Author: वैश्विक हिंदी परिवार

वंदिता बन्दिनी – (परिचय)

वंदिता बन्दिनी नाम: वंदिता सिन्हा जन्म-स्थान: सिवान (बिहार) वर्तमान निवास: ब्रैम्पटन, ओंटारियो शिक्षा: एम .ए (इतिहास), बी.एड., पीएच.डी. लेखन-विधाएँ: कविता, संस्मरण एवं वर्तमान परिस्थिति पर लिखना उल्लेखनीय गतिविधियाँ: लखनऊ रेडियो…

इन्द्रधनुषी लहर – (कविता)

इन्द्रधनुषी लहर सुदूर देश की पुरवाई सेआख़िर आ ही जाती है,मन की धानी परतों की इन्द्रधनुषी लहर . . .होली, दिवाली के रंगों औरदीयों में बिखरती –झिलमिलातीसुनहरी खनक सबको सुनाने।…

पिता का दिल – (कविता)

पिता का दिल मज़बूत शरीर है यह जो दिखताअंदर मेरे भी है –कोमल सा दिल, मेरा अपना। है धुँधली सी, पर हैं गहरी यादें,देखा है छुप-छुपचुपके से आँसू पोंछते। भारी…

बसंत आया था – (कविता)

बसंत आया था बसंत आया था . . .बसंत-ऋतु का जादू भरमाती,प्रकृति इतराती, निखारती रूपजगत में करती उमंग-बहार का पसेरा।चकित हो देखा, अजान मानुस है बेख़बर,बन मशीनी पुतला,जी रहा है…

ये पत्ते – (कविता)

ये पत्ते अभी कल ही तो ये पत्ते शाख से जुड़े,एक प्राण, एक मन,एक जीव हो फले–फूले,अपने चरम उत्कर्ष की –ललक लिए जीए, अपनी पूर्णता से।आज पीली चादर में परिणित,शाख…

रेणुका शर्मा – (परिचय)

रेणुका शर्मा जन्म-स्थान: अजमेर, राजस्थान, भारत वर्तमान निवास: सास्काटून (सास्केच्वान) कैनेडा शिक्षा: स्नातकोत्तर, (हिंदी), एम. फि ल., पीएच.डी,.पी.जी. डिप्लोमा मासकम्युनिकेशन (राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर), सीनियर रिसर्च एसोशिएट मुंबई विश्वविद्यालय। कस्टमर एंड…

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के ‘भारतीय रंग महोत्सव’ के समापन पर एलजी समेत राजपाल यादव ने की शिरकत – (रिपोर्ट)

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के ‘भारतीय रंग महोत्सव’ के समापन पर एलजी समेत राजपाल यादव ने की शिरकत 20 दिन के ‘भारत रंग महोत्सव’ में रंगमंच के कई रंग दिल्ली वालों…

‘भारंगम’ में दिखे कई देशों के रंग, सीमाओं के पार फेस्ट – (रिपोर्ट)

‘भारंगम’ में दिखे कई देशों के रंग, सीमाओं के पार फेस्ट राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के ‘भारत रंग महोत्सव 2025’ के तहत एक रंग, श्रेष्ठ रंग की भावना को समाहित किए…

भारत मंडपम में ‘विश्व पुस्तक मेला – 2025’ का आयोजन किया गया – (रिपोर्ट)

भारत मंडपम में “विश्व पुस्तक मेला – 2025 आयोजन दिनांक 01.02.2025 से 09.02.2025 के दौरान इन्हीं दिनों नई दिल्ली के भारत मंडपम में “विश्व पुस्तक मेला – 2025 आयोजित किया…

मेरी आशाओं का देश – (कविता)

मेरी आशाओं का देश मेरा स्वदेश वो धरती हो,जहाँ सत्यमेव जयते सच हो हर वृक्ष जहाँ की थाती हो,जिसमें हर पशु की गिनती होजिसमें हर मानव,मानव हो, साकारसत्य शिव सुन्दर…

गणित के आयाम – (कविता)

गणित के आयाम प्रकृति जब तूलिका चलाती हैतो लिखती गणित के आयामयही रचना वेदों का आधारजीवन के रहस्य खोलता है गणित ज्ञान न्याय समता, महत सिद्धांतगणित सिखलाता सहज विधानगणित का…

मुझको ले चल तू बादल पर – (कविता)

मुझको ले चल तू बादल पर (नातिनी को पीठ पर चड्डू देते समय) चल मेरे घोड़े तू तिक तिक,मुझको ले चल तू बादल परपहले देखूँ क्या है ऊपर,और देखूँ क्या…

प्रणय गीत – (कहानी)

प्रणय गीत मैं प्रणय के गीत गाऊँ या न गाऊँतुम मुझे स्वीकार लेनाप्रात: अँधियारे सितारे जो छुपेतुम उन्हें मत भूल जाना …मैं प्रणय … समय की नियत है ऐसीदुःख सदा…

पागल मन यूँ ही उदास है – (कविता)

पागल मन यूँ ही उदास है पागल मन यूँ ही उदास है,कितना सुन्दर आसपास है। काले बादल के पीछे सेझाँक रही इक किरण सुनहरी,सारे दिन की असह जलन केबाद गरजती…

मगर उपवन मिला – (कविता)

मगर उपवन मिला कुछ मिले काँटे मगर उपवन मिला,क्या यही कम है कि यह जीवन मिला। घोर रातें अश्रु बन कर बह गईं,स्वप्न की अट्टालिकायें ढह गईं,खोजता बुनता बिखरते तंतु…

देवदार के पेड़ – (कविता)

देवदार के पेड़ शीश झुका कर ज्यों रोये हैंदेवदार के पेड़ बादल के घर ताक-झाँककरने की उनको डाँट पड़ी हैभरी हुई पानी की मटकीसर से टकरा फूट पड़ी है सूरज…

तोड़ कर सब वर्जनाएँ – (कविता)

तोड़ कर सब वर्जनाएँ तोड़ कर सब वर्जनाएँस्वप्न सारे जीत लेंगेएक दिन हम॥ राह में जो धूल कीआँधी उड़ी,क्या पता क्योंसमय की धारा मुड़ी,मंज़िलों के रास्ते भीथे ख़फ़ा,साथ में फिर…

विश्व हिंदी सचिवालय का 17वाँ कार्यारम्भ दिवस – (रिपोर्ट)

विश्व हिंदी सचिवालय का 17वाँ कार्यारम्भ दिवस 12 फ़रवरी, 2025 को विश्व हिंदी सचिवालय ने अपने आधिकारिककार्यारम्भ की 17वीं वर्षगाँठ के अवसर पर भव्य कार्यक्रम तथा ‘तुलसीदास के काव्य का…

लतिका बत्रा की पुस्तक ‘जुगनू यादों के’ का भव्य लोकार्पण – (रिपोर्ट)

लतिका बत्रा की पुस्तक ‘जुगनू यादों के’ का भव्य लोकार्पण हिन्दी भवन, दिल्ली में दस फ़रवरी 2025 को सुविख्यात लेखिका लतिका बत्रा की पुस्तक ‘जुगनू यादों के’ का भव्य लोकार्पण…

बसंत तेरे स्वागत में – (कविता)

बसंत तेरे स्वागत में बसंत तेरे स्वागत मेंठूँठ पड़े हिस्सेपाते संजीवनसिरहन, थिरकन, नवरूपनशब्द-रंग में नितरमन का सूनापनपहुँचातामेरी टीस तुम तककोमल कोंपल छलककार्डिनल कूजत अथक ***** – मधु भार्गव

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