परजीवी तिलचट्टे – विनयशील चतुर्वेदी ( कविता )
परजीवी तिलचट्टे – विनयशील चतुर्वेदी ( कविता ) बहुत ही खतरनाक हैं येढूंढ लेते हैं अंधरेघुस जाते हैदरारों मेंगटरों मेंहर उस जगह जहाँ होता हैअंधेरा………लाखों लाठियाँ लेकर भागोइनके पीछेहज़ारों तरह…
हिंदी का वैश्विक मंच
परजीवी तिलचट्टे – विनयशील चतुर्वेदी ( कविता ) बहुत ही खतरनाक हैं येढूंढ लेते हैं अंधरेघुस जाते हैदरारों मेंगटरों मेंहर उस जगह जहाँ होता हैअंधेरा………लाखों लाठियाँ लेकर भागोइनके पीछेहज़ारों तरह…
“गिरमिटिया देशों मे हिन्दी पत्रकारिता एवं साहित्य का सामाजिक आंदोलन, स्वतंत्रता, शिक्षा एवं संस्कृति में योगदान”
कमरा नंबर 302 – डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ (व्यंग्य) उस ओयो होटल की गलियाँ किसी भूलभुलैया जैसी थीं, जहाँ रोशनी भी डरी-सहमी सी अंदर आती थी। बाहर बोर्ड पर…
“सीबीएसई विद्यार्थियों हेतु त्रिभाषा अध्ययन का स्वर्णिम अवसर”– ए. विनोद भारत को भाषाओं का देश कहा जाता है, और यह विशेषण अत्यंत सार्थक है। विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों का सहअस्तित्व…
“उदंत मार्त्तण्ड” द्विशताब्दी समारोह के 200 वर्ष पूर्ण होने पर ऐतिहासिक राष्ट्रीय संगोष्ठी भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता के सौजन्य एवं आमंत्रण पर दिनांक 23 मई 2026 को आयोजित “उदंत मार्त्तण्ड…
साहित्य, संवेदना और सृजन का सुंदर संगम : साहित्य संगम मंच की मासिक काव्यगोष्ठी दिनांक 26.05.2026 को साहित्यसंगममंच की मासिक काव्यगोष्ठी अत्यंत गरिमामयी एवं शानदार वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई।…
कविता प्रभा राष्ट्रीय साहित्य समूह ( त्रिवेणी )
कवि – लेखक – समीक्षक नरेश शांडिल्य के तीन गद्य संग्रहों पर चर्चा
पुल – डॉ. वंदना मुकेश ( कविता ) पुलउस पीढ़ी से इस पीढ़ी तककई पुल बनने हैं।कुछ कदम तुम चलो,कुछ मैं। याद रखना,बनाओ जब पुल तोइनमें सरकारी सीमेंट न हो,दीवारों…
शोर – डॉ. वंदना मुकेश ( कविता ) मैं कुछ कहती हूँतुम भी कुछ कहते हो।जो मैं कहती हूँकुछ वैसा ही तुम भी कहते हो। न तुम सुनते होन मैं…
दृश्य: सुबह – डॉ. शैलजा सक्सेना ( कविता ) हवा शान्त है,रात बरसता मेह रुक गया,सड़कें पानी पीकर लेटीं,पत्ते सभी नहाये दिखते,सूरज भी अब बदन पौंछ कर,आने की तैयारी में…
पछतावा – डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ ( व्यंग्य ) शहर के सबसे बड़े मल्टी-स्पेशालिटी अस्पताल के आईसीयू वार्ड के बाहर वेटिंग एरिया में एक अजीब सी गंध थी फिनाइल…
दृश्य: वर्षा – डॉ. शैलजा सक्सेना ( कविता ) आज धूप की मुठ्ठी बाँधेसूरज बादल पीछे दुबकाऔर हवा की बन आई हैघर-घर जा कर चुगली करती। सूरज व्याकुल देख रहा…
नेपाल में अंतरराष्ट्रीय संबंध बना सम्मान का सेतु ई त खबर ना,इतिहास बनत बा।भोजपुरी विरासत और कला संस्कृति को 25 वर्षों से लगातार अंतरराष्ट्रीय फलक पर स्थापित करने पर नेपाल…
“पुष्पा सिन्हा के उपन्यास ‘जेल समाधि’ का गरिमामय विमोचन” दिनांक 16.05.2026 को नई दिल्ली के आईटीओ क्षेत्र में स्थित हिन्दी भवन के सभागार में केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, शिक्षा मंत्रालय, भारत…
“साख पर बट्टा”- डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ उस दिन घर के स्टोर-रूम के सबसे अंधेरे कोने में, जहाँ मकड़ियों ने अपनी नई रियासत बसाई थी, एक दिल दहलाने वाला…
“धूप छांव”- डॉ. नीना छिब्बर सुख के संग दुख मुस्कान के साथ ऑंसू आशा के संग निराशा गीत की धुन में खामोशी मंजिल की राह में रूकावटें विजय के संग…
“एक साँस”- डॉ. शैलजा सक्सेना साँसों की भीड़ मेंएक साँस है,सब साँसों को साँस बनातीजैसे वो साँस नहींएक पेड़ हो ऑक्सीज़न का! जब दिन की भाग–दौड़ में साँसें शोर मचाती,सब…
“रफ़ी के सुरों में गूंजती गाडगिल की आवाज़”- स्वरांगी साने ‘दुःख-सुख की हर एक माला, कुदरत ही पिरोती है’ सन् 1981 की फ़िल्म ‘कुदरत’ का यह गीत है, जिसे आर.डी.…
“स्नेहिल आत्मीय मिलन कार्यक्रम सम्पन्न” दिनांक 24 मई 2026 “स्नेहिल आत्मीय मिलन कार्यक्रम” आयोजित हुआ , यह अत्यंत आत्मीय, सौहार्दपूर्ण एवं यादगार रहा। सभी वरिष्ठ लेखक, कवि एवं कवयित्रियों की…