Author: वैश्विक हिंदी परिवार

अम्बिका शर्मा – (परिचय)

अम्बिका शर्मा जन्म-स्थान: आगरा, उ. प्र. वर्तमान निवास: मोंट्रीऑल/कैनेडा शिक्षा: स्नातकोत्तर बायोटेक्नॉलोजी प्रकाशित रचनाएँ: अहा ज़िंदगी, नव भारत टाइम्ज़, नवल उत्तराखंड लेखन-विधाएँ: कविता, गीत, नज़्म उल्लेखनीय गतिविधियाँ: संयोजक कबीर सेंटर…

साथी – (कविता)

साथी रहने दो प्रिय, मत लो मेरीलोहे की बेडौल कड़ाही।यह छिछली सी, बड़ी कड़ाही,दादी से माँ ने पाई थी।भारत छोड़ चली थी जब मैं,साथ इसे भी ले आई थी। अपनी…

दुविधा – (कविता)

दुविधा क्यों लिखूँ, किसके लिये?यह प्रश्न मन को बींधता है। लेख में मेरे जगत कीकौन सी उपलब्धि संचित?अनलिखा रह जाय तोहोगा भला कब, कौन वंचित?कौन तपता मन मरुस्थलकाव्य मेरा सींचता…

मेरा प्यार – (कविता)

मेरा प्यार टेक कर घुटने, झुका सिर,प्रेम का जो दान माँगे,हो किसी का प्यार लेकिन,प्यार वह मेरा नहीं है। रख नहीं पाया मान निज जो,प्यार वह कैसे करेगा?हीनता से ग्रस्त…

पीला पत्ता – (कविता)

पीला पत्ता रुको साथी, हटा लो हाथ को,न तोड़ो, छोड़ दो, पीले पड़े इस पात को। कहा तुमने, हरित इस डाल पर,यह अब नही सजता।नये, चिकने, चमकते किसलयों के बीच,है…

किस किस को ले डूबा पानी – (कविता)

किस किस को ले डूबा पानी किस किस को ले डूबा पानीपानी आख़िर निकला पानी ऐसे कब बरसा था पहलेअब के बरसा इतना पानी कच्चे घरों पर क्यूँ बरसा थापागल…

हुई मुद्दत कोई आया नहीं था – (कविता)

हुई मुद्दत कोई आया नहीं था हुई मुद्दत कोई आया नहीं थाये घर इतना कभी सूना नहीं था वो मेरा दोस्त था लेकिन कभी वोबुरे वक़्तों में काम आया नहीं…

इक मुसाफ़िर राह से भटका हुआ – (कविता)

इक मुसाफ़िर राह से भटका हुआ इक मुसाफ़िर राह से भटका हुआइक दिया मुंडेर पर जलता हुआ एक पत्ता शाख से गिरता हुआइक परिंदा आस्माँ छूता हुआ एक तितली फूल…

जहाँ में इक तमाशा हो गए हैं – (कविता)

जहाँ में इक तमाशा हो गए हैं जहाँ में इक तमाशा हो गए हैंहमें होना था क्या, क्या हो गए हैं नुमाइश कर रहे हैं ज़िन्दगी कीनज़ारा अच्छा ख़ासा हो…

अखिल भंडारी – (परिचय)

अखिल भंडारी जन्म: जालंधर (पंजाब) निवास: १९८३ से कैनेडा में संप्रति : आलेख, कहानी, और कविता लेखन सदस्य: हिन्दी राइटर्स गिल्ड संपादक: ग़ज़ल संपादन (साहित्य कुंज.नेट) वेब उपस्थिति : अखिल…

वागीश अंतरराष्ट्रीय संस्था यू.ए.ई. के द्वारा पुरस्कार की घोषणा – (रिपोर्ट)

हिंदी का व्यवहार तथा उसका प्रचार-प्रसार करने वाली एक संस्था ‘वागीश अंतरराष्ट्रीय संस्था यू.ए.ई.’ ने अभी एक ऐसा कदम उठाया है जैसा कभी पहले सुनाई नहीं दिया। संस्था ने मार्च…

कैसे भूला जा सकता है – (कविता)

कैसे भूला जा सकता है कैसे भूला जा सकता हैIIभारत माँ का अनोखा प्यारमाँ के बच्चे थे बड़े मिलनसारढूँढ़ता हुआ हिंदी ज्ञान का सागरज्ञान के साथ ही पाया अपारख़ुशी से…

गुरुदेश ने जो सिखाया – (संस्मरण)

गुरुदेश ने जो सिखाया -अतिला कोतलावल बारिश का मौसम था। रात भर हुई मूसलाधार बारिश के बाद प्रकृति ने कुछ विश्राम का रूप धारण किया। सारा वातावरण ठंडक की चादर…

हिन्दी से जुड़े मेरे सपने – (आलेख)

हिन्दी से जुड़े मेरे सपने -अतिला कोतलावल मैं भी उन स्वप्नदर्शियों में से एक हूँ जो अक्सर सपने देखा करते हैं और उनके साकार होने तक उन्हीं सपनों में विलीन…

अतिला कोतलावल – (परिचय)

अतिला कोतलावल संस्थापक निदेशक – हिंदी संस्थान, श्री लंका शिक्षिका – सवामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, कोलम्बो बाह्य प्राध्यापक – राज्यभाषा विभाग, श्री लंका सरकार बाह्य प्राध्यापक – लघु हिंदी कार्यक्रम,…

त्रिनिदाद में क्षेत्रीय हिन्दी सम्मेलन का आयोजन

त्रिनिदाद में क्षेत्रीय हिन्दी सम्मेलन का आयोजन पिछले सप्ताह, तीन दिन का क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन त्रिनिदाद के लिए भारतीय उच्चायुक्त आदरणीय महामहिम श्री प्रदीप कुमार राजपुरोहित जी व हिंदी के…

कोई लहर – (कविता)

कोई लहर समुन्द्र की कौन सी लहरहमें ले जाएगी किनारेकौन सा किनाराहमें थाम लेगामट्टी का कौन-सा हिस्सा हमेंजकड़ लेगाहम नहीं जानतेन ही जानना चाहते हैंक्योंकि जान नहीं पाएंगेबस यही चाहते…

समझदार लोग – (कविता)

समझदार लोग लोग हैं लोगलोग हैं समझदारसमझदार लोग उठाते हैं आवाजेंउठ रही हैं हर तरफ से आवाजेंपर उठ नहीं रहे हैं लोगजो उठा रहे हैं आवाजेंक्योंकि लोग हैं समझदारऔर समझदार…

जमने वाली बर्फ – (कहानी)

जमने वाली बर्फ -निखिल कौशिक लंदन से लगभग 210 मील उत्तरी पूर्व-ब्रिटेन के जिस छोटे से शहर में मैं रहता हूँ, यहाँ बहुत बर्फ तो नहीं पड़ती पर जब पड़ती…

निखिल कौशिक – (परिचय)

निखिल कौशिक जन्म : 1950, पुरानी दिल्ली में, दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से MBBS करने के उपरांत 1977 से यूके में, 1981 में FRCS की उपाधि के उपरांत…

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