विशेषण – डॉ. अशोक बत्रा (कविता)
विशेषण (कविता) एक दिन संज्ञा और सर्वनाम नेविशेषण का पकड़ लिया गिरेबान!और चिढ़ाते हुए बोले —हमारे अंगने में तुम्हारा क्या काम? विशेषण मुस्कराया !बोला — संज्ञा बी!यह सर्वनाम तो तुम्हारा…
हिंदी का वैश्विक मंच
विशेषण (कविता) एक दिन संज्ञा और सर्वनाम नेविशेषण का पकड़ लिया गिरेबान!और चिढ़ाते हुए बोले —हमारे अंगने में तुम्हारा क्या काम? विशेषण मुस्कराया !बोला — संज्ञा बी!यह सर्वनाम तो तुम्हारा…
“सौ ग्राम जिंदगी”- डॉ. नीना छिब्बर अकल्पनीय है सांसों की पूंजी को कंजूसी से खर्चना तोला माशा का हिसाब रख फूंक -फूंक कर गर्म पलों को ठंडा कर के देना…
“युद्ध और स्त्रियाँ”- डॉ.नीना छिब्बर स्त्रियाॅं चाहे हो ताकतवर या कमजोर देश की युद्ध चाहे शीत हो या विध्वंसक दिन का उजाला हो या घुप अंधेराकभी टैंकों की गड़गड़ाहट गूंजेकभी…
“धीरज आखिर टूट गया”- डॉ. वेद व्यथित और छुपाता दर्द हृदय में अब कितना दर्द हृदय की सब सीमायें लांघ गया कितने ज्वार उठे और कितने लौट गये कितने मोती…
तुम्हारे लिए मुस्कराए हुए हूँ (कविता) हृदय में बहुत कुछ छुपाये हुए हूँ तुम्हारे लिए मुस्कराए हुए हूँ . क्या क्या नही दुःख उठाया है मैंने दुपहरी को सिर पर…
धीरज आखिर टूट गया (कविता) और छुपाता दर्द हृदय में अब कितना दर्द हृदय की सब सीमायें लांघ गया कितने ज्वार उठे और कितने लौट गये कितने मोती तट बंधों…
डॉ. रुद्रेश नारायण मिश्र ‘2011 और नैनी झील’ (कविता) 2011, अब,कैलेंडर से,उतर चुका है।पर आज भी,जब, दिसंबर की हवा,चलती है,मैं, अचानक,नैनी झील के किनारे,पहुँच जाता हूँ।देवदार,फिर हिलते हैं,गुब्बारे वाला बच्चा,फिर,…
जीवन की मूल धारा (कविता) जन्म लेने पर रोनादुनिया से जाते हुए दुखी होनाइस लम्बे अंतराल में होती हैएक लम्बी यात्रायात्रीगण रहते हैं क़तार मेंउधेड़ते -बुनते हुए अपने आप कोक्षणिक…
अपने अपने ठीया (कविता) युद्ध कभी अकेले नहीं लड़े जातेदूसरे का होना बहुत जरूरी है ।अकेले तो स्वयं से भी नहीं लड़ा जातावहाँ भी एक मन के दो टुकड़े होते…
उपमान और प्रतीक (कविता) एक दिन झुँझलाकर बोला वो!ये उपमान और प्रतीकदोनों बहुरूपिया हैंदोनों खुद के लिए नहीं जीतेऔरों के काम आते हैंफिर अलग क्यों कहलाते हैं!कभी उपमान प्रतीक बन…
– डॉ महादेव एस कोलूर ***** वृक्ष आदमी ने वृक्ष से कहा —कुछ तो बोलो, यूँ क्यों चुप हो।वृक्ष मुस्कुराया,पत्तों की सरसराहट में बोला —“जिन्होंने सब कुछ खोकर भी दिया,वो…
डॉ. मंजु गुप्ता ***** फूल की ज़िद बाल हठराज हठत्रिया हठसारे संसार में प्रसिद्ध हैंपर फूल की ज़िद की अभी तक अनदेखी हैइस ओर किसी की दृष्टि ही नहीं गईहमने…
डॉ॰ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश 🪷 भानु नित्य भोर में 🪷 भानु नित्य भोर में रश्मियाँ प्रसारता।भृंग बाग में सदा धुन मधुर सँवारता॥पेड़ नित्य झूमते बाँह नित पसारते।पुष्प…
डॉ॰ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश 🌸 सत्कर्म के डगर पर 🌸 (दिग्पाल/ मृदुगति छंद) सत्कर्म के डगर पर, सुविचार हो हमारा।सद्भाव सत्य संबल, सन्मार्ग हो सहारा॥मधुरिम सदैव वाणी,…
पंकज शर्मा, एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर, आजतक ***** मंगल ही मंगल दीवाली के दिन है खीलों खिलौनों बताशों के दिन हैं,पुरुओं औ दीयों उजासों के दिन हैं,बच्चों के हुल्लड़ खुशहाली के दिन…
सुनीता पाण्डेय ***** हम ‘केवल श्रद्धा’ नहीं हमें नहीं बहना‘विश्वास-रजत-नग-पग-तल’ मेंहमें बहना है तुम्हारे साथया तुम्हारे समानान्तर. हम जीती जागतीहाड़ मांस कीऔरतें हैंऔरतें नहींइंसान।हमें नहीं चाहिएमहानता का ताजहमें भी सहज…
लक्ष्मी जयपोल ***** परिवार- हमारे विश्व कूँजी परिवार जीवन के सर्वोत्तम प्राथमिकता हैपरिवार ही जीवन और प्राण हैपरिवार हैतो हम हैपरिवार हमारी पहचान है। परिवार हमें जीवन दान देता हैपरिवार…
डॉ॰ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’ *** रिमझिम बरसात भरी (उड़ियाना छंद) रिमझिम बरसात भरी, सावन सुहावनी।शिव जी का ध्यान धरें, ऋतु है सुपावनी॥नद नाले तृप्त हुए, हरियाली छायी।कोयल की कुहू-कुहू, मन…
डॉ. अशोक बत्रा, गुरुग्राम छुअन- छुअन में फर्क बहुत है! माँ छूती है बादल जैसेबारिश जैसे, अमृत जैसे!स्पर्श पिता काधूप हो जैसे, सूरज जैसे।दादा दादी नाना नानीकिशमिश जैसे और छुआरे।सखी…
डॉ. शारदा प्रसाद *** अपनी नागरी लिपि हिंदी हो जन-जन की भाषाहिंदी हो हर-मन की आशा!बने सकल विश्व में सिरमौरऐसी है सबकी अभिलाषा!! सब मिलकर करें प्रयासहर बोली का हो…