरी, इमली, सोंधी रोटी, भूले माटी की…
वो तुमसे कहेंगे कि वो तुमसे कहेंगे कितुम्हारे सृजनात्मक सपनों के सतरंगी ताने बानेखूबसूरत हैंलेकिनइन्हें भ्रष्ट वास्तविकता के वस्त्र पहनाओ,भाई।हम निष्कलुष सौंदर्य कोसीधे सहने के अभ्यस्त नहीं हैं।वो तुमसे कहेंगे…
विस्मया : कुछ अनुत्तरित प्रश्न १ फिर भोर में बज उठी वंशी की तान, फिर चहक उठा चिड़ियों का मधुर गान। फिर महक उठी ताज़ा फूलों से बगिया, फिर साँसों…
रुक्मिणी द्वारिका के सारे राजकोष खाली करतराजू के एक पलड़े पररख दिये थे सत्यभामा ने।इस आशा में कि तुल जाएंगेदूसरे पलड़े में बैठे कृष्ण।हो जाएगा उनके पक्ष का पलड़ा ऊँचा।मगर…
मेरी कविता जब तुम्हें महसूस होकि दीपावली के दियेचारों ओर फैले हुए अन्धकार कोमिटा देने के लिये पर्याप्त नहीं हैं,कि रावण के दस सिर काट करगिरा देने वाला राम तुम्हें…
मीठा बन! जिह्वा से बोलोगे तो क्या घाव करोगे दूजे को ,ऐसे बोल बोलना बंधु , दोस्त बने ,जो हो दुश्मन।मीठा बन।हँस दे जो भी देखे तुझको, चूम ले माथा…
तुम मुझसे बात करते रहना , मेरे दोस्त! तुम मुझसे बात करते रहना , मेरे दोस्त!क्योंकि जब तुम मुझसे बात करते हो ,मेरा शहर मुझसे बात करता है। वो रास्ते…
क्या तुम मेरे साथ चलोगे ? क्या तुम मेरे साथ चलोगे ? वहाँ, जहाँ प्रभुता ही प्रभुता,हर क्षण है आनंद बरसता,जीवन प्याला रहे छलकता,दसों दिशाएँ, बहे सरसता। क्या तुम मेरे…
कौतूहल पर्वत के इस पार मैं सोचूँ पर्वत के उस पार क्या होगा ? शायद उधर झील हो सुंदर कमल-पुष्प खिलते हों भीतर, सूर्य की किरणें चमकें जल पर जैसे…
अर्थ जिस प्रकार अति तीव्र गति सेपरिभ्रमण करते चक्र की गतिदृष्टव्य नहीं होतीएवं यह मिथ्याभास हो जाता हैकि वह स्थिर है, जड़ है,ऐसा ही तुम्हारे जीवन का कर्मरथ है, मित्र।वीणा…
एक फोटो भर नहीं मैं कोई फोटो भर नहीं मैं मात्र चेहरा भी नहीं जिसे देखो रॉयल डॉल्टन क्रिस्टल के फ्रेम में जड़ो, सराहो रंगीन सपने सजाओ प्रेम गीत गाओ…
स्त्री मरेगी नहीं स्त्री मरेगी नहीं अलस्सुबह खिलेगी गुलाबों की तरह महकती रहेगी मोगरे जैसी बिखरती रहेगी ज़िन्दगी के मरुथल में तुहिन कणों सी कंधे के थैले में भर कर…
बलात्कार माँ ने कहा था तुम लड़की हो अकेले कहीं मत जाना रात बिरात देर से मत आना बात बेबात मत खिलखिलाना ज़माना खराब है किसी को कुछ मत बताना…
बिल्लौची लड़की अब माँ है माँ रोती हुई बच्ची को चुपाती लोरी सुनाती न सोये तो डराती ‘सो जा, नहीं सोई तो बिल्लौची आ जाएगा’ बच्ची सो जाती सुबह उठती…
मुखौटे पढ़ी लिखी लड़की काम पर जाती है हवाई जहाज़ उड़ाती है स्पेस शिप चलाती है बिल्डिंग्स बनाती है और टीचर बनकर जीवन कैसे जियें पाठ पढ़ाती है वो इंजीनियर…
इश्तेहार भारत हो या ऑस्ट्रेलिया यूरोप हो या अमेरिका अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस बार – बार आता है स्त्री अधिकारों के चर्चे स्वतंत्रता के नारे और नारी – मुक्ति का युद्ध…
बाबा की धूल प्रभु मुझे नव जन्म में करना, बाबा की बगिया का फूल । और नहीं तो मुझको करना, बगिया की मिट्टी की धूल । क्यारी में पानी देते…
कल फिर सुबह नई होगी दिन को ही हो गई रात-सी, लगता कालजयी होगी कविता बोली- “मत उदास हो, कल फिर सुबह नई होगी।” गली-गली कूड़ा बटोरता, देखो बचपन बेचारा…
मेरी कविता कहती खामोशी की कहानी तू है मौन की अभिव्यक्ति तू सुख-दुख की मेरी सहेली है साथ तेरे हर पल नव जीवन बिन तेरे सब कुछ लगे निरर्थक निराशा…
मॉरीशस वर्षों पहले भारत के कुछ लाल एग्रीमेंट पर लाये गए गिरमिटिया कुली कहलाये वे उपनिवेशी था वह काल नंबर थी एकमात्र पहचान खून-पसीना भरपूर बहाया हड्डियां भी तुड़वायीं अपनी…