Author: वैश्विक हिंदी परिवार

एनएचके वर्ल्ड-जापान

एनएचके वर्ल्ड-जापान एनएचके वर्ल्ड-जापान, जापान की सार्वजनिक मीडिया संस्था एनएचके की अंतरराष्ट्रीय प्रसारण सेवा है। यह विश्व भर के दर्शकों के लिए टेलीविज़न, रेडियो और ऑनलाइन माध्यमों से जापान एवं…

‘हिंदी चेतना’ पत्रिका

‘हिंदी चेतना’ पत्रिका 1998 से सेवानिवृत्त होकर श्री श्याम त्रिपाठी जी ने हिन्दी चेतना का श्री गणेश किया। आपने विश्व भर के साहित्यकारों और पाठकों को हिन्दी चेतना से जोड़ा।…

फीजी में पत्रकारिता – (शोध आलेख)

फीजी में पत्रकारिता फीजी में पत्रकारिता फीजी में मिश्रित भाषा से “फीजी-बात” का जन्म हुआ। ‘फीजी बात’ उनके विचारों के आदान-प्रदान का सरल माध्यम थी। आज यही ‘फीजी बात’ फीजी…

हिंदी – थाई शब्दकोश

हिंदी – थाई शब्दकोश संग्रहकर्ता – सत्यव्रत शास्त्री शब्दकोश देखने के लिए नीचे लिंक को क्लिक करें https://archive.org/details/uGWO_hindi-thai-shabdkosh-satya-vrat-shastri-collection/page/46/mode/2up

अहंकार की माया  – (कविता)

अहंकार की माया (दार्शनिक सन्दर्भ) मैंने सुना हैनश्वर शरीर बना है पंचमहाभूतों सेसभी हैं शाश्वत और सात्त्विकजो हैं मानव सृष्टि के आधारभूत तत्त्व,आत्मा भी है ईश्वर का एक अंशअखंड, अनश्वर,…

प्रेम-दिवस का जश्न  – (कविता)

प्रेम-दिवस का जश्न (श्रृंगार रस) प्रेम-दिवस की मधुशाला में तेरी आज प्रतीक्षा हैतेरे ओंठो की मदिरा से प्यास बुझाना बाकी है l तेरे नयनों के आकर्षण में मदहोशी का आलम…

बोल रहे हैं वृक्ष आज  – (कविता)

बोल रहे हैं वृक्ष आज (जलवायु परिवर्तन) वृक्ष बोलते वृक्षों से कहते एक कहानीहरे-भरे उद्यानों में, विस्तृत वन्य प्रदेशों मेंउनकी वाणी फैल रही है दुनिया के आँचल मेंमानव जाति नहीं…

 मेरा गाँव, मेरी परछाई  – (कविता)

मेरा गाँव, मेरी परछाई (ग्रामीण जीवन) यह था वसन्त ऋतु का आगमनप्रकृति का स्वागतम, जीवन का स्पंदन l मुझे भी था इसका इंतज़ारताकि कर सकूँ रगों में नयी ऊर्जा का…

बाला की अभिलाषा – (कविता)

बाला की अभिलाषा (युग परिवर्तन की नारी) ग्रामीण कुटिया में बैठी बाला ध्यानमग्न है पुस्तक मेंसंवाद सुनती रेडियो पर ‘मोदी’ की चर्चा चालू हैकभी किताब, कभी रेडियो, दोनों के प्रति…

समय की आवाज – (कविता)

समय की आवाज (आतंकवाद का शाप) बंदूकों से निकले धर्म, ग्रंथ हुए बेकारमानवता घायल हुई, पीड़ा का संचार l धमाका हुआ विस्फोट का, हिल गया संसारअंधकार छाया गगन में, धरा…

मन का विषाद  – (कविता)

मन का विषाद (विदेशी जीवन की एक झलक) दक्षिण ध्रुव का निकट पड़ोसी, कंगारू का देशसौम्य, सुशोभित, दृश्य मनोरम, उत्तम है परिवेश lहलवा पूड़ी भूल गया, खाते हैं बर्गर पिज़्ज़ापत्नी…

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