धरती का दर्द – अनीता वर्मा
धरती का दर्द – अनीता वर्मा आवारा बादल खुशी से गुनगुनाता हुआ नीचे जा रही नदी को देख कर दीवाना हो रहा था। साफ हवाएँ उनके इश्क को देखकर तेजी…
हिंदी का वैश्विक मंच
धरती का दर्द – अनीता वर्मा आवारा बादल खुशी से गुनगुनाता हुआ नीचे जा रही नदी को देख कर दीवाना हो रहा था। साफ हवाएँ उनके इश्क को देखकर तेजी…
ट्यूलिपों के देश नीदरलैंड की जादुई लोक कथाएँ: संस्कृति और कल्पना और यथार्थ का सुन्दर संगम : समीक्षक – रेखा राजवंशी मुझे 1988 में ट्यूलिपों के देश नीदरलैंड जाने का…
अभी कई सारे गीत उन पर लिखे जाने की प्रतीक्षा में हैं – स्वरांगी साने : समीक्षा डॉ. सुनील देवधर आकाशवाणी से सहायक निदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।…
इट हैपंस इन इंडिया: अनोखे रिश्ते – सच्चिदानंद जोशी इंडिगो की फ्लाइट से गौहाटी जा रहा था। सबसे आगे वाली सीट थी , विंडो के पास। फ्लाइट चलने को हुई…
हिंदी पत्रकारिता द्विशताब्दी महोत्सव : विरासत, चेतना और भविष्य का विमर्श इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, मीडिया केंद्र एवं माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान द्वारा आयोजित ‘हिंदी…
कवि-लेखक-समीक्षक नरेश शांडिल्य द्वारा सृजित नवीनतम तीन गद्य संग्रहों पर चर्चा का भव्य आयोजन सम्पन्न दिनांक 29.05.2026 को नई दिल्ली के कनाट प्लेस से सटे ऐतिहासिक जनपथ मार्ग पर स्थित…
‘विकसित भारत 2047’ के लिए शिक्षा पर पुणे में राष्ट्रीय मंथन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली की तीन दिवसीय राष्ट्रीय बैठक के प्रथम दिवस पर राष्ट्रीय संचालन समिति की…
आस्था, इतिहास और विज्ञान के बीच एक जटिल संवाद मनीष पाण्डेय ‘मनु’, नीदरलैंड्स दुनिया के सभी धर्मों, समुदाओं और भौगोलिक क्षेत्रों के इतिहास में कुछ ना कुछ ऐसी वस्तुएँ हैं…
अनूप भार्गव अक्सर जमाने कीज़बरदस्ती ओढाई गईतहज़ीब की चाशनी मेंफ़िसल के लौट जाते हैं , तुम्हारे शब्द मुझ तक पहुँच ही कहां पाते हैं ? तुम्हारे होठों के गोल होने…
एक जाते हुए शायर के साथ तमाम रूहानी दुनियाबी दास्तान ख़त्म हो जाती है | बशीर वद्र गये उनके जाने का ग़म उनकी शायरियों में रूलाई बन कर फूट रही…
साहित्य जगत से : बशीर बद्र को देशभर से श्रद्धांजलि रेखा राजवंशी (सिडनी, ऑस्ट्रेलिया) उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दोन जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो…
भारतीय भाषाओं के विकास का ब्ल्यू प्रिंट बनाने में भाषाविद् जुड़े भारतीय भाषाओं के प्रोत्साहन, संरक्षण एवं संवर्द्धन पर गंभीर चिंतन-मंथन, ठोस कार्य-योजना के प्रारूप पर विचार-विमर्श तथा उसके प्रभावी…
पुस्तक लोकार्पण एवं ‘सिंधु माता भजन एवं आरती’ विमोचन कार्यक्रम
“यादों की ढलती शाम और बद्र का उजाला”- डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ “उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो…
अदब के आफताब का अस्त: डॉ. बशीर बद्र को भावभीनी श्रद्धांजलि उर्दू अदब के इतिहास में , शायरी की दुनिया को अपनी सादगी से रोशन करने वाले अज़ीम शायर, पद्मश्री…
“बशीर बद्र : दिल से अल्लाह के घर तक” – (श्रद्धांजलि) बुत भी रक्खे हैं नमाज़ें भी अदा होती हैंदिल मिरा दिल नहीं अल्लाह का घर लगता है•बशीर बद्र चले…
“उजाले अपनी यादों के…” : बशीर बद्र को भावभीनी श्रद्धांजलि बशीर बद्र- उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दोन जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाएजिंदगी की…
शेष – अशेष : अनीता वर्मा ( कविता ) क्या होगा अगर तुम्हें जानेंगे बहुत लोगक्या ही होगा अगर तुम सिर्फ बातें ही करोगे समझदारी कीऔर क्या ही करोगे जब…
“गुंजन” राष्ट्रीय कहानी प्रतियोगिता में प्रसिद्ध रचनाकार डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ की कहानी को प्रथम पुरस्कार दार्जलिंग: पहाड़ों की मखमली धुंध, चाय के बागानों की हरीतिमा और किताबों की…
“यादों में गौरैया” उपन्यास को साहित्य सम्मान ( रांची ) प्रसिद्ध साहित्यकार और व्यंग्यकार डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ के चर्चित उपन्यास को ‘साहित्य चेतना मंच’ ने चुना वर्ष की…