एक क्षितिज – (कविता)
एक क्षितिज ऐसा लगता है कि समयहौले-हौले चुपचापसरकता जा रहा हैचुपके-चुपके। ऐसा लगता है किजैसे बालू के ढेर पर रक्खे हों पैरऔर रिसते जा रहे हों रजकण,तलवों के नीचे से,धरा…
हिंदी का वैश्विक मंच
एक क्षितिज ऐसा लगता है कि समयहौले-हौले चुपचापसरकता जा रहा हैचुपके-चुपके। ऐसा लगता है किजैसे बालू के ढेर पर रक्खे हों पैरऔर रिसते जा रहे हों रजकण,तलवों के नीचे से,धरा…
धर्म क्या है? धर्म वह है, जो शाश्वत है,अपने पराये के भेद से परे है। धर्म वह है, जो सजग है,सहज है, सुलभ है। धर्म वह है, जो क्षमाशील है,उदार…
वर्ष नव, हर्ष नव वर्ष नव, हर्ष नवजीवन उत्कर्ष नव उत्साह नव, अभिलाष नवपरियोजना संकल्प नवस्वप्न नव, योजना भविष्य नवउल्लास नव, संघर्ष नवउद्घोषणायें जोश नवविश्वास नव, परिहास नवगति शील उद्यमोन्मुख…
हम कामयाब हैं सफलता के क़दम छोटे,सभी अतिशय अहम होते,हम कामयाब हैं। छोड़ कर निज देश अति प्रिय,आये हैं विदेश दूर,बनाया है स्वदेश इसे,हम कामयाब हैं। संतति से, संस्कृति से,सजाया…
व्यर्थ उम्मीदें अपने हिस्से के ग़म,ख़ुद ही सँभालने होंगेकोई आएगा,ऐसी तो तू उम्मीद ना कर मंज़िलें अपने ही पैरों केतले मिलती हैंकोई बैसाखियाँ लाएगा,ऐसी तो तू उम्मीद ना कर कल…
आसमान का घर मिटाना होगा एक दिननक़्शों से लकीरों कोऔर धरती कोउसका घर लौटना होगा परिंदों को वृक्ष,वृक्षों को ज़मीनज़मीन को नदियाँनदियों को पानीपर्वतों को ख़ामोशीजंगल वासियों कोउनका घर लौटना…
लहरें लहरों का ये सागर है या सागर लहर में हैमैं हूँ सफ़र में या मेरी मंज़िल सफ़र में है सजदे में सर झुकाऊँ या सजदा ये सर करूँमैं बेख़बर…
मुसाफ़िर हर शख़्स मुसाफ़िर है,मुसाफ़िर से गिला कैसाकुछ दूर चला संग वो,फिर उससे गिला कैसा हर शख़्स का किरदार अलग,ख़्वाब अलग, मंज़िल अलगवो राह चला अपनी,राही से गिला कैसा रेशम…
मैं वो नहीं मैं वो नहींजिसे तुम सुनते होघंटि यों में अज़ानों में। मैं वो नहींजिसे तुम देखते होया पत्थरों मेंया चंद इंसानों में। मैं वो नहींजिसे तुम ढूँढ़ते होअपने…
मेरा क्षितिज कितनेबेतरतीब से टुकड़ेज़हन की गलियों मेंबिखरे हैंज़िंदगी केहालात केख़यालात केसवालात के ज़र्रा ज़र्राजोड़ता हूँतरतीब सेलफ़्ज़ दर लफ़्ज़क़ाफ़िया दर क़ाफ़ियाक़तरा दर क़तराहर शब्द लेकिनअलग हैआकार मेंप्रकार मेंमायने में मैंनेहर…
कौन कब कहाँ है कौन कब कहाँ है मिट्टी जानती हैकिसका निशाँ कहाँ है मिट्टी जानती है काशी काबा क्या है है दैरो हरम में क्याकिसमें कहाँ ख़ुदा है मिट्टी…
निशब्द तुमनेबड़ी ख़ामोशी से कहामेरे भीतरचिल्लाते, शोर मचातेमन कोऔर चिल्लाओऔर शोर मचाओथोड़ा और ज़ोर सेऔर तब तक यूँ ही चिल्लाते रहोजब तकतुम्हारे अंतर्मन के पर्दे तुम्हारे मन कीझुँझलाहट सेये नहीं…
हूक लो कारी बदरिया आई घिरइक हूक उठी हो माई फिरकदम्ब पे कोयल आ बैठीअब देगी कूक सुनाई फिर आँगन में एक साये सालो दिखा वही हरजाई फिरतन मन सिकोड़…
झगड़ा दिल कहता है पूछ लो जाकरक्या वो मुझसे हैं नाराज़कहती है फिर रूह उबल करआ जाओ तुम अब भी बाज़जाओ मिल आओ दिल बोलाजीने का ये ही अंदाज़काटो दिन…
उसके श्रम के आँसू अब्र से कल्पित कोमल चक्षु उसके भींग गए उसके श्रम के आँसू वह हृदय स्थल तक भीत गए मेरी कामना की प्यास का नज़ारा एक यह…
कटघरा रात का अँधेरासन्नाटा, औरमेरे वो एकाकी पलचिन देते हैं मुझेमन के कटघरे मेंहर रोज़पूछती हूँकितने सवालखुद सेदेती हूँ हर जवाबखुद हीहोती हूँकभी आरोपी, कभी दोषीखुद ही पक्ष, खुद ही…
भली थी इक लड़कीकितनीभली थीनाज़ बिछौनेपली थीमाँ अँगना में खेलतीजूही कीकली थीपिता हथेली पे रखीगुड़-मिश्रीडली थीअल्हड़ हिरना झूमतीथोड़ी सीपगली थीभावी की गलियों मेंस्वप्न संजोएचली थीब्याही तो बेगाने घरधू-धू करजली थीबस…
शहीदों के बच्चे बड़े हो जाते हैं शहीदों के बच्चेबड़ा होने से पहले ही। पढ़ लेते हैं माँ की आँखों कीमूक भाषाजान लेते हैं मौन आह कीपरिभाषारोक लेते हैं कोरों…
https://youtu.be/5k6CE7uNdB0
एकाकी चलती जाऊँगी एकाकी चलती जाऊँगी। रोकेंगी बाधाएँ फिर भीबाँधेंगी विपदाएँ फिर भीराहें नई बनाऊँगीएकाकी चलती जाऊँगी। संकल्पों के सेतु होंगेनिष्ठा दिशा दिखाएगीसाहस होगा पथ प्रदर्शकआशा ज्योत जलाएगी विश्वासों के…